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तीसरे महीने में बच्चे थोड़ा पलटने की कोशिश करते हैं और पेट के बल लेटने की कोशिश करते हैं। वह अपने सामने किसी भी चीज को पकड़ने का प्रयास कर सकते हैं या फिर लेटते समय पैरों को खूब चलाते हैं। वह हाथों को खोल कर या फिर बंद कर कर भी रख सकते हैं। पेट के बल लेटते समय सिर और छाती को ऊपर की तरफ उठाते हैं।पेरेंट्स को बच्‍चे के लिए बेडटाइम रूटीन बनाना होगा और रोज सख्‍ती से उसका पालन भी करना होगा। कमरे का माहौल शांत रखें ताकि बच्‍चे को जल्‍दी नींद आ सके। जल्‍दी नींद आने के लिए आप बच्‍चे को शाम को सोने से पहले नहला भी सकते हैं। बच्‍चे को अपनी गोद में लें और उसे सुलाने की कोशिश करें।
आपका शिशु अब आपसे बड़बड़ा कर बातें करना शुरु कर सकता है। आप दिन भर शिशु से बातें करें, इससे उसकी भाषा का कौशल विकसित होने में मदद मिलेगी। जो भी काम आप कर रही हों, शिशु को उसके बारे में बताएं, फिर चाहे वह पौधों में पानी डालना ही हो।

हो सकता है आप देखें कि शिशु उत्साह में आकर अपनी भुजाओं को हिला रहा है और टांगों से लाते मार रहा है। अगर आप शिशु के पैर जमीन पर टिका कर उसे पकड़कर खड़ा करें, तो वह अपनी टांगों पर नीचे की तरफ झुकने का दबाव डालेगा।

आपका शिशु अब अपने दोनों हाथ एक साथ ला सकता है, मुट्ठियां खोल सकता है और अपनी उंगलियों के साथ खेल सकता है। वह अपनी बंद मुट्ठी से लटकते हुए खिलौनों पर हाथ भी मार सकता है। शिशु के सामने कोई खिलौना लेकर बैठें, और देखें कि क्या वह उसे पकड़ने का प्रयास करता है। इस तरह उसके हाथ और आंख के बीच तालमेल विकसित होने में मदद मिलेगी।
मेरा शिशु स्थिरता से अपना सिर कब उठा सकेगा?
आपका शिशु अब बलिष्ठ हो रहा है। इस महीने वह पेट के बल लेटे हुए अपना सिर उठा सकता है और कुछ मिनटों तक इसी स्थिति में रह भी सकता है। अगर शिशु सहारे से बैठा हुआ हो, तो हो सकता है वह अपना सिर स्थिर और सीधा रख सके।

जब शिशु पेट के बल लेटा हो तो आप शायद पाएंगी कि वह अपना सिर और छाती ऊपर की तरफ उठाता है, जैसे कि वह पुश-अप करने वाला हो। सिर उठाने के लिए शिशु को प्रोत्साहित करने के लिए आप उसके सामने बैठकर ऊपर की तरफ कोई खिलौना हिलाएं और देखें कि क्या वह ऊपर देखने का प्रयास करता है। शिशु को पेट के बल लेटने का पर्याप्त समय देने से उसके सिर और गर्दन की मांसपेशियां विकसित और मजबूत होती हैं।
मेरा बच्चा पलटना कब शुरु करेगा?
अगर आप शिशु को पेट के बल लिटाएं, तो वह पलटकर पीठ के बल आकर आपको चौंका सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके कूल्हे, घुटने और कोहनी के जोड़ मजबूत व और अधिक लचीले हो रहे हैंं। इसी वजह से शिशु के लिए खुद को ऊपर की तरफ उठा पाना आसान हो जाता है।

आपका शिशु बिना कोई संकेत दिए खुद ही पलटना सीख जाएगा, और इससे न केवल आप बल्कि वह स्वयं भी आश्चर्यचकित होगा! इसलिए शिशु को ऊंची सतह पर कभी भी अकेला न छोड़ें। अगर आप बिस्तर पर लिटाकर शिशु की लंगोट बदल रही हैं, तो अपना एक हाथ हमेशा शिशु के ऊपर ही रखें।
शिशु पूरी रात सोना कब शुरु करेगा?
नींद से वंचित माता-पिता अंतत: अब से कुछ राहत की उम्मीद कर सकते हैं। तीन से चार महीने के बाद से शिशु की नींद की दिनचर्या संभवतया स्थिर होना शुरु हो जाती है। इस उम्र के कुछ शिशु पूरी रात भी सो सकते हैं, हालांकि, अधिकांश शिशु अभी भी कुछ महीनों तक रात में स्तनपान करने के लिए जागते हैं।

यदि आपका शिशु भी आपको रात में जगाता है, तो फिक्र न करें। याद रखें कि ऐसा हमेशा नहीं रहेगा! शिशु की नींद की दिनचर्या का पालन करना जारी रखें, ताकि शिशु अपने सोने के समय को समझ सके। आप हमारी लोरियों को सुन सकती हैं और उनके बोल याद करके शिशु को सुना भी सकती हैं।
क्या शिशु को मेरे प्रति कोई लगाव पैदा हुआ है?
तीन महीने का होने पर या फिर इससे पहले से ही शिशु यह जानता है कि आप उसके लिए खास हैं। संभवतया अभी भी वह अनजान लोगों को देखकर मुस्कुराएगा, खासकर कि यदि वे सीधे उसकी आंखों में देखे और उससे प्यार से बोले व बातें करें तो।

मगर, शिशु अब यह पहचानना शुरु कर देता है कि उसकी जिंदगी में किसका स्थान क्या है और वह कुछ लोगों को अवश्य ही दूसरों की तुलना में विशेष दर्जा देता है।

दिमाग का जो हिस्सा हाथ और आंखों के समन्वय को नियंत्रित करता है और शिशु की चीजों को पहचानने में मदद करता है (पार्श्विका पालि, पेराइटल लोब), वह अब तेजी से विकसित हो रहा है। और दिमाग का जो हिस्सा जो सुनने, भाषा ज्ञान और सूंघने में सहायता करता है (टेम्पोरल लोब), वह भी अब अधिक सक्रिय हो रहा है।

इसलिए अब जब आपका शिशु आपकी आवाज सुनता है, वह सीधे आपकी तरफ देख सकता है। प्यार भरी मधुर आवाज निकालता है या बात करने का प्रयास कर सकता है।
क्या तीन महीने के बच्चे को किताबें पढ़कर सुनाना फायदेमंद है?
आपका शिशु अभी कहानियों को समझने के लिए बहुत छोटा है, मगर शिशु को कहानियां पढ़कर सुनाना उसके साथ बंधन मजबूत बनाने का अच्छा तरीका है। साथ है यह भविष्य में उसका भाषा कौशल विकसित करने में मदद करेगा।

अलग उच्चारणों और लहजों से अपनी आवाज के लय को बदलने का प्रयास करें, ताकि शिशु की रुचि बनी रहे। अगर, शिशु का मन कहानी से हटने लगे और वह किसी दूसरी तरफ देखने लगे, तो कुछ और आजमा कर देखें। या फिर आप उसे कुछ समय का आराम भी दे सकती हैं।

अगर, आपने अभी तक शिशु को कहानी सुनाना शुरु नहीं किया है, तो सोने के समय शिशु को कहानी सुनाना शुरु करने का यह सही समय है। ऐसी बहुत सी किताबें हैं जिन्हें आप शिशु को पढ़कर सुना सकती हैं। आप कपड़े या गत्ते (बोर्ड) की किताबें ले सकती हैं जिनमें बड़े, चमकीले रंग की तस्वीरें हों, जिनके बारे में आप बात कर सकें।

अगर, आप यह नहीं समझ पाती कि शिशु से क्या बात की जाए, तो उसे अपने और परिवार के सदस्यों के बारे में ही बताना शुरु कर सकती हैं। आप घर के सबसे अरुचिकर काम को करते हुए, उसके बारे में भी शिशु को बता सकती हैं।

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