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क्‍या आपको भी बात-बात पर गुस्‍सा आता है? तो जानिए इसके 5 बेसिक कारण और उबरने के उपाय

हम में से ज्यादातर लोगों को बात-बात पर गुस्सा आता है, लेकिन क्या आपने कभी इसका कारण जानने कि कोशिश की है? चलिए तो हम आपको बताते हैं इसके पीछे का कारण।

क्या आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है? आप आसानी से चिढ़ जाती हैं या निराश हो जती हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो आप भी उन लाखों लोगों में से एक हैं, जो कि क्रोध संबंधी समस्याओं का सामना कर रहीं हैं। क्रोध एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जो हमें बताती है कि कुछ सही नहीं है। लेकिन जब आप क्रोध का अधिक अनुभव करती हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।

अधिक क्रोध के चलते अवसाद, चिंता, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग के साथ ही कई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए इसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी है।

पर सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपको आखिर गुस्‍सा आता क्‍यों है! अगर आप भी अक्सर गुस्से की समस्या का सामना करती हैं और आपके मन में भी यह सवाल उठता है कि आपको बात-बात पर गुस्सा क्यों आता है। तो हम आज आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे। ताकि आप इसे सही तरीके से मैनेज कर पाएं।
गुस्सा आने के लिए जिम्‍मेदार हो सकते हैं ये 5 कारण

2. चिंता (Concern, worry or anxiety)

चिंता क्रोध के सबसे आम कारणों में से एक है। चाहे आप अपने बारे में चिंतित हों या अपने किसी प्रियजन को लेकर। चिंता और यहां तक कि डर भी कुछ परिस्थितियों में तेजी से गुस्सा आने का कारण बन सकता है। अगर आपको लगता है कि आपकी क्रोध की भावनाएं चिंता के कारण पैदा हो रही हैं, तो जानने की कोशिश करें कि इसका स्रोत क्या है।

क्या करें

पता लगाएं कि आपकी चिंताएं कहां से आ रही हैं। यह खुद से पूछने का समय हो सकता है, कि आप डर क्यों महसूस कर रही हैं, या आपको सबसे ज्यादा डर किस चीज से लगता है। अपनी चिंताओं को लिखने का प्रयास करें। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश करें कि क्या आप उन्हें संबोधित करने के लिए कोई कदम उठा सकती हैं?

उदाहरण के लिए, यदि आप अपने साथी के विदेश यात्रा पर जाने को लेकर चिंतित हैं, तो अपने साथी के साथ खुलकर, ईमानदार और सौम्य तरीके से अपनी चिंताओं का संचार करें। एक बार जब आप अपने डर का सामना कर चुकी होती हैं, तो आप न केवल खुद पर गर्व महसूस करेंगी, बल्कि आप नोटिस करेंगी कि आपका गुस्सा कम होने लगा है।

2. शक्तिहीनता (powerlessness)

क्रोध का एक और सामान्य कारण शक्तिहीनता है। यह भावना अक्सर नियंत्रण की हानि और असहायता की भावनाओं से जुड़ी होती है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के साथ समस्याओं से पीड़ित हैं या आप एक अपमानजनक रिश्ते में हैं, जहां आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही हैं, तो ऐसे में आप विशेष रूप से गुस्सा महसूस कर सकती हैं।

जब भी आप खुद को शक्तिहीन महसूस करती हैं, तो अपने आप को याद दिलाएं, “मैं अपने स्वयं के जीवन के लिए जिम्मेदार हूं, मैं जैसी हूं वैसी ही सम्मान के योग्य हूं। मेरे कौशल और क्षमताएं मुझे आज यहां तक लाई हैं, और मैं उन्हें इस नकारात्मक स्थिति से निपटने के लिए इस्तेमाल कर सकती हूं।”

क्या करें

अगर आप किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से पीड़ित हैं, और इससे निपटने के लिए निराश हैं, तो अपनी स्थिति के बारे में जानने और इसके साथ कैसे पेश आएं या इसके साथ कैसे रहें, इसके तरीके खोजिए। साथ ही अपमानजनक स्थिति से निजात पाने के तरीकों को खोजने का प्रयास करें। यदि आपको लगता है कि आप स्वयं के जीवन में नियंत्रण खो रही हैं, तो आप बदलाव करने के तरीकों पर किसी पेशेवर की मदद या मार्गदर्शन लेने पर विचार कर सकती हैं।

3. अतीत की घटनाएं या आघात (Past Events or Trauma)

गुस्‍सा ट्रॉमेटिक या दर्दनाक अनुभव का स्थायी प्रभाव हो सकता है। भले ही आपको लगता है कि आप घटना से आगे बढ़ चुके हैं। अतीत के आघात की यादें चिंता, हताशा और यहां तक ​​कि क्रोध के प्रकोप को भी ट्रिगर कर सकती हैं। अतीत के आघात को ठीक से हल करने के लिए, पेशेवर की मदद लेना हमेशा एक अच्छा विचार है।

परामर्श सेवाएं आपको नकारात्मक भावनाओं को नेविगेट करने, अत्यधिक क्रोध को नियंत्रित करने और दर्दनाक या ट्रिगर होने वाली परिस्थितियों का सामना करने के लिए रणनीति विकसित करने में मदद कर सकती हैं।

क्या करें

अगली बार जब आप अपने आप को किसी ऐसे अनुभव के कारण गुस्‍से में पाती हैं, तो रुकें और प्रतिक्रिया देने से पहले स्थिति को प्रतिबिंबित करने के लिए एक मिनट का समय लें। सोचें, “इस स्थिति को लेकर मुझे गुस्सा क्यों आ रहा है?” “यह स्थिति मुझे क्या याद दिलाती है?” इससे आपको अपने क्रोध के स्रोत को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और उचित तरीके से आप अपनी भावनाओं से निपट पाएंगी।

4. दुख या शोक (Grief)

यह गुस्से का एक और सामान्य कारण है। दुख एक भारी भावना हो सकती है जो अक्सर कठिनाई, दर्द और व्यक्तिगत नुकसान से जुड़ी होती है। दोस्तों, प्रियजनों, भागीदारों, परिवार के सदस्यों, यहां तक ​​कि एक पालतू जानवर की मृत्यु से भी दुख हो सकता है। दुख, पेशेवर या व्यक्तिगत निराशा, नौकरी की हानि, शारीरिक चोट या वर्तमान घटनाओं सहित अन्य कठिनाइयों के कारण भी हो सकता है।

जब आप दुख से भरी होती हैं, तो यह बहुत जल्दी क्रोध की ओर मुड़ सकता है। दुखी लोग अक्सर दुनिया की क्रूरता और अनुचितता से निराश होते हैं। वे इस बात को लेकर क्रोधित होते हैं, कि एक भविष्य जिसकी उन्होंने कल्पना की थी वह अब संभव नहीं है। साथ ही वे ऐसे लोगों से परेशान हैं जो उनके दुख को समझने और उन्हें सहानुभूति देने में सक्षम नहीं हैं।

क्या करें

हालांकि दुख के साथ गुस्से का अनुभव होना सामान्य है। अगर इससे सही तरीके से निपटा जाए तो हम इस पर आसानी से काबू पा सकते हैं। जब लोग दुखी होतें हैं, तो नकारात्मक भावनाओं और तेज गुस्से पर ध्यान देना हानिकारक हो सकता है, जो कि शोक की उपचार प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है। ऐसे में खुद के साथ सौम्य रहें, खुद को दुख को महसूस करने की अनुमति दें। ताकि आप उपचार प्रक्रिया शुरू कर सकें।

दुख, निराशा, तनाव और गुस्‍सा किसी को भी महसूस हो सकता है। पर यह इतना नहीं बढ़ना चाहिए कि वह आपका डेली रूटीन और भविष्‍य को नुकसान पहुंचाने लगे। मेडिटेशन करें, खुश के साथ अच्‍छा समय बिताएं, उन लोगों के साथ रहें, जिनसे आपको खुशी मिलती है।

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