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कहते हैं पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे खराब… इस कहावत से तो हम सभी वाहकीफ हैं वैसे वक्त थोड़ा बदल भी गया है। क्योंकि अब जो बच्चे खेलने-कूदने में माहिर हैं वो भी जीवन में तरक्की करते हैं। वैसे गर्भावस्था के दौरान किताब पढ़ने से लाभ मिलता है। वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान भी किताब पढ़ने की सलाह दी जाती है। आज इस आर्टिकल में जानेंगे गर्भावस्था में किताबें (Books during pregnanacy) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी।


कई रिसर्च में कहा गया है कि गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला को तनाव मुक्त रहना चाहिए, अपने आपको आसान से कामों में व्यस्त रहना चाहिए और ऐसी ही कई अन्य सलाह दी जाती हैं। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता हो। बड़े-बुजुर्गों की मानें तो इस दौरान धार्मिक किताबें जरूर पढ़नी चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे शिशु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं गर्भावस्था में किताबें सेहत (Health) और गर्भावस्था से जुड़ी हों उससे भी गर्भवती महिला को लाभ मिलता है। ऐसा करने से महिला गर्भावस्था में कैसे फिट रहा जाए ये भी आसानी से समझ सकती हैं।


1. श्रीमद भगवद गीता (Shree Bhagwat Geeta)


‘श्रीमद भगवद गीता’ सबसे पुरानी धार्मिक पुस्तकों में से एक है। कई लोगों का मानना है कि इस दौरान धार्मिक विचार भी गर्भ में पल रहे शिशु के लिए अत्यधिक जरूरी है, जो सच भी है। एक और सच ये है कि ‘श्रीमद भगवद गीता’ में ये भी समझाने की कोशिश की गई है कि मां और पेरेंट्स (माता-पिता) में क्या फर्क है। यही नहीं बड़े और बुजुर्गों की माने तो ‘श्रीमद भगवद गीता’ पढ़ने से गर्भवती महिला का मन शांत रहता है और शिशु में अच्छे गुणों का विकास होता है। इसलिए गर्भावस्था में किताबें पढ़ना चाहते हैं और अगर आप धार्मिक किताबे पढ़ना चाहती हैं तो ‘श्रीमद भगवद गीता’ पढ़ने की सलाह दी जाती है।


2. बी प्रिपयेर्ड (Be Prepared)




गर्भावस्था के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं आपके लाइफपार्टनर ऐसे में सिर्फ गर्भवती महिला ही क्यों बनने वाले पिता भी किताबें पढ़ सकते हैं। गैरे ग्रीनबर्ग और जेन्नी हेडेन द्वारा लिखी गई किताब ‘बी प्रिपेयर्ड’ (Be Prepared) डैड (पिता) के लिखी गई पुस्तक है। बी प्रिपेयर्ड बुक में ये बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान एक पिता को कैसे रिलैक्स रहना चाहिए और अपनी रिस्पॉन्सिब्लिटी को कैसे निभाना चाहिए ये बताया गया है। यही नहीं बनने वाले डैड इस पुस्तक के साथ-साथ प्रेग्नेंसी क्लास (Pregnancy class) भी ज्वाइन कर सकते हैं। दरअसल इस क्लास को दोनों ही हस्बैंड और वाइफ कुछ वक्त के लिए ज्वाइन कर सकते हैं। यहां आपको प्रेग्नेंसी या डिलिवरी से जुड़ी अहम जानकारी दी जाती है। इसे समझने के बाद गर्भावस्था के साथ-साथ डिलिवरी के दौरान परेशानी कम हो सकती है। गर्भावस्था में किताबें पढ़ना चाहती हैं, तो बी प्रिपेयर्ड आप पढ़ सकती हैं।


3. पासपोर्ट टू हेल्दी प्रेग्नेंसी (Passport to a healthy pregnancy)


‘पासपोर्ट टू हेल्दी प्रेग्नेंसी‘ (Passport to a healthy pregnancy) में प्रेग्नेंसी की शुरुआत से अंत तक और नवजात की परवरिश कैसे करें इसकी पूरी जानकारी मिलती है। इन किताबों को पढ़कर आपका समय बीतेगा और साथ ही नई-नई जानकारी और आवश्यक जानकारी मिल सकती है। अगर आप पहली बार गर्भवती हुई हैं, तो आपके मन में गर्भावस्था से जुड़े कई सवाल मन में आ रहें हैं तो ‘पासपोर्ट टू हेल्दी प्रेग्नेंसी’ की जानकारी मिल सकती है।


4. व्हाट टू डू व्हेन यू आर हैविंग टू (What to do when you are having twins baby)


पोएट और राइटर नेटली डाइस द्वारा लिखी गई किताब ‘व्हाट टू डू व्हेन यू आर हैविंग टू’ में जुड़वा बच्चे (What to do when you are having twins baby) की जानकारी मिलने पर अपने आपको कैसे तनाव और चिंता से दूर रखें। इस किताब में ये बताया गया है कि प्रेग्नेंसी के दौरान अधिकतर कपल्स किसी न किसी बात को लेकर परेशान हो जाते हैं ऐसे में कैसे परेशानी से दूर रहा जाय। गर्भावस्था के दौरान ऐसी कई तरह की एक्टिविटी होती है जिन्हें नजरंदाज करने की जरुरत पड़ती है जैसे नकारात्मक विचारधारा से दूर रहना चाहिए या नेगिटिव सोच नहीं रखनी चाहिए। यही नहीं गर्भवती महिला को गर्भावस्था के तिमाही के अनुसार खाने और वर्कआउट (Workout) की सलाह दी जाती है।


5. आयुर्वेदिक गर्भ संस्कार (Ayurvedic Garbh sanskar)


आयुर्वेदिक डॉक्टर बालाजी तांबे द्वारा लिखित गर्भावस्था की किताब ‘आयुर्वेदिक गर्भ संस्कार’ (What to Do When You’re Having Two) हैं। इस किताब में आयुर्वेदिक और नैचुरल तरीके से गर्भावस्था के दौरान कैसे ख्याल रखा जाए ये बताया गया है।


6. प्रेग्नेंसी ब्लूज (Pregnancy Blues)


शैला कुलकर्णी मिश्री द्वारा लिखी गई बुक ‘प्रेग्नेंसी ब्लूज’ (Pregnancy Blues) में गर्भावस्था के दौरान होने वाले डिप्रेशन (Depression) चर्चा की गई है। कैसे प्रेग्नेंसी में गर्भवती महिला अपने आपकी खुश रख सकती हैं ये बताया गया है। इसलिए गर्भावस्था में किताबें पढ़ना चाहती हैं, तो प्रेग्नेंसी ब्लूज पढ़ सकती हैं।


7. फिट प्रेग्नेंसी (Fit pregnancy)


नमिता जैन द्वारा लिखी गई किताब फिट प्रेग्नेंसी में गर्भवती महिला को किस तरह का आहार लेना चाहिए ये बताया गया है। प्रेग्नेंसी फूड रेसिपी (Pregnancy food recepie) से गर्भवती महिला अपना गर्भ में पल रहे शिशु दोनों का ख्याल रखने में सक्षम हो सकती हैं। वैसे गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आहार का विशेष ख्याल रखने की भी जरूरत होती है। गर्भवती महिला को अपने डायट (Diet) में अलग-अलग तरह की सब्जियां, फल, बीन्स, नट्स (Nuts), कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स, साबुत अनाज और लाइट प्रोटीन को डायट अवश्य शामिल करना चाहिए। ध्यान रखें की सिर्फ कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे सोडा, तले हुए खाद्य पदार्थ और हाइली रिफाइंड ग्रेन्स तथा एक्स्ट्रा शुगर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए। गर्भावस्था के पहली तिमाही के दौरान गर्भवती महिला को कैलोरी की जरूरत नहीं बढ़ती हैं। अगर आपके गर्भ में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं तब कैलोरी की ज्यादा आवश्यकता हो सकती है।


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