healthplanet.net

Posted on

प्रसव के बाद स्वाभाविक है कि आपका सारा ध्यान अपने नवजात शिशु पर होगा। मगर, आप खुद पर और अपने आहार पर भी ध्यान देने का प्रयास करें। इसलिए, जरुरी है कि आप स्वस्थ व सेहतमंद आहार लें।

जई का दलिया
जई (ओट्स) आयरन, कैल्शियम, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन के बेहतरीन स्त्रोत हैं। चूंकि जई में काफी ज्यादा फाइबर होता है, वे कब्ज को दूर रखने में भी मदद कर सकते हैं। ओट्स खाने का सबसे आम तरीका है इन्हें पकाकर दूध और मेवे डालकर खाना। आप इसकी पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें केले, सेब या आम जैसे फल भी काटकर डाल सकती हैं। नमकीन रूप में बनाने के लिए आप ओट्स का उपमा या खिचड़ी भी बना सकती हैं। इसकी बहुत सी जल्दी से पकने वाली वैरायटी उपलब्ध हैं, जिनमें से आप चुन सकती हैं।

हल्दी
हल्दी में विटामिन बी6 और सी, फाइबर, पोटाशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज होता है। इस तरह, यह जरुरी विटामिनों से भरपूर है। यह न केवल भारतीय पाक कला में एक मानक सामग्री है, बल्कि इसका उपयोग बाहरी व आंतरिक घावों के उपचार में भी सदियों से किया जा रहा है। इस बात के कुछ प्रमाण हैं, जो बताते हैं कि हल्दी जलन कम करने में मदद करती है। यह प्रसव के बाद होने वाले घावों और पेट की गड़बड़ी को ठीक करने में मदद कर सकती है, हालांकि, इस बात को साबित करने के लिए सीमित प्रमाण उपलब्ध हैं। आप एक गिलास गुनगुने दूध में आधी छोटी चम्मच हल्दी मिला सकती हैं।

सौंठ
सौंठ में फाइबर, विटामिन बी6 और ई, आयरन, मैग्नीशियम, पोटाशियम, सेलेनियम और मैंगनीज होता है। यह आसानी से मिलने वाली सामग्री है और जलन दूर करने समेत कई फायदे देती है। उत्तर भारत में सौंठ के लड्डू काफी आम हैं। दक्षिण भारत में सौंठ से चटनी बनाई जाती है। आप अपने भोजन में थोड़ा सा सौंठ पाउडर डाल सकती हैं।

दाल-दलहन
दालें संतुलित आहार का एक जरुरी हिस्सा मानी जाती हैं। ये फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरपूर होती हैंं दालें जैसे मूंग और मसूर आसानी से पच जाती हैं। आप इनका हलवा या खिचड़ी बना सकती हैं। दाल-दलहनों का एक और फायदा यह भी है कि ये शरीर में चर्बी इक्ट्ठा होने से रोकती हैं।

अजवायन
पारंपरिक तौर पर यह माना जाता है कि अजवायन न केवल गैस और अपच के दर्द से राहत देती है, मगर यह स्तनदूध का उत्पादन बढ़ाने और गर्भाशय को संकुचित होने में मदद करती है। आयुर्वेद में यह स्तनदूध बढ़ाने के लिए जाना जाता है। इस बात को साबित करने के लिए अधिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, मगर प्रयोगशाला में और पशुओं पर किए गए अध्ययनों में अजवायन में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक तत्व पाए गए हैं। आप परांठे से लेकर हलवे तक अजवायन के बहुत से व्यंजन बना सकते हैं या फिर आप स्वाद बढ़ाने के लिए अपने भोजन में इसे ऐसे ही डाल सकते हैं। कई लोग रोजाना अजवायन का पानी भी लेते हैं।

मंडुआ/रागी
मंडुआ या रागी/नाचनी कैल्शियम और आयरन का बेहतरीन स्त्रोत है। प्रसव के बाद इन दोनों की ही आपको भरपूर मात्रा में चाहिए होते हैं। यह आपको डिलीवरी के बाद फिर से ताकत पाने में मदद कर सकता है। जिन माँओं को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी है, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। आप रागी से डोसा, इडली, रोटी और हलवा भी बना सकती हैं।

बादाम
बादाम में कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन बी12 व ई और कई खनिज जैसे कि मैग्नीशियम, कॉपर, मैंगनीज, पोटाशियम, कैल्शियम और जिंक आदि होते हैं। चूंकि बादाम में इतने सारे पोषक तत्व होते हैं, इसलिए प्रसव से उबरने के लिए यह एक आदर्श खाद्य पदार्थ है। बादाम बहुत से व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे बादाम वाला दूध, शीरा, हलवा आदि। यदि आपका कुछ पकाने का मन न करे, तो आप इन्हें स्नैक के तौर पर भी खा सकती हैं।

हरी सब्जियां
हरी सब्जियों आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती हैं, जिसकी जरुरत आपको फिर से ताकत पाने के लिए होती है। आप पालक, फ्रांस बीन, कमल ककड़ी, मेथी, टिंडा, परवल और ऐसी अन्य मौसमी सब्जियां खा सकती हैं।

मेथी
मेथी दाना आयरन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स के अच्छे स्त्रोत हैं। इन्हें आमतौर पर पीठ और जोड़ों के दर्द से बचाने के लिए जाना जाता है, हालांकि इस बात को साबित करने के लिए बहुत कम प्रमाण उपलब्ध हैं। आप इनका इस्तेमाल दाल, सब्जियां, पूरी या मीट पकाने के दौरान कर सकती हैं। स्तनपान करने वाली माँओं के लिए मेथी की चाय एक लोकप्रिय पेय है।

काले और सफेद तिल
ये छोटे, समतल बीज कैल्शियम, आयरन, कॉपर, मैगनीशियम और फॉस्फोरस से समृद्ध होते हैं। इन सभी पोषक तत्वों के साथ तिल शरीर को जरुरी खनिज प्रदान करते हैं। ये मल प्रक्रिया को नियमित करने में भी फायदेमंद माने जाते हैं। उत्तरी भारत में तिल के लड्डू बहुत लोकप्रिय हैं, मगर तिल से कई अन्य मीठे व्यंजन बनते हैं जैसे कि तिल पट्टी, रेवड़ी और चिक्की।

हल्‍दी का दूध और घी
नई मांओं खासतौर पर स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं को अधिक मात्रा में कैल्शियम की जरूरत होती है। डिलीवरी के बाद एक गिलास दूध में आधा चम्‍मच हल्‍दी डालकर पिएं। हल्‍दी एंटी इंफलामेट्री होती है और शरीर के घावों को भरने में मदद करती है जबकि दूध कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है।

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info