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अचानक क्यों होने लगती है बेचैनी और घबराहट, आखिर क्या है इसका इलाज

एंजाइटी में इंसान नर्वस रहता है. किसी चीज में चैन नहीं मिलता. डर की भावना रहती है.
तनाव, ब्लडप्रेशर, हाई कोलेस्ट्रोल के कारण भी एंग्जाइटी हो सकती है.

Anxiety attack: आमतौर पर जीवन के प्रति निराशा और डर की भावना के कारण इंसान को एंजाइटी या बेचैनी होती है. हालांकि तनाव, ब्लडप्रेशर, हाई कोलेस्ट्रोल के कारण भी एंग्जाइटी हो सकती है. इस स्थिति में इंसान को यह महसूस होने लगता है कि उसके साथ बहुत बुरा होने वाला है. इसी उलझन में वह हमेशा चिंताग्रस्त और सहमे हुए रहता है. कभी-कभी घबराहट इतनी बढ़ जाती है कि एंजाइटी का अटैक हो जाता है. इसमें बहुत अधिक व्यग्रता, छटपटाहट, घबराहट, कंपकंपी, पसीना एक साथ आने लगता है. किसी भी स्थिति में इंसान को चैन नहीं मिलता है. कुछ दिन पहले अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी इस परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थीं. इसलिए इस बीमारी की गंभीरता को समझा जा सकता है.

एंजाइटी के कारण
मेडिकल टूडे न्यूज के मुताबिक एंजाइटी के कई कारण हो सकते हैं. परीक्षा, नौकरी, आर्थिक, रिलेशनशिप, तलाक आदि का तनाव, किसी चीज को लेकर चिंता, उम्मीद के हिसाब से स्थिति नहीं बदलने को लेकर चिंता, मानसिक सक्रियता में कमी, याददाश्त में कमी, कुछ बीमारियों का इलाज, कुछ क्रोनिक बीमारियां आदि की स्थिति में एंजाइटी हो सकती है.

एंजाइटी के लक्षण
एंजाइटी में इंसान नर्वस रहता है. किसी चीज में चैन नहीं मिलता. डर की भावना रहती है. बुरा होने का भय रहता है. दूसरों से बहुत सारे आश्वासन की उम्मीद रहती है. मूड बहुत खराब रहता है. इंसान अवसाद में रहता है. भविष्य में क्या होगा इसको लेकर बहुत अधिक चिंतित रहता है. इन सब लक्षणों में जब बहुत अधिक गंभीरता आ जाती है तो एंजाइटी अटैक होता है. इसमें पैनिक अटैक हो सकता है. इस स्थिति में बॉडी से बहुत ज्यादा पसीना आता है. बहुत लंबे समय घबराहट महसूस होती है. बैचेनी बढ़ने लगती है और ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है. सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और घुटन महसूस होती है. एंजाइटी अटैक में दिल की धड़कनें बेहद तेज चलती हैं. एंजाइटी अटैक की वजह से सीने में जकड़न महसूस होती है.

एंजाइटी का इलाज क्या है
एंजाइटी अटैक की स्थिति में मरीज को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है. रोजाना एक्सरसाइज भी जरूरी है. इसके साथ ही अल्कोहल और स्मोकिंग से हर हाल में परहेज होना चाहिए. हेल्दी डाइट का सेवन करना बेहतर रहता है. डॉक्टर इसके लिए साइकोथेरेपी का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए कॉगनिटिव विहेवियरल थेरेपी और कुछ दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है. एग्जाइटी से मुक्ति के लिए 7-8 घंटे की रात की नींद बेहद जरूरी है.

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