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घुटना खराब होना या घुटने में दर्द होना या फिर अधिक वजन के कारण घुटने खराब होने की समस्या में सर्जरी कराना ही एकमात्र उपाय नहीं है। पीआरपी भी इस तरह की समस्या में लाभदायक हो सकता है। यह एक तरह का इंजेक्शन है, जिसे देने पर समस्या हल हो जाती है।

क्या है पीआरपी थैरेपी: ये एक थैरेपी है जिसे प्लेटलेट्स-रिच प्लाज्मा थैरेपी के नाम से जाना जाता है इस प्रक्रिया में जिस व्यक्ति का उपचार किया जा रहा है उसी का रक्त लिया जाता है। इसमें एक प्रक्रिया के जरिये प्लेटलेट्स के साथ प्लाज्मा ट्यूब में एकत्र कराए जाते हैं। यह प्लाज्मा, जिसमें प्लेटलेट्स और ग्रोथ फेक्टर्स की मात्रा अधिक होती है, ऊतकों के पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त ऊतकों (टिश्यूज़) को ठीक करने में काफी उपयोगी होता है। पीआरपी में सामान्य रक्त की तुलना में 5 गुना अधिक प्लाज्मा होता है।

इस थैरेपी का आधार यह है कि प्लेटलेट्स घावों के भरने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। एक बार में 20 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। इससे प्लेटलेट्स को अलग करने के बाद इसमें एक्टिवेटर मिलाए जाते हैं, जो प्लेटलेट्स को एक्टिवेट कर देते हैं ताकि जहां क्षति हुई है वहां यह बेहतर तरीके से कार्य कर सके।

कैसे कार्य करती है: सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र को सुन्न करने के लिए सामान्य एनेस्थेशिया दिया जाता है। फिर विशेष माइक्रो नीडिल की सहायता से पीआरपी को घुटने में प्रवेश कराया जाता है। इससे रक्त संचार की सक्रियता बढ़ जाती है और इसके स्टेम सेल्स ऊतकों की मरम्मत करते हैं, सूजन कम करते हैं और इस प्रकार ऑस्टियोअार्थराइटिस के लक्षण कम करते हैं। इस संपूर्ण प्रक्रिया में 2-3 घंटे से ज्यादा समय नहीं लगता है और न ही अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है। पीआरपी इलाज से दर्द, अकड़न और कार्यप्रणाली में बहुत सुधार आता है। चूंकि यह सिंथेटिक नहीं जैविक इंजेक्शन है, इसलिए मरीजों पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है। कई अध्ययन बताते हैं कि लगभग 73 प्रतिशत मामलों में कई क्लिनिकल और फंक्शनल फायदे देखे गए हैं और एक साल तक ऑर्थराइटिस के लक्षण कम होते है।

कितनी कारगर है: पीआरपी इंजेक्शन का असर 4-6 हफ्ते बाद ही दिखता है, इसलिए मरीज को इस इंजेक्शन के तत्काल परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इंजेक्शन बहुत किफायती है, क्योंकि इस पर होने वाला खर्च नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के खर्च के दसवें हिस्से के बराबर होता है।

यह इलाज किसी भी आयु वर्ग के मरीजों के लिए लाभकारी है क्योंकि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। हालांकि पीआरपी इंजेक्शन लेने के लिए उम्र सीमा या सावधानी बरतने कि कोई जरूरत नहीं रहती, लेकिन अाॅर्थराइटिस के शुरुआती चरण में जितनी जल्दी हो सके यह इलाज कराना ही बेहतर होता है ताकि अधिकतम और लंबी अवधि तक इसका लाभ मिल सके।

कहां-कहां उपयोगी है: किसी भी टेंडन या लिगामेंट इंजरी का सफलतापूर्वक पीआरपी थैरेपी के द्वारा उपचार संभव है, लेकिन पूरी तरह टूट चुके टेंडन या लिगामेंट्स का इसके द्वारा उपचार संभव नहीं है। स्पोर्ट्सपर्सन के लिए भी यह कारगर है। जिनके घुटनों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। इस प्रकार की समस्याओं को आमतौर पर दवाअों, फिजियोथैरेपी या सर्जरी के द्वारा ठीक किया जाता है। कई एथलीट्स के अनुसार पीआरपी थैरेपी उनकी समस्याओं को तुरंत और अधिक बेहतर तरीके से उपचार करती है।
फैक्ट : कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि पीआरपी अाॅर्थराइटिक नी में बहुत उपयोगी है और प्रभावकारी हैं और इससे जुड़े हुए जोखिम भी बहुत कम हैं।

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