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असफलता, संघर्ष और किसी अपने से बिछड़ जाने के कारण दुखी होना बहुत ही आम और सामान्य है। परन्तु अगर अप्रसन्नता, दुःख, लाचारी, निराशा जैसी भावनायें कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक बनी रहती है और व्यक्ति को सामान्य रूप से अपनी दिनचर्या जारी रखने में भी असमर्थ बना देती है तब यह डिप्रेशन नामक मानसिक रोग का संकेत हो सकता है
डिप्रेशन के कारण
डिप्रेशन का कोई एक कारण नहीं होता क्योंकि यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि किसी को डिप्रेशन किस कारण से हुआ है। किसी व्यक्ति को डिप्रेशन चिंता के कारण हो सकता है तो किसी के डिप्रेशन की कोई और वजह हो सकती है। चिकित्सकों व एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि डिप्रेशन के पीछे किसी कारण की कोई भूमिका नहीं होती। ये अलग-अलग कारणों से हो सकता है।
ऐसे में डिप्रेशन के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. अस्वस्थ मनोदशा
अस्वस्थ मनोदशा एक ऐसी मनोदशा होती है जिसके कारण हमें सुख का अनुभव नहीं होता। इसमें चिंता, उदासीनता, खालीपन, निराशा, घबराहट आदि सम्मिलित हैं। इन सभी के कारण अगर हमें सुख ना मिले तो हम हमेशा दुखी रहते हैं और इन सब के कारण हमारी उर्जा का नुक़सान होता रहता है। हमारा मानसिक स्तर प्रभावित होता रहता है।अस्वस्थ मनोदशा के कारण हमें डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। हमारे मन में नकारात्मक विचार उठते रहते हैं। हम अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इसी के साथ साथ हमें बार बार निराशा का अनुभव होता रहता है। अस्वस्थ मनोदशा के कारण हम जल्दी इरिटेट हो जाते हैं। अच्छे काम को भी हम बुरा कह जाते हैं।
हम भला बुरा सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में इंसान सदा लाचारी की स्थिति में रहता है। उसे सदा निराशा घेरे रहती है। वह अपने आस पास किसी को पसंद नहीं करता। अकेलापन उसे अच्छा लगने लगता है अगर कोई उसे अच्छी बात भी समझाता है तो वह उसे कांटे की तरह चुभने लगती है।हर बात पर वह लड़ाई झगड़ा करने पर उतर जाता है। वह हमेशा अपनी भविष्य की चिंता करता है और इसी के चलते व्यक्ति वर्तमान स्थिति में हो रही आनंददायक चीज़ों का सुख भी महसूस नहीं कर पाता है। ये सारी चीज़ें डिप्रेशन को जन्म दे सकती हैं।
2. निद्रा की कमी
मनुष्य को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी है नींद पूरी करना। एक वयस्क इंसान को 24 घंटे में कम से कम 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने की आवश्यकता होती है।अगर वह अपनी नींद पूरी नहीं कर पाता है तो उसे थकावट महसूस होगी। थकावट के कारण उसे हर काम में आलस्य लगेगा। इन्हीं सब कारणों से उसका पूरा शरीर भारी रहेगा और वह खुद को तरोताजा महसूस नहीं कर पाएगा। नींद की कमी से व्यक्ति का किसी भी कार्य में दिल नहीं लगता। फलस्वरूप वो अपने काम को टालता रहता है। इससे न सिर्फ़ काम ही पीछे रह जाता है बल्कि व्यक्ति को भयंकर डिप्रेशन भी हो सकता है।नींद की कमी से मस्तिष्क अशांत हो जाता है जिससे ना चाहते हुए भी दिमाग़ में नकारात्मक विचार आते हैं। इससे डिप्रेशन की समस्या का जन्म हो सकता है।
3. संज्ञानात्मक
संज्ञानात्मक अर्थात सोचने की क्षमता का कम होना। इसके कारण व्यक्ति की एकाग्रता में कमी हो सकती है। वह हर काम धीमी गति से करता है। वह हर छोटी छोटी चीजों को भूल जाता है और उसे कुछ भी याद नहीं रहता। उसे कुछ नई और कुछ पुरानी बातें याद आती रहती हैं। ये सब चीज़ें है जो मनुष्य को डिप्रेशन का शिकार बना सकती हैं।
4. नशा
नशा यह एक ऐसी आदत है जिसमें लोग वास्तविकता से दूर रहते हैं। उनमें वास्तविकता स्वीकार करने की शक्ति नहीं होती। एक प्रकार से हम यह कह सकते हैं कि नशे से ग्रस्त लोग डरपोक हो सकते हैं। नशा करने वाला कोई भी व्यक्ति जीवन के उतार चढ़ाव का सामना करने की क्षमता को खो देता है। नशे से ग्रस्त कोई भी इंसान वास्तविकता से इतना दूर हो जाता है कि यदि उसे वास्तविक जीवन की थोड़ी भी परेशानी सामने दिखती है तो वह तुरंत डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। नशा डिप्रेशन का एक बहुत बड़ा कारण है।
अन्य कारण-
1.) तनावपूर्ण घटनाएं
2.) आर्थिक समस्या
3.) पुरानी बीमारी
4.) मानसिक बीमारी का व्यक्तिगत इतिहास
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