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शिशु के दस्त का उपचार कैसे करना चाहिए?
सुनिश्चित करें कि आपका शिशु अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करे, ताकि उसके लक्षणों में सुधार आए और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) न हो।
अगर आपका शिशु उचित मात्रा में स्तनपान या फॉर्मूला दूध पी रहा है, तो ये जारी रखें। इसके साथ-साथ, थोड़े बड़े शिशुओं को बीच-बीच में पानी, ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन (ओआरएस) घोल के घूंट भी पिलाए जा सकते हैं। दस्त के कारण शिशु के शरीर से जो तरल और लवण निकल जाते हैं, ओआरएस उनकी भरपाई करने में मदद करता है। साथ ही, शिशु जब भी उल्टी करे और पेशाब या मलत्याग करे तो उसे ओआरएस के घोल की कुछ घूंट पिलाएं।
डॉक्टर डायरिया की अवधि कम करने के लिए जिंक अनुपूरक लेने के लिए भी कह सकते हैं। आमतौर पर एंटिबायोटिक्स उन बच्चों को दी जाती है, जिनके मल में खून आ रहा हो।
शिशु जो अतिरिक्त तरल पदार्थ खो रहा है, उसकी पूर्ति करने के लिए उसे अतिरिक्त स्तनपान करवाएं। उसे फुल-स्ट्रेंथ फॉर्मूला दूध भी पिलाती रहें, यानि उसके दूध में निश्चित मात्रा से अतिरिक्त पानी मिलाकर उसे पतला न करें। फॉर्मूला दूध पीने वाले और ठोस आहार खाना शुरु कर चुके शिशुओं को उबालकर ठंडा किया पानी भी पिलाया जा सकता है।
ठोस आहार खाने वाले शिशुओं को नारियल पानी भी पिलाया जा सकता है, क्योंकि यह इलैक्ट्रोलाइट्स का भरपूर स्त्रोत है। शिशु को फलों के रस, ग्लूकोस और सोडायुक्त पेय न दें। जो शक्कर अवशोषित नहीं होती वह आंत में पानी इकट्ठा करती है और दस्त को बढ़ा सकती है।
शिशु को एंटि-डायरिया दवा न दें। 12 साल से कम उम्र के शिशुओं को यह दवा नहीं देनी चाहिए, क्योंकि इसके गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। यदि आप इसे लेकर चिंतित हों, या आपके मन में कोई सवाल हो तो हमेशा अपनी डॉक्टर से बात करें।
साथ ही, आपके शिशु की वजह से दूसरे बच्चों में भी डायरिया फैल सकता है। इसलिए जब उसने आखिरी बार पतला मलत्याग किया हो उसके कम से कम 48 घंटों बाद तक उसे डेकेयर या क्रेश न भेजें। इसके बाद दो हफ्तों तक शिशु को स्विमिंग के लिए न ले जाएं।
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