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तनाव, घबराहट, मूड ऑफ होना या फिर उदासी, ये सब लक्षण जिंदगी में एक बार नहीं आते। ये हर दिन आते-जाते रहते हैं। एक दिन में कई बार भी आ सकते हैं। इनके आने और जाने की प्रक्रिया चलती रहती है। लेकिन इन वजहों से हमारे काम, हमारा रुटीन, हमारी बॉडी लैंग्वेज, शरीर में ऊर्जा का स्तर अमूमन ज्यादा प्रभावित नहीं होता। जब ऐसे इमोशंस आकर ठहर जाएं और किसी के मन में अपना घर बनाने लगें तो दिक्कत है। जिस वजह से हमारे सामान्य काम भी प्रभावित होने लगें या उदासी का स्तर उस जगह तक पहुंचने लगे कि मन के भीतर से ऐसी आवाज आने लगे कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता, किसी से बात करने का मन बिलकुल न हो। उन सभी चीजों से मन पूरी तरह हट जाए जिनमें पहले काफी दिलचस्पी थी।
लक्षण और इसकी गंभीरता के आधार पर डिप्रेशन को 3 कैटिगरी में बांट सकते हैं:
1. माइल्ड डिप्रेशन: इसे डिप्रेशन की शुरुआत कह सकते हैं। डॉक्टर की जरूरत यहीं से पड़ती है। कई बार हम इस स्थिति को हल्के में ले लेते हैं। इसमें अमूमन दवा शुरू करने की जरूरत नहीं पड़ती।
हर दिन का रुटीन प्रभावित होने लगे।
उदासी हावी होने की कोशिश करे, पर पूरी तरह न हो पाए।
नींद खराब हो, लेकिन कुछ घंटे फिर भी सो पाएं।
भूख का कम या ज्यादा लगने लगे।
अपनी पसंद की चीजों से मन हटने लगे।
सिर दर्द की शिकायत भी शुरू हो जाए।
खुदकुशी का ख्याल मन में आने लगे।
बहुत जल्दी चिढ़न होने लगे।
2. मॉडरेट डिप्रेशन
इसे माइल्ड डिप्रेशन से आगे की स्टेज कह सकते हैं। लेकिन इसमें लक्षण गंभीर होने लगते हैं। ऐसे में डॉक्टर के पास जाना बहुत जरूरी हो जाता है।
हर दिन का काम पूरी तरह डिस्टर्ब हो जाए। वह बात तो करे, लेकिन अपने ऑफिशल काम करने में सक्षम न हो।
नींद की स्थिति ज्यादा बुरी हो सकती है।
भूख बिलकुल न लगे या बहुत ही ज्यादा लगने लगे।
खुद को नुकसान पहुंचाने या खुदकुशी की इच्छा होने लगे।
सब कुछ छोड़कर कहीं भाग जाने का मन करने लगे।
जल्दी चिढ़ने लगे या कई बार हिंसक भी होने लगे।
बात करने से ही भागने लगे।
सेक्स की इच्छा न के बराबर हो जाए।
डिप्रेशन की वजह से नशे की शुरुआत हो जाए।
3. सीवियर डिप्रेशन
नाम से ही पता चल रहा है कि सीरियर डिप्रेशन में मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है।
कुछ भी करना अच्छा नहीं लगे।
अपने हर पसंदीदा काम से खुद को अलग करने लगे।
प्रफेशनल ज़िंदगी लगभग खत्म हो जाए।
एनर्जी लेवल जीरो पर पहुंच जाए।
खाना खाए बिना रहने लगे।
सेक्स की इच्छा खत्म हो जाए।
खुद को नुकसान पहुंचाए या खुदकुशी की कोशिश करने लगे।
नशे की लत लग जाए।
खुद को Hopeless, Helpless और Worthless महसूस करना।
ध्यान दें कि सभी डिप्रेशन की कैटिगरी में, सभी डिप्रेशन के मरीजों में सारे लक्षण मौजूद होना जरूरी नहीं है। हां, इनमें से ज्यादातर लक्षण हो सकते हैं।
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