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गॉलब्लेडर कैंसर का एक दुर्लभ रूप, पित्ताशय की थैली का कैंसर तब होता है जब लिवर के ठीक नीचे स्थित पित्ताशय के ‎ऊतकों में घातक या कैंसर कोशिकाएं रहती हैं. नाशपाती के आकार का छोटा अंग, पित्ताशय की थैली शरीर में ‎लिवर द्वारा निर्मित पित्त को स्टोर करता है. यह पित्त आम पित्त नली के माध्यम से जारी किया जाता है.

कारण

शोधकर्ताओं ने कुछ जोखिम कारक पाएं हैं, जो गॉलब्लैडर कैंसर को विकसित करने की संभावना को बढ़ाते हैं।


क्रोनिक गॉलब्लैडर इंफ्लामेशन (Chronic Gallblader Inflamation): गॉलब्लैडर में सूजन पित्त के कैंसर के कई जोखिम कारकों में से एक है। उदाहरण के लिए, जब किसी को गॉलस्टोन की समस्या होती है तो उसका गॉलब्लैडर बाइल को धीरे रिलीज करता है। इससे गॉलब्लेडर में जो सेल्स होते हैं, वो बाइल में मौजूद रासायन के संपर्क में अधिक समय के लिए रहते हैं। इससे गॉलब्लैडर में जलन और सूजन की परेशानी हो सकती है।


पोर्सिलेन गॉलब्लैडर (Porcelain gallbladder): पोर्सिलेन गॉलब्लेडर वो स्थिति है जिसमें गॉलब्लैडर की वॉल कैल्शियम डिपोजिट से कवर हो जाती है। ऐसा कई बार पित्ताशय की थैली में लंबे समय से सूजन के कारण होता है, जो गॉलब्लैडर स्टॉन का कारण बनता है। इस स्थिति वाले लोगों में पित्ताशय की थैली के कैंसर का खतरा अधिक होता है, क्योंकि दोनों ही स्थिति सूजन से संबंधित हो सकती है।


मोटापा (Obesity): गॉलब्लैडर कैंसर से पीड़ित लोग ज्यादातर ओवरवेट की समस्या से जूझ रहे होते हैं। मोटापा गॉलस्टोन होने का भी जोखिम कारक है।


बड़ी उम्र में (Older age): गॉलब्लैडर कैंसर ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों में देखने को मिलता है। यह कम उम्र में भी हो सकता है। पित्ताशय के कैंसर वाले अधिकांश लोग 65 या उससे अधिक उम्र के होते हैं।


पित्त नलिकाओं में असामान्यताएं (Abnormalities of the bile ducts): अग्न्याशय छोटी आंत में एक वाहिनी के माध्यम से बाइल जारी करता है। यह वाहिनी पित्त नली के साथ मिलती है। जहां ये नलिकाएं मिलती हैं, कुछ लोगों में इस जगह दोष होता है। इस कारण तरल पदार्थ को पीछे प्रवाहित करती हैं। इन असामान्यताओं वाले लोगों में पित्ताशय की थैली के कैंसर का खतरा अधिक होता है।

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