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जानिए गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शिशु के विकास और मां के शरीर में आने वाले बदलावों के बारे में
जानिए गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शिशु का कितना विकास हो चुका होता है और मां के शरीर में क्या बदलाव आते हैं।
जानिए गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शिशु के विकास और मां के शरीर में आने वाले बदलावों के बारे में
जानिए गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शिशु के विकास और मां के शरीर में आने वाले बदलावों के बारे में
गर्भावस्था नौ महीने की होती है जिसमें इसे तीन-तीन महीनों के आधार पर तीन तिमाही में बांटा गया है। हर तिमाही के आधार पर शिशु के विकास और प्रेग्नेंसी की जटिलताओं का आंकलन किया जाता है। यहां हम आपको गर्भवास्था की दूसरी तिमाही के बारे में बताने जा रहे हैं।
कब शुरू होती है दूसरी तिमाही
प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही 13वें हफ्ते से लेकर 27वें हफ्ते तक होती है। इस दौरान शिशु बड़ा और मजबूत हो रहा होता है। इस समय में कई महिलाओं का पेट बाहर निकलने लगता है। अधिकतर महिलाओं के लिए पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही आसान होती है।
दूसरी तिमाही में शरीर में आते हैं ये बदलाव
प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में First trimester of Pregnancy (प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही) के लक्षणों में सुधार आना शुरू हो जाता है। कई महिलााओं को जी मतली और थकान से राहत मिलने लगती है और इस समय में वो अपनी प्रेग्नेंसी को एंजॉय कर पाती हैं।
इस दौरान शरीर में निम्न बदलाव और लक्षण नजर आ सकते हैं :
गर्भाशय का बढ़ना
पेट बाहर निकलना
लो बीपी के कारण चक्कर आना या सिर चकराना
शिशु की मूवमेंट को महसूस कर पाना
शरीर में दर्द
भूख बढ़ना
पेट, स्तनों, जांघों और कूल्हों पर स्ट्रेच मार्क आना
त्वचा में बदलाव आना जैसे कि ब्रेस्ट के निप्पलों का रंग गहरा होना
खुजली
एडियों या हाथों में सूजन
अगर आपको नीचे बताए गए लक्षण दिख रहे हैं तो तुंरत डॉक्टर को बताएं :
जी मचलना
उल्टी
पीलिया
अत्यधिक सूजन
तेजी से वजन बढ़ना
दूसरी तिमाही में शिशु का विकास
second trimester of pregnancy in hindi
गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद और दूसरी तिमाही के दौरान शिशु के अंग पूरी तरह से विकसित होते हैं। शिशु अब सुनने और स्वाद लेना शुरू कर सकता है। उसके छोटे-छोटे बाल आने लगते हैं। इसके बाद दूसरी तिमाही में शिशु हिलना शुरू कर देता है। शिशु के सोने और जागने का समय मां को महसूस होने लगता है।
अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार दूसरी तिमाही के अंत तक बच्चा 14 इंच लंबा और लगभग 0.907185 कि.ग्रा होता है।
डॉक्टर को कब दिखाएं
दूूसरी तिमाही में हर दूसरे से चौथे हफ्ते में गर्भवती महिला को डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर ब्लड प्रेशर और वजन चैक करेंगे। अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट से डायबिटीज की जांच, शिशु में जन्म विकार या अन्य अनुवांशिक विकार की जांच के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट आदि किया जाएगा।
गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में आने वाली जटिलताएं
दूसरी तिमाही में मिसकैरेज का खतरा कम होता है लेकिन फिर भी इसकी संभावना बनी रहती है। योनि से ब्लीडिंग होना मिसकैरेज का पहला लक्षण है। कई महिलाओं के साथ दूसरी तिमाही में ऐसा होता है। यूट्राइन सप्टम वॉल जैसे कई कारणों की वजह से ऐसा हो सकता है।
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नौ महीने से पहले डिलीवरी
अगर 38वें हफ्ते से पहले प्रसव पीड़ा हो तो इसे प्रीटर्म लेबर कहते हैं। मूत्राशय संक्रमण, डायबिटीज या किडनी डिजीज जैसे कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या या धूम्रपान करना इसका कारण हो सकता है। जिन महिलाओं का पहला बच्चा भी प्री-टर्म हुआ था, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है। वहीं जुड़वा बच्चे होने पर भी दूसरी तिमाही में जल्दी डिलीवरी हो सकती है।
प्रीटर्म प्रीमैच्योर रप्चर
जब शिशु को गर्भ में सुरक्षित रखने वाला एम्नियोटिक फ्लूइड फट जाता है तो डिलीवरी करवाने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। हालांकि, ऐसा दूसरी तिमाही ही नहीं बल्कि कभी भी हो सकता है।
सर्विकल इंसफिशिएंसी
वजाइना और गर्भाशय को जोड़ने वाले ऊतक को गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं। कभी-कभी ये ग्रीवा शिशु के वजन के कारण गर्भाशय के बढ़ने के दबाव काे नहीं झेल पाती है और खुल जाती है। इसके 39वें हफ्ते से पहले खुलने पर डिलीवरी करवानी पड़ती है।
इसके अलावा प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही में प्रीक्लैंप्सिया, सांस से संबंधित परेशानियां, जेस्टेशनल डायबिटीज और मसूड़ों से खून आने की दिक्कत हो सकती है।
गर्भावस्था की दूसरी तिमाही महिलाओं के लिए ज्यादा पीड़ादायक नहीं होती है। हालांकि, इस समय में भी कुछ जटिलताएं आने की पूरी संभावना रहती है। अगर आपको शरीर में दर्द या प्रेग्नेंसी को लेकर कुछ अजीब महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इससे किसी प्रकार की समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।
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