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पस वाले घाव भरने के लिए फॉलो करें ये एक्सपर्ट टिप्स

फोड़े को दबाकर पस बहाने से इंफेक्शन फोड़े के आसपास की त्वचा तक फैल जाता है और इलाज में भी दिक्कतें आने लगती हैं।

पस या मवाद आमतौर पर त्वचा में फोड़ों, रोमछिद्रों या किसी चोट की वजह से होनेवाला बैक्टेरिअल इंफेक्शन का असर है। कुछ बहुत गंभीर मामलों में इस इंफेक्शन से निजात पाने के लिए सर्जरी करानी पड़ती है। अगर पस त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा हो तो गर्म पानी या एंटीबायोटिक्स से ठीक हो सकता है। लेकिन ज़्यादातर लोग फोड़े को दबाकर पस बहा देते हैं। लेकिन इसकी वजह से इंफेक्शन फोड़े के आसपास की त्वचा तक फैल जाता है और इलाज में भी दिक्कतें आने लगती हैं। मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के कंसल्टेंट फ़िज़िशियन डॉ. प्रदीप शाह बता रहे हैं कि क्या करना चाहिए जब पस बनने लगे और कैसे रोका जाए इंफेक्शन को।

पस का इलाज़ क्या है?
अगर फोड़ा खुद-ब-खुद फट जाए तो पस को रूई से साफ करें। साथ ही आसपास की त्वचा को दबाकर बचा हुआ पस भी निकाल दें। साफ पानी से साफ करने के बाद घाव वाली जगह पर एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट लगाएं। अगर पस वाला फोड़ा सख्त ही है तो इंफेक्शन से बचने के लिए वार्म कम्प्रेशन से फोड़े को थोड़ी सेंक दें। फोड़ा नर्म हो जाए या पस बहने लगे तो किसी एंटीबैक्टेरिअल साबुन से उसे साफ करें और ऊपर से कोई एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं।

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घाव को साफ करने के लिए अल्कोहल का इस्तेमाल न करें, उससे जलन और दर्द हो सकता है। अल्कोहल की बजाय आप किसी माइल्ड डिसिन्फेक्टन्ट (disinfectant) या कम जलनेवाले कीटाणुनाशक (bactericidal) को पानी में घोलकर घाव वाली जगह को साफ करने के लिए इस्तेमाल कीजिए।

हल्दी कुछ मामलों में राहत देने का काम कर सकती है लेकिन यह इंफेक्शन को पूरी तरह ठीक नहीं करती। भले ही हल्दी में कीटाणुनाशक और एंटीबैक्टेरिअल गुण होते हैं लेकिन कीटाणुवाली या गंदी होने पर हल्दी से इंफेक्शन बढ़ भी सकता है। अगर 10 दिनों बाद भी फोड़े में से पस पूरी तरह न निकला हो या फोड़ा पूरी तरह सूखा न हो तो डॉक्टर को दिखाएं। साथ ही अगर आपको बुखार, थकान या त्वचा पर पस के साथ लाली दिखायी दे तो अच्छी तरह जांच कराकर दवाइयों की मदद से इसका इलाज कराएं।

त्वचा के कटने-फटने या घाव होने पर अगर सही तरीके से इलाज नहीं किया जाए तो उस जगह पर पस बन सकता है। इसलिए चोट लगने पर एंटीबायोटिक्स लगाएं और उन्हें नज़रअंदाज न करें।

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