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गर्भावस्था में रूबेला (जर्मन मीजल्स)

रूबेला एक वायरल इनफेक्शन है, जिसके लक्षण फ्लू जैसे ही होते हैं। यह बहुत ही संक्रामक इनफेक्शन है और आपके और गर्भस्थ शिशु के लिए गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। गर्भावस्था की पहली तिमाही में अगर यह इनफेक्शन हो जाए, तो गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर आप रूबेला के प्रति प्रतिरक्षित नहीं हैं, तो गर्भावस्था में आपको विशेष ध्यान रखने की जरुरत होगी।
रूबेला (जर्मन मीजल्स) क्या है?
रूबेला या जर्मन खसरा एक वायरल संक्रमण है, जिसकी वजह से धब्बेदार चकत्ते होते हैं। अगर बचपन में आपको सभी टीके लगे हैं, तो शायद आप एमएमआर के टीके की वजह से रूबेला से प्रतिरक्षित होंगी।

अगर आपका टीकाकरण नहीं हुआ है, और आपको पहले कभी रूबेला नहीं हुआ है तो गर्भावस्था में इस विषाणु से दूर रहने के लिए आपको सावधानी बरतनी होगी। यह बहुत ही संक्रामक इनफेक्शन है और गर्भावस्था में आपके और पेट में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है।
गर्भावस्था में रूबेला के क्या लक्षण हैं?
जितने लोगों को रूबेला होता है, उनमें से करीब आधे लोगों को तो इसके कोई शुरुआती लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि उन्हें रूबेला है। जिन लोगों में लक्षण सामने आते हैं, उन्हें निम्नांकित महसूस हो सकता है:

हल्का बुखार
गर्दन के पीछे लसीका पर्व (लिम्फ नोड्स) में सूजन
सर्दी-जुकाम के लक्षण, जैसे कि बंद नाक या नाक बहना और गले में दर्द
लाल पड़ जाना और उनमें दर्द व संक्रमण (कंजक्टिवाइटिस, नेत्र शोथ)
मुंह में छोटे-छोटे दानें

शुरुआती लक्षणों के कुछ दिनों बाद, चेहरे और गर्दन पर लाल धब्बेदार चकत्ते उभरते हैं। इनमें खुजली भी हो सकती है और धीरे-धीरे ये चकत्ते शरीर में बाकी जगहों पर फैलते हैं। ये चकत्ते आमतौर पर एक सप्ताह तक रहते हैं और उसके बाद गायब हो जाते हैं।

अगर, आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आई हों जिसे रूबेला हो या आपको रूबेला होने की जरा भी आशंका हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। वे आपकी खून की जांच करवाएं ताकि रूबेला की पुष्टि हो सके।
क्या गर्भावस्था में मुझे रूबेला होना गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक है?
गर्भावस्था के दौरान अगर आपको रूबेला हो जाए, तो इससे गर्भपात, समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह मृत शिशु के जन्म (स्टिलबर्थ) का कारण भी बन सकता है।

साथ ही, गर्भस्थ शिशु में जन्मजात रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) विकसित होने का भी खतरा रहता है। सीआरएस की वजह से शिशु में गंभीर जन्मजात विकार हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

आंखों की समस्याएं जैसे कि मोतियाबिंद (आंखों में धुंधले धब्बे)
मस्तिष्क, यकृत, फेफड़ों और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) को क्षति
शरीर की तुलना में सिर काफी छोटा होना (माइक्रोसैफली)
गर्भावस्था के दौरान कम विकास
हृदय से जुड़ी विसंगतियां
बहरापन

कई बार, सीआरएस से होने वाली समस्याओं का जन्म के तुरंत बाद पता नहीं चलता। मगर, शिशु के बड़ा होने पर ये समस्याएं सामने आती हैं।
मेरे गर्भस्थ शिशु को जन्मजात रूबेला सिंड्रोम होने का कितना खतरा है?
अगर, गर्भावस्था की पहली तिमाही में आपको रूबेला हो जाए, तो सी.आर.एस. शिशु के स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है। प्रेगनेंसी के 12 सप्ताह से पहले अगर आपको रूबेला इनफेक्शन हो जाए तो, शिशु को सीआरएस होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। गर्भावस्था के इस चरण में जिन गर्भवती महिलाओं को रूबेला होता है, उनमें से 10 में से नौ के शिशु जन्मजात रुबेला सिंड्रोम के साथ पैदा होते हैं।

11 और 16 सप्ताह के बीच यह जोखिम तेजी से घट जाता है। इस दौरान 10 में से केवल एक या दो शिशुओं में ही सीआरएस होने का खतरा रहता है। 16 और 20 सप्ताह के बीच, सीआरएस होना काफी दुर्लभ है और अगर यह हो भी जाए तो शिशु में इनफेक्शन का मुख्य प्रभाव बहरापन ही होता है।

20 सप्ताह के बाद से किसी भी शिशु को सीआरएस होने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
गर्भावस्था में रूबेला होने पर क्या उपचार होता है?
अगर आपको गर्भावस्था में रूबेला इनफेक्शन हो जाए, तो डॉक्टर आपको ह्यूमन नॉर्मल इम्यूनोग्लोबुलिन (एचएनआईजी) का इंजेक्शन दे सकती हैं। एचएनआईजी आपके और गर्भस्थ शिशु के लिए सुरक्षित है, और इससे आपको रूबेला के लक्षण ज्यादा गंभीर नहीं होते। हालांकि, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को रूबेला से होने वाला जोखिम कम हो जाता है।

अगर आपको प्रेगनेंसी में रूबेला हो भी जाए तो डॉक्टर आपको जरुरी देखभाल देंगे। शिशु के स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए आपके अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड स्कैन भी करवाए जा सकते हैं।
क्या मैं रूबेला से बचने के लिए प्रेगनेंसी में एमएमआर टीका लगवा सकती हूं?
अगर आप गर्भवती हैं, तो एमएमआर का टीका नहीं लगवा सकती क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु की सेहत पर असर पड़ सकता है। यह टीका जीवित वायरस से बना होता है, जो आपके शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। शिशु के जन्म के बाद आप यह टीका लगवा सकती हैं, क्योंकि स्तनपान के दौरान यह सुरक्षित माना जाता है।

यदि आपको अपनी गर्भावस्था का पता न हो, और अनजाने में इसके शुरुआती दिनों में एमएमआर वैक्सीन लगवा लेती हैं, तो भी ज्यादा चिंतित न हों। इस बात की पूरी संभावना है कि आपका शिशु बिल्कुल सुरक्षित होगा। हालांकि, आपकी डॉक्टर 18 सप्ताह की गर्भावस्था पर अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दे सकती हैं, ताकि शिशु के विकास की जांच हो सके। इससे आपको काफी तसल्ली मिल सकेगी।
मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं रूबेला से प्रतिरक्षित हूं या नहीं?
अगर आपका टीकाकरण नहीं हुआ है और यह भी सुनिश्चित नहीं है कि आपको पहले कभी रूबेला हुआ है या नहीं, तो रूबेला एंटिबॉडीज की जांच करवाने से ही यह पता चल सकेगा कि आप इससे प्रति​रक्षित हैं या नहीं। इसका पता टॉर्च टेस्ट से लगाया जा सकता है। अगर आपको पहले टीका लगा है या संक्रमण हो चुका है तो टॉर्च टेस्ट में रूबेला की आईजीजी एंटिबॉडीज पॉजिटिव आएंगी।

अगर आपको हाल ही में रूबेला इनफेक्शन हुआ है तो आईजीएम एंटिबॉडीज भी मौजूद होंगी। अगर जांच में कोई एंटिबॉडीज न आएं और परिणाम नेगेटिव हो तो इसका मतलब है कि आप रूबेला से प्रतिरक्षित नहीं है। ऐसे में आपको रूबेला से बचाव के लिए सावधानी बरतनी होगी।

अगर, आप गर्भधारण के प्रयासों के बीच डॉक्टर से मिलती हैं, तो बेहतर होगा कि आप गर्भवती होने से पहले ही अपनी प्रतिरक्षण क्षमता की जांच करा लें। इस तरह, यदि आप प्रतिरक्षित नहीं हैं, तो आप गर्भावस्था से पहले ही इसके खिलाफ टीका लगवा सकती हैं।

एमएमआर के टीकाकरण के बाद कम से कम एक महीना बाद ही गर्भाधान का प्रयास करें। इससे आपके शरीर को टीके से मिले विषाणु को खत्म करने और इसके प्रतिरक्षण क्षमता विकसित करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।

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