healthplanet.net

Posted on

प्री-डायबिटीज के कारण – Pre-Diabetes Causes in Hindi

प्री-डायबिटिक(Pre-Dibaetes) स्थिति वह स्थिति है जब आपको मधुमेह नहीं होते हैं और फिर भी रक्त शर्करा का स्तर सामान्य स्तर से अधिक होता है। प्री-डायबिटीज संकेत के रूप में माना जाता है कि एक व्यक्ति को टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा है। और टाइप २ डायबिटीज के सही उपचार और प्रबंधन के लिए ज़रूरी है कि उसका जल्द से जल्द पता चल जाये ताकि और डायबिटीज की जटिलताओ से बचा जा सके| आपको निम्न स्थितियों में प्री-डायबिटीज होने का खतरा अधिक होता है:

मोटापा या अधिक वजन होना
अगर आपकी जातीयता अफ्रीकी अमेरिकी, मूल अमेरिकी, लातीनी या प्रशांत द्वीपवासी है
अगर आप एक अस्वास्थ्यकर आहार जिसमें मीठा पेय पीना, रेड मीट खाना शामिल है का लम्बे समय से सेवन कर रहे है
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Poly Cystic Ovary syndrome) से पीड़ित है
अगर आपको गर्भकालीन मधुमेह है

प्री-डायबिटिक ब्लड शुगर लेवल: यदि आप मोटापे, परिवार में मधुमेह के आनुवंशिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य बीमारियों जैसे जोखिम वाले कारकों से पीड़ित नहीं हैं, और आपका रक्त शर्करा का स्तर 140 से 199 मिलीग्राम/डीएल (7.8 से 11.0 मिमीोल/लीटर) है, तो यह एक है प्री-डायबिटीज के संकेत है |

प्री-डायबिटीज के संकेत : रक्त शर्करा का स्तर-140 से 199 mg/dL (7.8 से 11.0 mmol/L)

प्री-डायबिटिक स्थितियों में उचित देखभाल न करने से टाइप 2 डायबिटीज हो सकता है। इस प्रकार, प्री-डायबिटीज बीमारी का प्रारंभिक चेतावनी संकेत है जिसे नज़र अंदाज़ नहीं किआ जा सकता |

प्री-डायबिटीज (Pre-diabetes) की स्थिति तब होती है जब रक्त शर्करा का स्तर 140 से 199 मिलीग्राम / डीएल (mg/dL) की सीमा में होता है। यह मधुमेह का एक प्रारंभिक चेतावनी संकेत है और इसके लिए उचित देखभाल की आवश्यकता होती है।

टाइप 1 डायबिटीज के कारण – Type 1 Diabetes in Hindi

टाइप 1 डायबिटीज (Type-1 Diabetes) जिसमे शरीर सही मात्रा मे इन्सुलिन का उतपादन नहीं कर पता है | इन्सुलिन की शरीर मे कमी होती है जिसके कारण ब्लड मे से ग्लूकोस सही से कोशिकाओ मे प्रवेश नहीं कर पता और ब्लड मे ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ी रहती है | इसका दूसरा नाम जुवेनाइल डायबिटीज (juvenile diabetes ) है क्यों की यह बच्चों में अधिक आम होती है। यह एक पुरानी स्थिति है जहां अग्न्याशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ होते हैं। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान होती है।

टाइप-1 डायबिटीज के बच्चो और बड़ो मे कारण:

स्व-प्रतिरक्षा रोग (ऑटो -इम्यून डिजीज, Auto-immune disease): जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय (Pancreas) की इंसुलिन-उत्पादक बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है। इसके कारण इन्सुलिन का उतपादन कम हो जाता है|
वायरल संक्रमण (Virus infection): वायरल संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बिगाड़ सकता है और मधुमेह का कारण बन सकता है |
आनुवंशिक कारक: हमारे शरीर में HLA-DQA1, HLA-DQB1, HLA-DRB1 नामक ये जीन (Genes) होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को मजबूत रहने में मदद करते हैं। इन जीनों में कोई भी भिन्नता प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है और मधुमेह (Diabetes) का कारण बन सकती है।
रासायनिक विषाक्त पदार्थ: कुछ रासायनिक विषाक्त पदार्थ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immue system) को बदल देते हैं और अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे मधुमेह होता है।


टाइप 2 डायबिटीज के कारण – Type 2 Diabetes Causes in Hindi

टाइप 2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) एक चिकित्सा स्थिति है जब शरीर इंसुलिन प्रतिरोधी (Insulin resistance) हो जाता है। टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज में, कोशिकाएं इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी (Insulin resistance) बनने के कारण रक्त से ग्लूकोज की उचित मात्रा को अवशोषित (Absorb) करने में असमर्थ होती हैं। यह रक्त शर्करा (blood sugar) के स्तर को बढ़ाता है। उच्च ग्लूकोज स्तर अग्न्याशय (Pancreas) को अधिक इंसुलिन उत्पन्न करने का संकेत देता है | इन्सुलिन की डिमांड की वजह से बीटा सेल्स को अधिकः काम करना पढ़ता है नतीजन वह डैमेज या कमज़ोर हो जाती है| इससे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं और इस प्रकार इंसुलिन (Insulin) की कमी हो जाती है। इस प्रकार, रक्त शर्करा का स्तर बढ़ता है, और समय के साथ यह संचार प्रणाली (Circulatory system) और तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को प्रभावित करता है।

कई कारक टाइप 2 मधुमेह का कारण बनते हैं। फिर भी, टाइप -2 मधुमेह का सही कारण स्पष्ट नहीं है। संभावित कारण (बच्चो और बड़ो मे) हैं:

मोटापे से पीड़ित और एक निष्क्रिय जीवन शैली का पालन करना। जिसके कारण शरीर में इंसुलिन की मांग अधिक हो जाती है जिससे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है।
जिगर में ग्लूकोज का अधिक उत्पादन
परिवार और वंशानुगत के कारण आनुवंशिक प्रभाव
अग्न्याशय में बीटा-सेल की शिथिलता के कारण इंसुलिन उत्पादन में कमी आती है|

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info