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इन 5 चीजों से ठीक करें बच्चेदानी की गांठ, Ayurveda डॉ. ने बताया नहीं पड़ेगी ऑपरेशन की जरूरत

What are the symptoms of fibroid: जिन महिलाओं को गर्भाशय में रसौली हो जाता है उनमें पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग, लंबे समय तक पीरियड्स होना, पैल्विक दर्द, जल्दी-जल्दी पेशाब आना, कब्ज, पीठ दर्द और पैर दर्द जैसे लक्षण दिख सकते हैं। समय रहते इसका निदान और उपचार जरूरी होता है। आप आयुर्वेद डॉ. शरद कुलकर्णी के बताए हर्ब से भी रसौली के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

फाइब्राइड (Fibroids) महिलाओं के गर्भाशय में या इसके उपर होने वाली गांठ होती है। इसका आकार मूंग जितना छोटा या खरबूजे जितना बड़ा भी हो सकता है। यह अक्सर 30 या इससे ज्यादा उम्र की महिलाओं में होता है। इसे रसौली भी कहते हैं। फाइब्रॉइड क्यों होता है? इसके होने की असली वजह अभी ज्ञात नहीं है, लेकिन माना जाता है मोटापा, प्रेगनेंसी, हॉर्मोनल चेंजेस या जेनेटिक कारणों से महिलाओं को फाइब्रॉइड की प्रॉब्लम हो सकती है।

जिन महिलाओं को फाइब्राइड होता है उन्हें दूसरी कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है, जैसे पेट के निचले हिस्से में दर्द, हैवी ब्लीडिंग, सेक्स के दौरान दर्द, गर्भधारण करने में दिक्कत आदि। लेकिन समय रहते इस बीमारी का निदान करने उपचार करके आप इन सभी तकलीफों से बच सकती हैं। वैसे तो यह बीमारी दवा और सर्जरी से ठीक की जा सकती है लेकिन आयुर्वेद में इसके घरेलू उपचार (Home Remedies of Fibroids) भी बताएं गए हैं।


फाइब्रॉयड का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic treatment of fibroids) जानने के लिए हमने बात की आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉक्टर शरद कुलकर्णी से। उन्होने बताया कि आयुर्वेद में फाइब्राइड को ठीक करने के लिए पंचकर्म किया जाता है। इसमें वमन, विरेचन के साथ बस्ती भी शामिल होता है। इसके अलावा कुछ जड़ी-बूटी भी है जिसके मदद से फाइब्राइड को ठीक किया जा सकता है। बेहतर रिजल्ट के लिए डॉक्टर इसे पंचकर्म के साथ लेने की सलाह देते हैं।
त्रिफला कंट्रोल करता है फाइब्रॉयड

विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन महिलाओं को फाइब्रॉयड की समस्या होती है उन्हें त्रिफला का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही एनसीबीआई में प्रकाशित एक स्टडी में भी त्रिफला को गर्भाशय में होने वाले फाइब्रॉयड में फायदेमंद माना गया है। दरअसल, इसमें त्रिफला में एंटीनोप्लास्टिक एजेंट होते हैं। ऐसे में फाइब्रॉइड में त्रिफला का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। इसे आप पाउडर या काढ़े के रूप में ले सकते हैं।

आवंला है रसौली में सेहतमंद
आंवले में एंटी-फाइब्रोटिक प्रभाव होता है। इसमें मौजूद मोनोसोडियम ग्लूटामेट की वजह से गर्भाशय रसौली में आंवला बेहतर हो सकता है। इसके अलावा इसमें फेनोलिक और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी होता है जिसकी वजह से आवंला का सेवन फाइब्रॉयड में फायदेमंद साबित हो सकता है।

हल्दी रसौली को करता है कम
आयुर्वेद डॉक्टर गर्भाशय फाइब्रॉएड के घरेलू उपचार के लिए हल्दी के सेवन की सलाह देते हैं। दरअसल, हल्दी में करक्यूमिन नामक पॉलीफेनोल होता है। इसमें एंटीप्रोलिफेरेटिव और एंटीफिब्रोटिक प्रभाव होते हैं। एंटीप्रोलिफेरेटिव इफेक्ट ट्यूमर सेल को बढ़ने से रोक सकता है और एंटीफिब्रोटिक प्रभाव रसौली को कम करने के लिए जाना जाता है।
कचनार गुग्गुल है रसौली में फायदेमंद

कचनार गुग्गुल एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जो हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मददगार है। कचनार गूग्गुल कई औषधियों से मिलकर बनता है। इसमें कचनार की छाल, अदरक, काली मिर्च, पीपली, हरिटकी, बिभिटकी, अमलाकी (त्रिफला), वरुणा छाल, इलायची, गुग्गल गोंद की समान मात्रा शामिल होती है। आयुर्वेद में फाइब्रॉएड को सिकुड़ाने के लिए कचनार गुग्गुल का उपयोग किया जाता है।
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गिलोय फाइब्रॉयड के लक्षणों को कम करने में है कारगर
आयुर्वेद में गिलोय को कई तरह की बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में डॉक्टर शरद रसौली के लिए गिलोय के सेवन की सलाह देते हैं। इसका काढ़ा पीड़ित महिला में फाइब्रॉयड के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है।

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