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बायो पोलीमर पोली टेक्टी एसिड कुछ हड्डी का ही पदार्थ है। वैज्ञानिकों ने हाइड्रोक्सी एपेटाइट को मिलाकर टूटी हुई हड्डियों में लगाने के लिए छोटे-छोटे कील, प्लेट और रॉड बनाए हैं। एक्सीडेंट आदि में हड्डियों के टूटने पर उसमें लगाकर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है।

बायो पोलीमर पोली टेक्टी एसिड कुछ हड्डी का ही पदार्थ है। वैज्ञानिकों ने हाइड्रोक्सी एपेटाइट को मिलाकर टूटी हुई हड्डियों में लगाने के लिए छोटे-छोटे कील, प्लेट और रॉड बनाए हैं। एक्सीडेंट आदि में हड्डियों के टूटने पर उसमें लगाकर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है। फिर जैसे-जैसे कोशिकाएं बढ़ती हैं, टूटी हुई जगहों पर यह रॉड जगह बनाने लगता है।

बायो पोलीमर की खासियत

बायो पोलीमर स्वत: बायो डीग्रेडेबल है। यानी उसे दोबारा आपरेशन आदि के माध्यम से निकालने की जरूरत नहीं है। शोध में पाया गया कि छह माह से एक साल तक यह पोलीमर राड अंदर ही गल जाते हैं। इसमें आम हड्डियों से लोड क्षमता अधिक होती है। कोई साइड इफेक्ट नहीं पाया गया है।

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