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Fatty Liver Disease: फैटी लिवर के मरीजों के लिए रामबाण से कम नहीं ये उपाय, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया क्‍या खाएं

न्यूट्रिशनिस्ट पूजा माखीजा बताती हैं कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर को आहार और जीवनशैली में बदलाव के साथ मैनेज किया जा सकता है। यहां उनके द्वारा शेयर किए गए टिप्स इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

Fatty Liver Disease: फैटी लिवर के मरीजों के लिए रामबाण से कम नहीं ये उपाय, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया क्‍या खाएं
लिवर मनुष्य के शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। शरीर के कार्य को ठीक से करने के लिए इसके स्वास्थ्य को बनाए रखना जरूरी है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि लिवर को स्वस्थ रखने के लिए शराब से परहेज ही एकमात्र उपाय है। जहां शराब लिवर की बीमारियों का कारण बनती है, वहीं कुछ ऐसे और भी कारण हैं, जो फैटी लीवर की वजह बन सकते हैं। नॉन अल्कोहलिक फैटी फैटी लिवर डिसीज वो बीमारी है, जो केवल शराब के सेवन के कारण नहीं होती। यह बीमारी एक बड़ी आबादी को प्रभावित करती है। इसके लिए एक्स्ट्रा कैलोरी जिम्मेदार है।

न्यूट्रिशनिस्ट पूजा माखीजा के अनुसार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन, और उचित पोषण बनाए रखने से इस बीमारी को ठीक करने में मदद मिल सकती है। न्यूट्रिशनिस्ट ने यहां कुछ ऐसे पोषक तत्व के बारे में बताया है, जिसे इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। इससे लिवर स्वस्थ बना रहेगा।
न्यूट्रिशनिस्ट पूजा माखीजा से जानें क्‍या खाएं


​चकोतरा
चकोतरा में कई तरह के पोषक विटामिन होते हैं। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज में अक्सर पुरानी सूजन के लक्षण दिखाई देते हैं। यह लक्षण लीवर फाइब्रोसिस का कारण बनते हैं। चकोतरा में नारिंगिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन से लड़ने में आपको सक्षम बनाते हैं। इसलिए इस बीमारी से पीड़ित लोगों को अपने आहार में चकोतरा को जरूर शामिल करना चाहिए।
​एन-एसिटाइल सिस्टीन
यह एक तरह का एमीनो एसिड है, जो लीवर में ग्लूटाथियोन की सामग्री को भर देता है। ग्लूटाथियोन दवाओं और विषाक्त पदार्थों को बेअसर करने में मदद करता है। विशेषज्ञ एक दिन में 600 से 1800 एनएसी की डोज लेने की सलाह देती हैं। लेकिन फैटी लिवर की बीमारी के लिए यह सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।
​मिल्क थिस्ल
मिल्क थिस्ल एक सप्लीमेंट है, जिसे पौधे के बीज से तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल लिवर को साफ करने यानी इसके डिटॉक्सीफिकेशन में यह शरीर में टॉक्सिक लेवल को कम करता है और जहरीले केमिकल के प्रभाव से आपके लिवर की रक्षा करता है। मिल्क थिस्ल में सीलामारिन एक फ्लेवेनॉइड , एंटीइंफ्लेमेट्री, एंटी स्कारिंग और इम्यून सिस्टम बूस्टिंग कंपाउड पाए जाते हैं।

यह हर समय लिवर की खराब हो चुकी कोशिकाओं की मरम्मत करने के अलावा रीजनरेशन में हेल्प करता है। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, मिल्क थिस्ल विटामिन ई के साथ मिलाकर हर दिन 420 से लेकर 600 मिग्रा सिलामारिन का सेवन अच्छे परिणाम देता है।
​नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज के लिए डिटॉक्स ड्रिंक

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि क्या इन सभी पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करना सही है। हां ,ये न केवल संभव है, बल्कि फायदेमंद भी है। न्यूट्रिशनिस्ट एक नींबू अदरक से बने हरे डिटॉक्स ड्रिंक की सलाह देती हैं। नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जबकि अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेट्री यौगिक होते हैं। अजवाइन और अजमोद जैसे साग में एपिजेनिन और ल्यूटोलिन हेाते हैं, जो लिवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। आप चाहें, तो डिटॉक्स ड्रिंक में खीरा भी मिला सकते हैं।

ये वो पोषक तत्व हैं, जिन्हें नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज से ग्रसित लोगों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। लेकिन लीवर के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए शराब से बचना जरूरी है। रिफाइंड चीनी, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड आइटम और प्रिनफ्लेमेट्री ट्रांस फैट से दूर रहना भी अच्छा है।

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