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शिशु के लिए ऐसे कपड़े चुने जो उसे गर्मियों में आरामदायक रखने में मदद कर सकते हैं।
विशुद्ध सूती कपड़े, सिंथेटिक फाइबर जैसे कि नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान से बने कपड़ों की तुलना में अधिक पसीना सोखते हैं। परिणामस्वरूप जब शिशु को पसीना आता है तो सूती कपड़े नमी को सोख लेते हैं और इसे सूखने देते हैं, वहीं सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े ऐसा नहीं करते।
यदि शिशु की त्वचा लंबे समय तक गीली रहेगी तो उसे घमौरी होने की संभावना बढ़ सकती है।
जब आप शिशु को धूप में बहार ले जाएं तो हल्के कपड़े चुनें। गहरे रंग, खासकर काला रंग, रोशनी सोखते हैं, जिससे गरम हो जाते है। वहीं हल्के रंग, खासकर सफेद, रोशनी नहीं सोखते और इस वजह से ठंडक बनाए रहते है।
धूप में बाहर निकलते समय शिशु के लिए लंबी बाजू के हल्के कपड़े चुनें। ये शिशु की त्वचा को सीधे पड़ने वाली सूरज की किरणों से बचाकर उसे ठंडक प्रदान करने में मदद करते हैं।
शिशु को धूप से बचाने के लिए टोपी या हैट पहना सकते हैं। मगर, सुनिश्चित करें कि वह चौड़े रिम वाली टोपी है, ताकि यह उसे सिर, चेहरे और गर्दन को सूरज से बचा सके। इलास्टिक पट्टी के सपोर्ट वाली ऐसी कोई हैट न पहनाएं, जिससे रक्त परिसंचारण पर दबाव पड़े।चरम गर्मी के समय घर के अंदर रहें (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक)
अगर संभव हो, तो कोशिश करें कि दिन में जब गर्मी का असर सबसे ज्यादा हो, तब आप घर के अंदर ही रहें। शिशु को सुबह-सुबह या फिर देर शाम को सैर के लिए ले जाएं।
अगर आपको धूप में निकलना ही पड़े, तो शिशु को प्रैम (बग्गी) या बेबी कैरियर में लिटाने से पहले एक सूती चादर बिछा लें। सूती चादर प्रैम के सिंथेटिक कपड़े से शिशु की त्वचा को बचा के रखेगी। साथ ही साथ यह शिशु का पसीना सोखकर उसे सूखा और आरामदायक रखेगी।
शिशु को कुछ समय बिना लंगोट रहने दें
यदि आप कर सके, तो दिन के किसी सुविधाजनक समय पर कुछ देर के लिए शिशु को बिना लंगोट रहने दें। लंगोट आपके शिशु को काफी गर्म रख सकते हैं खासकर गर्म मौसम में। साथ ही जहां लंगोट की कमरपट्टी और जांघों के बैंड शिशु की त्वचा पर तंग से रहते हैं वहां उसे काफी पसीना भी आ सकता हैं।
ऐसा सूती लंगोट और डिस्पोजेबल डायपर दोनों के साथ हो सकता है। क्योंकि सूती नैपी के साथ आप शायद रक्षात्मक कवर इस्तेमाल कर रही होंगी।
शिशु को जलनियोजित रखें
शिशु बड़ों की तुलना में बहुत जल्दी निर्जलित हो सकते हैं। इसलिए इस बात का ध्यान रखें की 24 घंटों में शिशु कम से कम छह से आठ लंगोट गीली कर रहा हो।
अगर आपके शिशु की उम्र छह महीने से कम है और आप उसे केवल स्तनपान करवा रही हैं, तो उसे गर्मी के मौसम में अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं है। वे शिशु, जो अपनी इच्छानुसार स्तनपान करते रहते हैं, उन्हें निर्जलीकरण का खतरा नहीं होता।
गर्म मौसम में, हो सकता है आपका शिशु ज्यादा बार स्तनपान करना चाहे। वह एक बार में शायद थोड़ी मात्रा में दूध पी रहा होगा। आपके स्तन के दूध से उसे पर्याप्त तरल मिल जाएगा, क्योंकि इस तरह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दूध पीने से उसे अतिरिक्त अग्रदूध मिल जाता है। यह बाद में आने वाले वसा समृद्ध दूध से ज्यादा पतला और अधिक तरोताजा बनाने वाला होता है। इसलिए शिशु को, जब वह चाहे, जितनी बार चाहे, स्तनपान करने दें।
यदि आपका शिशु डिब्बे वाला दूध (फॉर्म्युला) पीता है, तो गर्मियों में आपको उसे उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी देने की जरुरत हो सकती है।
सड़क किनारे रेहड़ी वालों से खाद्य व पेय पदार्थ न खरीदें
अपने शिशु को सड़क किनारे खड़े रेहड़ी वालों से आइसक्रीम, बर्फ का गोला, पानी और फलों का रस न दिलाएं। हो सकता है ये ताजा न हों, और आपके शिशु को बीमार कर दें।
जब कभी आप अपने शिशु के साथ बाहर जाएं, तो उसके लिए उचित भोजन और पानी हमेशा साथ ले जाएं। बच्चे का खाना रखने के बढि़या क्वालिटी के खाद्य ग्रेड प्लास्टिक के बर्तन खरीदें जो बीपीए मुक्त हों।
अपने बच्चे को खाना खिलाने से पहले स्वयं उसका स्वाद चखें कि कहीं खाना खराब तो नहीं हो गया है। यह गर्मी के महीनों में खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि गर्मी में भोजन बहुत जल्दी खराब हो जाता है, विशेषकर रखा हुआ खाना। यह भी सुनिश्चित करें कि फ्रिज में रखा भोजन खाने लायक है, खासकर बिजली कटौती के दिनों में।
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