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गर्भाशय का सामान्य साइज - Normal uterus size in mm in Hindi

गर्भाशय को आम बोलचाल की भाषा में बच्चेदानी कहते हैं. गर्भधारण करने के लिए यह अंग जरूरी होता है. गर्भाशय महिला के पेल्विस में होता है, इसमें अंडे का निषेचन, भ्रूण का आरोपण और बच्चे का विकास होता है. यह एक मस्कुलर अंग है, जो भ्रूण का विकास होने पर तेजी से फैलता है और डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे सामान्य आकार में आ जाता है. गर्भधारण करने के लिए गर्भाशय का आकार सामान्य होना जरूरी होता है. गर्भाशय का छोटा या बड़ा आकार गर्भधारण करने में दिक्कतें पैदा कर सकता है. ऐसे में गर्भधारण की योजना बनाने वाली महिलाओं के मन में अक्सर सवाल रहता है कि गर्भाशय का नॉर्मल साइज कितना होना चाहिए.

आज इस लेख में हम गर्भाशय के आकार के बारे में बात करेंगे -

गर्भाशय का आकार कितना होना चाहिए?
गर्भाशय का साइज बड़ा होने के कारण
प्रेगनेंसी
फाइब्रॉएड
एडेनोमायोसिस
प्रजनन कैंसर
सारांश

गर्भाशय का आकार कितना होना चाहिए?
प्रजनन आयु की महिलाओं में गर्भाशय के आकार के बारे में जानने के लिए ईरान में 15-45 वर्ष की आयु की 231 महिलाओं पर अध्ययन किया गया है. इस अध्ययन के अनुसार गर्भाशय का औसतन आकार 86.6 मिमी x 49.6 मिमी x 40.6 मिमी होता है. वहीं, जो महिलाएं बांझपन का सामना कर रही होती हैं, उनमें गर्भाशय का साइज 72.8 मिमी x 42.8 मिमी x 32.4 मिमी हो सकता है.

गर्भाशय का साइज बड़ा होने के कारण
गर्भाशय का औसत साइज 3 से 4 इंच x 2.5 इंच होता है. प्रेगनेंसी और यूट्राइन फाइब्रॉएड के चलते गर्भाशय का आकार बड़ा हो सकता है. इस दौरान महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है. इसके अलावा, पेट का बाहर निकलना भी गर्भाशय के बड़े होने का कारण हो सकता है. आइए, उन सभी स्थितियों के बारे में जानते हैं, जिसके चलते गर्भाशय का आकार सामान्य से अधिक हो सकता है -

प्रेगनेंसी
गर्भाशय सामान्य रूप से पेल्विस में फिट बैठता है. जब महिला गर्भवती होती है, तो जैसे-जैसे भ्रूण विकसित होता है, वैसे-वैसे गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है. डिलीवरी के समय तक गर्भाशय का आकार हजार गुना तक बढ़ सकता है. डिलीवरी के बाद यह अपने सामान्य आकार में आने लगता है. प्रसव के बाद गर्भाशय को सामान्य आकार में आने में 4 सप्ताह का समय लग सकता है.

फाइब्रॉएड
फाइब्रॉएड ट्यूमर होते हैं, जो गर्भाशय के अंदर और बाहर बढ़ सकते हैं. यह समस्या हार्मोनल असंतुलन या जेनेटिक होने के कारण हो सकती है. औसतन 50 वर्ष की उम्र में करीब 80 प्रतिशत महिलाओं को फाइब्रॉएड का सामना करना पड़ता है. फाइब्रॉएड नॉन-कैंसर ट्यूमर होता है, लेकिन इसके चलते निम्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं -

हैवी ब्लीडिंग
पीरियड्स में तेज दर्द
यौन क्रिया के दौरान असहज होना
कमर के निचले हिस्से में दर्द

कुछ फाइब्रॉएड छोटे होते हैं और कोई लक्षण पैदा नहीं करते हैं. लेकिन कई फाइब्रॉएड बड़े होते हैं, जिनकी वजह से गर्भाशय का आकार भी काफी बढ़ जाता है. 2016 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार फाइब्रॉएड वाली एक महिला के गर्भाशय का वजन 2 किलो से ज्यादा हो सकता है. वहीं, औसत गर्भाशय का आकार 1 किलो से भी कम होता है.

एडेनोमायोसिस
एडेनोमायोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग बढ़ती है. यह स्थिति एडिनोमायोसिस एस्ट्रोजन लेवल से जुड़ी हुई है. एडेनोमायोसिस से ग्रस्त महिलाओं के गर्भाशय का आकार सामान्य से दो या तीन गुना अधिक हो सकता है.

प्रजनन कैंसर
एंडोमेट्रियम और गर्भाशय ग्रीवा के ट्यूमर कैंसर का कारण बन सकते हैं. ट्यूमर की वजह से गर्भाशय सूज सकता है और इसके आकार में वृद्धि हो सकती है. इसके लक्षणों में शामिल हैं -

मासिक धर्म से अलग योनि से असामान्य रक्तस्राव
सेक्स के दौरान दर्द होना
पेल्विक एरिया में दर्द होना
पेशाब करते समय दर्द

सारांश
गर्भाशय महिलाओं के शरीर में मौजूद एक अंग है, जो गर्भधारण करने के लिए जरूरी होता है. गर्भाशय में कोई भी समस्या होने का असर गर्भधारण पर पड़ता है. अगर गर्भाशय का आकार सामान्य से छोटा या बड़ा हो जाता है, तो इस स्थिति में भी गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में अगर कोई महिला कंसीव करने की योजना बना रही है, तो पहले डॉक्टर से कंसल्ट किया जा सकता है.

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