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गोनोरिया (Gonorrhoea)

गोनोरिया के लक्षणगोनोरिया के कारणगोनोरिया का निदानगोनोरिया से रोकथामगोनोरिया का इलाजगोनोरिया की जटिलताएं

गोनोरिया एक प्रकार का बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial infection) है, जिसे हिन्दी में सूजाक के नाम से भी जाना जाता है। यह संक्रमण आमतौर पर पहले से संक्रमित किसी व्यक्ति से यौन संबंध बनाने के दौरान दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रवों के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। यह नीसेरिया गोनोरिएई (Neisseria gonorrhoeae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर गरम और नम तापमान में तेजी से बढ़ता है, इसलिए यह यह अधिकतर मामलों में योनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, फैलोपियन ट्यूब और मूत्रमार्ग में तेजी से संक्रमण फैलाता है। गोनोरिया आमतौर पर पुरुषों व महिलाओं दोनों को समान रूप से प्रभावित करता है। प्रजनन अंगों के अलावा यह गुदा, मुंह और आंखों में भी संक्रमण फैला सकता है। इससे कुछ लोगों को किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं, जबकि कुछ लोगों को बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 1 से 14 दिनों बाद इसके लक्षण दिखने लगते हैं। जैसा कि यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, इसलिए डॉक्टर अलग-अलग प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इसका इलाज करते हैं। गोनोरिया का समय पर इलाज करना जरूरी है और ऐसा न होने पर कई बार इससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

गोनोरिया के लक्षण

यह एक ऐसा यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Disease) है, जिसका अक्सर निदान ही नहीं हो पाता है। गोनोरिया से ग्रस्त ज्यादातर लोगों को शुरुआत में किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं। हालांकि, इससे पुरुषों को होने वाले प्रमुख लक्षणों में निम्न शामिल हैं -

पेशाब में जलन व दर्द
लिंग से सफेद या हल्के हरे रंग का द्रव स्रावित होना
वृषणों में सूजन


गोनोरिया के कारण महिलाओं को होने वाले लक्षण आमतौर पर ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं और अक्सर इन लक्षणों को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लक्षण समझ लिया जाता है। महिलाओं में गोनोरिया के कारण आमतौर पर निम्न लक्षण विकसित होते हैं, जैसे -

पेशाब के दौरान जलन व दर्द
योनी से अधिक मात्रा में द्रव निकलना (सामान्य से अधिक)
योनी से रक्त आना (मासिक धर्म से अलग दिनों में)


इसके अलावा अगर व्यक्ति को प्रजनन अंगों की जगह गुदा पर गोनोरिया संक्रमण हुआ है, तो उन्हें खुजली, जलन, दर्द और मल त्याग करते समय गंभीर दर्द होने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

वहीं जिन लोगों को मुंह या गले में गोनोरिया संक्रमण हुआ है, तो उन्हें प्रभावित हिस्से में दर्द, जलन व खुजली की समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर को कब दिखाएं

गोनोरिया एक गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है, इसलिए इसकी समय पर जांच कराना बेहद जरूरी होता है। अगर आपको लगता है कि आपने हाल ही में किसी ऐसे व्यक्ति के शारीरिक संबंध बनाएं हैं, जिसे गोनोरिया हो सकता है, तो ऐसे में आपको भी डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। वहीं अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो भी जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

गोनोरिया के कारण

वे पुरुष व महिलाएं जो यौन सक्रिय हैं और जिनके एक से अधिक यौन साथी हैं उन्हें गोनोरिया होने का खतरा सबसे अधिक रहता है। सीडीसी (CDC) के एक अनुमान के अनुसार लगभग 1.9 करोड़ लोग हर साल गोनोरिया से संक्रमित हो जाते हैं। गोनोरिया का कारण बनने वाला बैक्टीरिया आमतौर पर पहले से संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से फैलता है। इसके अलावा अगर व्यक्ति किसी अन्य तरीके से संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रवों के संपर्क में आ रहा है, तो भी वह गोनोरिया से संक्रमित हो सकता है। अगर कोई गर्भवती महिला गोनोरिया से संक्रमित है, तो प्रसव के दौरान बच्चा भी इससे संक्रमित हो सकता है। गोनोरिया के फैलने का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि कुछ लोगों को इसका पता ही नहीं होता है और वे यौन संबंध के माध्यम से दूसरों में भी यह संक्रमण फैलाते रहते हैं।
गोनोरिया के जोखिम कारक

गोनोरिया के कारण के अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी हो सकती हैं, जो इसके होने के जोखिम को बढ़ा देती हैं, जैसे -

एक से अधिक यौन साथी होना
संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाना
अधिक उम्र वाली यौन सक्रिय महिलाएं
25 साल से कम उम्र वाली यौन सक्रिय महिलाएं

गोनोरिया का निदान

गोनोरिया का निदान करना आमतौर पर काफी सामान्य प्रक्रिया होती है। इस स्थिति का निदान करने के लिए किए जाने वाले टेस्ट आमतौर पर सामान्य और दर्द रहित होते हैं। गोनोरिया का पता लगाने के लिए यूरिन सैंपल लिया जाता है और उसकी जांच की जाती है। हालांकि, मुंह और गुदा में होने वाले गोनोरिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर प्रभावित हिस्से से स्वैब सैंपल लेते हैं और फिर लैब में उसकी जांच की जाती है। गर्भाशय या मूत्रमार्ग के अंदर गोनोरिया संक्रमण का पता लगाने के लिए स्वैब की मदद से वहां से सैंपल लिया जाता है। हालांकि, गोनोरिया के साथ-साथ अन्य यौन संचारित रोगों की जांच करने के लिए भी टेस्ट किए जा सकते हैं, क्योंकि अक्सर गोनोरिया अन्य यौन संचारित रोगों के साथ होता है।
गोनोरिया से रोकथाम

एक से अधिक यौन साथी न बनाना ही गोनोरिया से बचने का सबसे प्रमुख और निश्चित तरीका है। साथ ही अन्य यौन संचारित रोगों की तरह यौन संबंध बनाते समय उचित सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करना (जैसे कंडोम) भी गोनोरिया संक्रमण होने से बचाव सकता है। साथ ही नियमित रूप से जांच कराते रहना भी गोनोरिया रोग होने से बचाव कर सकता है। अगर पहली बार किसी दूसरे व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने जा रहे हैं, तो ऐसे में पहले डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए। इन सभी बातों का ध्यान रखकर गोनोरिया समेत अन्य यौन संचारित रोगों को फैलने से रोका जा सकता है।
गोनोरिया का इलाज

गोनोरिया एक प्रकार का बैक्टीरियल इंफेक्शन है और इसलिए इसके इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है। इसके इलाज में इस्तेमाल की गई एंटीबायोटिक दवाओं में आमतौर पर डॉक्सीसाइक्लिन और सिफेलोस्पोरिन आदि का इस्तेमाल किया जाता है। अगर इलाज के दौरान ही लक्षण ठीक हो गए हैं और मरीज पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहा है, तो भी उसे अपना एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बैक्टीरियल संक्रमण को शरीर से पूरी तरह से खत्म करने के लिए कोर्स पूरा करना जरूरी होता है और ऐसा न होने पर गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, अगर डॉक्टर को लगता है कि मरीज को गोनोरिया के अलावा कोई अन्य यौन संचारित रोग भी है, तो उसके अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं।

इलाज के दौरान डॉक्टर मरीज को यौन गतिविधियों से परहेज करने की सलाह देते हैं। हालांकि, यह इलाज लगभग एक हफ्ते चलता है और इसके बाद मरीज अपनी सामान्य यौन गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। अगर इलाज खत्म होने के कुछ दिन बाद लक्षण फिर से होने लगते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे में कई बार लोगों को और अधिक जटिलताएं विकसित हो सकती हैं और ऐसे में उनका इंट्रावेनस ट्रीटमेंट शुरू करना पड़ता है। आपके साथ-साथ आपके यौन साथी की जांच भी की जाती है और अगर वह भी इस रोग से संक्रमित है, तो साथ ही उसका इलाज भी शुरू किया जा सकता है।

इसके अलावा जो बच्चे गोनोरिया से संक्रमित मां से जन्म लेते हैं, उन्हें पैदा होते एंटीबायोटिक दवाएं दे दी जाती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि संक्रमण विकसित होने से पहले ही उसे रोका जाए और किसी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े।
गोनोरिया की जटिलताएं

गोनोरिया का समय पर इलाज न करने पर कई बार इससे जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। अगर महिला व पुरुष दोनों को गोनोरिया है और उसका इलाज नहीं किया गया है, तो यह एक जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। समय पर इलाज न करने के कारण अगर संक्रमण महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब तक पहुंच गया है, तो ऐसे में अंदर फोड़ा बन सकता है और इससे गंभीर दर्द व अन्य जटिलताएं होने लगती हैं।

अगर पुरुषों में गोनोरिया का इलाज न किया जाए तो इससे एपिडिडीमाइटिस (एपीडीडीमिस में संक्रमण) हो सकता है। यह संक्रमण पुरुषों में बांझपन का कारण भी बन सकता है। वहीं संक्रमित मां से पैदा हुए बच्चों की आंखें संक्रमित हो सकती हैं और समय पर देखभाल न करने पर बच्चा अंधेपन का शिकार हो सकता है। यहां तक कि कुछ दुर्लभ मामलों में गोनोरिया शरीर के कई हिस्सों में फैल सकता है, जिससे जानलेवा समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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