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अगर आपके बच्चे का पैर तिरछे हैं तो वह सीधा हो जाएगा। उक्त बातें शनिवार को बैंगलुरु के चिकित्सक डॉ. बासुकी वीआर ने कहीं। मौका था झारखंड ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का। बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआइ प्रेक्षागृह में दूसरे दिन सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह टाटा स्टील के वीपी सुनील भास्करन ने की। उन्होंने कार्यक्रम को सराहते हुए कहा कि आने वाले दिनों में चिकित्सा के क्षेत्र में डिजीटल इंडिया काफी मददगार साबित होगा। इसके माध्यम से मरीज व चिकित्सक दोनों का फायदा होगा। वहीं डॉ. बासुकी वीआर ने कहा कि नवजात बच्चों में पैर तिरछे होने की शिकायत पर अभिभावक डर जाते हैं। वह ठीक नहीं होने वाले बीमारी समझते हैं। खासकर किसी लड़की को होने पर परिजन की परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि उसकी शादी करनी होती है। लेकिन इस भ्रम से निकलने की जरुरत है। इसका इलाज पूरी तरह से संभव है। डॉ. बासुकी ने कहा कि पैर तिरछे होने की समस्या को 'क्लब फुट' कहते हैं। यह एक ऐसा रोग है, जिसमें जन्म से ही बच्चे के पैरों में टेढ़ापन रहता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार 1000 बच्चों में एक बच्चा इस रोग से प्रभावित होता है। 'क्लब फुट' से प्रभावित लगभग 50 फीसद बच्चों में ऐसा टेढ़ापन दोनों पैरों में होता है। इसका इलाज दो तरीके से होता है। प्लास्टर व सर्जरी। यह निर्णय चिकित्सक बीमारी देखने के बाद लेते है। जागरुकता के अभाव में बच्चे के परिजन काफी देर से चिकित्सक के पास पहुंचते है।

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