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डायबिटीज के प्रकार (Types of Diabetes)


डायबिटीज के प्रकार तीन होते हैं, जिन्हें टाइप 1 (Type 1 Diabetes) , टाइप 2 (Type 2 Diabetes) , और जेस्टेशनल डायबिटीज (gestational diabetes) कहा जाता है। ये तीनों ही समस्याएं आपको लम्बे समय तक परेशान कर सकती हैं। इसलिए इससे जुड़ी जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए शुरुआत करते हैं टाइप 1 डायबिटीज से।


टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes)


टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) या जुवेनाइल डायबिटीज एक तरह का ऑटोइम्यून विकार है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम आंतों पर अटैक करता है, जिसके कारण शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।
अगर आप टाइप 1 डायबिटीज के शिकार हैं तो इसके लक्षण कम उम्र यानी बचपन से ही नजर आने लगते हैं।
टाइप 1 डायबिटीज का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टाइप 1 डायबिटीज विरासती और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन से होती है।

आपको टाइप 1 डायबिटीज का खतरा हो सकता है अगर – (Risk of type 1 diabetes)


आपके माता-पिता या भाई-बहन में से किसी को टाइप 1 डायबिटीज की बीमारी है।
वायरल बीमारी के संपर्क में जल्दी आने जैसी परिस्थितियां होती हैं।
डायबिटीज (Diabetes) ऑटोएंटीबॉडीज की उपस्थिति।
विटामिन-डी कि कमी, बच्चों को कम उम्र से ही गाय का दूध पिलाना और 4 महीने से कम उम्र में डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ जैसे सीरियल्स खिलाना।
यह टाइप 1 डायबिटीज का सीधा कारण तो नहीं हैं लेकिन यह उसके खतरे को बढ़ाते हैं।
फिनलैंड और स्वीडन जैसे देशों में टाइप 1 डायबिटीज के खतरे बहुत ज्यादा हैं।



डायबिटीज के प्रकार – टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes)


टाइप 2 डायबिटीज, डायबिटीज (Type 2 Diabetes) की बहुत आम प्रकार है जिसमें डायबिटीज के तमाम प्रकारों से जुड़े 90 से 95 प्रतिशत लोग इस केटेगरी में आते हैं। यह बीमारी ज्यादातर वयस्क के शरीर में अपनी जगह बनाती है। आजकल, मोटापा बढ़ने के कारण युवाओं और बच्चों में भी टाइप 2 डायबिटीज आम हो रही है। ऐसा मुमकिन है कि आपको भी टाइप 2 डायबिटीज हो, लेकिन आप इस बात से बेखबर हों।


टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) में आपके सेल्स इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाते हैं और आपका अग्न्याशय (पैंक्रिया) जरुरत के मुताबिक इंसुलिन नहीं बना पाता। आपके सेल्स को ऊर्जा के लिए शकर की जरुरत होती है लेकिन इस स्तिथि में चीनी का निर्माण सेल्स के बजाय रक्तप्रवाह में होता है।


आपको टाइप 2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है अगर – (Risk of type 2 diabetes)


आपको टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) होने का खतरा तब बढ़ जाता है, जब आपकी स्थिति इस तकलीफ़ों से जुड़ती है –


वजन का बढ़ना
जरूरत से ज्यादा फैट का जमाव (खास तौर पर पेट के इर्द-गिर्द)
इनएक्टिव रहना (लगातार बैठे रहना)
फैमिली हिस्ट्री (जब आपके परिवारजनों को भी डायबिटीज़ की समस्या हो)
ब्लड लिपिड लेवल (गुड कॉलेस्ट्रोल की कमी)
प्रीडायबिटीज की समस्या
उम्र का बढ़ना (बढ़ती उम्र में डायबिटीज की समस्या आम हो जाती है)



जब आप इन स्थितियों से गुज़रते हैं, तो आपको टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) होने का खतरा बढ़ जाता है।


डायबिटीज के प्रकार और भी हैं (Other types of diabetes)


अब तक हमने बात की टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बारे में, लेकिन इसके अलावा और भी दो तरह के डायबिटीज पाए जाते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।


डायबिटीज के प्रकार – जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes)


डायबिटीज के प्रकार में जेस्टेशनल डायबिटीज (gestational diabetes), डायबिटीज की वह है जो केवल गर्भवती महिलाओं को होती है। यह बीमारी गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी प्रभावित करती है। जेस्टेशनल डायबिटीज आमतौर पर डिलीवरी के बाद खत्म हो जाती है।


अन्य डायबिटीज (gestational diabetes) के प्रकार में विरासत में मिलना, सर्जरी या दवाओं के कारण होना, कुपोषण के जरिए होना, इंफेक्शन और दूसरी बिमारियों के नतीजे में होने वाली डायबिटीज शामिल हैं।


डायबिटीज के प्रकार – डायबिटीज इन्सिपिडस (Diabetes insipidus)


डायबिटीज का ये प्रकार में ऊपर बताई गई डायबिटीज के प्रकार से मिलता-जुलता है, लेकिन दरअसल यह किडनी में पानी न रुक पाने के कारण होता है। यह डायबिटीज़ का रेयर प्रकार है और इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है।


डायबिटीज के प्रकार – मच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज ऑफ़ द यंग (Maturity onset diabetes of the young -MODY)


MODY टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज से भिन्न होता है, जो सालों दर सालों लोगों की फॅमिली में पाया जाता है। ये सिंगल जीन के म्यूटेशन के कारण होता है। यदि माता-पिता के जीन में म्यूटेशन होता है, जो इसके बच्चे में आने के 50 प्रतिशत तक चांसेस होते हैं। लेकिन यदि बच्चे के जीन में ये म्यूटेशन नहीं आता, तो उन्हें 25 साल की उम्र के बाद कभी भी MODY की तकलीफ हो सकती है।


डायबिटीज के प्रकार – नियोनेटल डायबिटीज


नियोनेटल डायबिटीज उसे कहते हैं, जो बच्चे को 6 महीने की उम्र से पहले अपनी गिरफ्त में ले लेती है। क्योंकि ये ऑटोइम्यून डिजीज नहीं होती, इसलिए ये टाइप 1 डायबिटीज से अलग मानी जाती है।


डायबिटीज के प्रकार – लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन अडल्ट (Latent autoimmune diabetes in adults-LADA)


डायबिटीज की बीमारी तब होती है जब हमारा ब्लड ग्लूकोज जिसे ब्लड शुगर कहा जाता है, बहुत हाय हो जाता है। ब्लड ग्लूकोज, हमारी एनर्जी का मुख्य स्त्रोत है और यह हमें उस भोजन से मिलता है जिसे हम खाते हैं। इसके साथ ही इंसुलिन वो हॉर्मोन है जो हमारे अग्नाशय द्वारा बनाया जाता है। यह हॉर्मोन, ऊर्जा के लिए उपयोग किए जाने के लिए भोजन से मिले ग्लूकोज को कोशिकाओं में जाने में मदद करता है। कभी-कभी हमारा शरीर पर्याप्त या बिलकुल भी इंसुलिन नहीं बना पाता है। ऐसा भी होता है कि हमारा शरीर इंसुलिन का अच्छी तरह से उपयोग नहीं कर पाता है।


तब यह ग्लूकोज खून में रहता है और कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता। समय के साथ, रक्त में बहुत अधिक ग्लूकोज होने से डायबिटीज और कई अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है। लेकिन डायबिटीज को मैनेज करने और स्वस्थ रहने के कई तरीके हैं।

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