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पतंजलि की रसौली की दवा - Patanjali medicine for fibroids in Hindi

आमतौर पर रसौली महिला के गर्भाशय में विकसित होती है, जो एक प्रकार का कैंसर रहित ट्यूमर होता है. आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 30 साल की करीब 20 प्रतिशत महिलाओं को गर्भाशय में रसौली की समस्या हो जाती है. इसे अंग्रेजी में फाइब्रॉयड कहा जाता है. रसौली में बहुत ज्यादा रक्तस्राव और दर्द की समस्या होती है.

रसौली के इलाज के लिए पतंजलि की कुछ दवाएं उपलब्ध हैं. आज इस लेख में जानेंगे कि रसौली के लिए पतंजलि की कौन-कौन सी दवाएं सबसे बेहतर हैं -

पतंजलि की रसौली की दवा
पतंजलि गिलोय घनवटी
पतंजलि दिव्य सिस्टोग्रिट
दिव्य वृद्धिवाधिका वटी
दिव्य कचनार गुग्गुल
दिव्य प्रवाल पिष्टी
दिव्य शिला सिंदूर
दिव्य ताम्र भस्म
पतंजलि आंवला जूस
सारांश

पतंजलि की रसौली की दवा के डॉक्टर
पतंजलि की रसौली की दवा

रसौली को ठीक करने में फायदेमंद पतंजलि की दवाओं के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है -
पतंजलि गिलोय घनवटी

इस दवा में गिलोय मुख्य सामग्री है. इसमें एडाप्टोजेनिक, एंटीस्पास्मोडिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीपायरेटिक, हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीऑक्सीडेंट, इम्युनोपोटेंटियेटिंगऔर हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं. ये सब शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में अहम भूमिका निभाने के साथ ही रक्त को भी साफ करते हैं. गिलोय सभी तीन दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में भी मदद करता है.

यह रक्त वाहिकाओं में जमा हुए टॉक्सिन और यूरिक एसिड को यूरिनरी सिस्टम के जरिए साफ भी करता है. गिलोय घनवटी का इस्तेमाल सूजन पैदा करने वाली सभी ऑटोइम्यून बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है. कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के अल्सरेटिव और टॉक्सिक प्रभाव को दूर करने में भी गिलोय घनवटी प्रभावशाली साबित हुई है. इस तरह से यह रसौली की समस्या में मददगार साबित हो सकती है.

पतंजलि दिव्य सिस्टोग्रिट

दिव्य सिस्टोग्रिट में कचनार, हल्दी, शिला सिंदूर पाउडर, मुक्ताशुक्ति पिष्टी, मोती पिष्टी, ताम्र भस्म, गम अकैसिया, माइक्रोक्रिस्टलाइन सेलुलोज व क्रॉसकार्मेलोस सोडियम जैसे इनग्रेडिएंट्स होते हैं. यह दवा कैंसर रहित ट्यूमर और सिस्ट के उपचार में भी उपयोगी है और रसौली को ठीक करने में कारगर औषधि के तौर पर अहम भूमिका निभाती है.

दिव्य वृद्धिवाधिका वटी

शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, कई तरह के भस्म, सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली, हरड़, बहेड़ा व आंवला जैसे इंग्रेडिएंट्स दिव्य वृद्धिवाधिका वटी में पाए जाते हैं. ये सब मिलकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं. वृद्धिवधिका वटी आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली एक हर्बल मिनरल फॉर्मूलेशन है. आयुर्वेद के अनुसार, यह प्रमुख तौर से वात दोष पर काम करती है. वात दोष के बढ़ने से हर्निया और हाइड्रोसील का अधिक विकास होने की आशंका रहती है. यह रसौली को जड़ से खत्म करने वाली एक कारगर औषधि है, जो टैबलेट में उपलब्ध है.

दिव्य कचनार गुग्गुल

कचनार छाल, त्रिफला, त्रिकटु, वरुण छाल, छोटी इलायची, दालचीनी, तेज पत्र और गुग्गुल इस औषधि के मुख्य इंग्रेडिएंट्स हैं. कचनार की छाल को रसौली के इलाज में एक अहम औषधि के तौर पर स्थान हासिल है. कचनार गुग्गुल नैचुरल ड्यूरेटिक गुणों के साथ जड़ी बूटियों और पौधों के एक्सट्रैक्ट से बनता है. किडनी स्टोन में हानिकारक मिनरल के जमाव को बाहर निकालने के लिए खून को साफ करने का काम करता है.

इसके साथ ही यह सूक्ष्म जीवों को खत्म करता है, जिनकी वजह से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और डिस्कंफर्ट की समस्या उत्पन्न होती है. यह महिलाओं के प्रजनन अंगों पर सूदिंग इफेक्ट भी डालता है. इसे एक्सट्रैक्शन की कठिन प्रक्रिया के जरिए कॉम्प्लेक्स तरीके से फार्मूलेट किया जाता है. इन गुणों की वजह से दिव्य कचनार गुग्गुल को रसौली की कारगर औषधि माना गया है.
दिव्य प्रवाल पिष्टी

शुद्ध प्रवाल और गुलाब इस औषधि के इंग्रेडिएंट्स हैं. इस औषधि का इस्तेमाल शिथिलता और एसिडिटी के साथ ही खांसी और बुखार की स्थिति में किया जाता है. रसौली की बीमारी में विभिन्न जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से रसौली में आराम मिलता है. यह दरअसल एक भस्म है, जिसको सदियों पुराने सूत्रों से तैयार किया जाता है और यह बीमारियों को जड़ से खत्म करने में मददगार भी है.

दिव्य शिला सिंदूर

दिव्य शिला सिंदूर के हर 1 ग्राम में शुद्ध पारा और शुद्ध गंधक की कजली के साथ शुद्ध मनशील का पाउडर और ग्वारपाठा का लिक्विड रहता है. दिव्य शिला सिंदूर का इस्तेमाल भी रसौली की स्थिति में अन्य जड़ी बूटियों के साथ किए जाने से लाभ मिलता है. यह क्रॉनिक और परेशान कर देने वाली बीमारियों में तुरंत परिणाम देता है.

दिव्य ताम्र भस्म

यह शुद्ध ताम्र यानी तांबे का पाउडर है. यह ट्यूमर के साथ ही किसी भी प्रकार के ग्लैंड और पेट से संबंधित बीमारियों में लाभकारी पाया गया है. इस भस्म की खास बात तो यह है कि इसके सेवन से रोगी पर किसी भी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता है, बल्कि यह किसी भी पुराने या कॉम्प्लेक्स बीमारी को ठीक करने में मददगार है.

पतंजलि आंवला जूस

इसमें शुद्ध आंवला का रस निहित है, जिसमें विटामिन-सी की मात्रा प्रचुर तौर पर उपलब्ध होती है. रसौली के दौरान होने वाली हेवी ब्लीडिंग में यह एक कारगर औषधि है और आयरन की कमी को पूरा करती है. साथ ही यह रसौली के विकास को भी कम करने में लाभदायक है.

सारांश

रसौली की बीमारी में पतंजलि की दवाइयां अहम भूमिका निभाती हैं. लेख में बताई गईं इन दवाइयों की मदद से रसौली की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है. साथ ही ध्यान रहे कि किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि यह जरूरी नहीं कि पतंजलि की दवाइयां सब पर एक जैसा असर दिखाएं.

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