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गर्भवती महिलाओं का कराया पुंसवन संस्कार, ताकि गर्भस्थ शिशु को कोई खतरा नहीं रहे
2 वर्ष पहले


कुशवाह कॉलोनी में दो दिवसीय पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न

शहर की कुशवाह कॉलोनी में गायत्री परिवार द्वारा आयोजित दो दिवसीय पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ के आखिरी दिन रविवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने वेद मंत्र उच्चारण के साथ विश्वशांति के लिए हवन में आहुतियां दीं। साथ ही कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं ने पुंसवन संस्कार करवाया। इसी क्रम में सनातन धर्म के छह अन्य संस्कार गायत्री परिवार द्वारा निभाए गए। इस अवसर पर लाखों गायत्री मंत्र का जप किया गया।

महायज्ञ कार्यक्रम के प्रारंभ में आयोजकों के द्वारा सर्वप्रथम गायत्री मां और गुरुसत्ता का आह्वान किया गया। जिसके बाद पंचकुंडीय महायज्ञ में विश्वशांति के लिए हवन कुंड के समीप बैठे श्रद्धालुओं ने गायत्री मंत्र का उच्चारण कर यज्ञ के हवन कुंड में घी, धुप, तील, जौ, समेत अन्य पूजन सामग्री से हवन करते हुए आहुतियां डालीं। हवन कुंड पर बैठे श्रद्धालुओं को योग साधना के माध्यम से रोग ठीक करने की विधि भी बताई गई। महायज्ञ में भिंड सहित आसपास क्षेत्र के श्रद्धालु शामिल हुए। वहीं श्रद्धालुओं ने देव पूजन किया।

तीन माह बाद बनने लगता है बच्चे का मस्तिष्क, इसके बाद कराते हैं पुंसवन संस्कार

पांच कुंडीय महायज्ञ में आहुति देने के बाद पुंसवन संस्कार का आयोजन हुआ। जिसमें गर्भवती महिलाओं ने गर्भ पूजन किया। इस अवसर पर यज्ञाचार्य बृजलता श्रीवास्तव ने कहा कि पुंसवन संस्कार तंदरुस्त संतान के लिए किया जाने वाला संस्कार है। इस संस्कार के करने से गर्भ को किसी तरह का खतरा नहीं रहता। गर्भधारण के समय से ही शिशु का विकास होने लगता है यह विकास सही तरीके से हो इसी के लिए पुंसवन संस्कार किया जाता है। व्यास स्मृति में इसका स्पष्ट उल्लेख है। पुंसवन संस्कार के पीछे यह मान्यता है कि गर्भधारण के तीन महीने तक गर्भस्थ शिशु लड़का है या लड़की इसका भेद नहीं होता इसलिए इस चिह्न के विकास से पहले ही पुंसवन संस्कार को किया जाता है। इसी क्रम में यज्ञाचार्य विमलेश पाठक ने कहा कि हिंदू धर्म संस्कारों में पुंसवन संस्कार द्वितीय संस्कार है। पुंसवन संस्कार जन्म के तीन माह के पश्चात किया जाता है। पुंसवन संस्कार तीन महीने के पश्चात इसलिए आयोजित किया जाता है क्योंकि गर्भ में तीन माह के पश्चात गर्भस्थ शिशु का मस्तिष्क विकसित होने लगता है।

यज्ञ मंडप में पुंसवन संस्कार के अलावा अन्नप्राशन, नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत व दीक्षा संस्कारों को संपन्न कराया गया। गायत्री परिवार के सदस्यों ने अपने भक्ति गीत, संगीतसे भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


यह संस्कार भी हुए

गायत्री मंत्र में विश्व को बदलने की शक्ति

महायज्ञ के दौरान गायत्री परिवार के सदस्य और यज्ञाचार्य सर्वेश शर्मा ने बताया कि योग है तो जीवन है। यज्ञ दीक्षा एवं गायत्री महामंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण है। यज्ञ एक पवित्रतम कर्म है। प्रत्येक प्राणी का जीवन दाता है। यज्ञ का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व है। इस महायज्ञ के रचयिता प्रेरक आचार्य संरक्षणकर्ता एवं संस्थापक पूज्य गुरूदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य हैं जो महाकाल की चेतना से युक्त हैं। उन्होंने गायत्री मंत्र की महत्ता को बताते कहा कि गायत्री मंत्र में सभी मंत्रों की शक्ति समाई हुई है। इस महामंत्र में व्यक्ति, समाज और पूरे विश्व को बदलने की शक्ति है। गायत्री परिवार द्वारा यज्ञ के माध्यम से वातावरण शुद्धिकरण, संस्कार व शिक्षा देने के साथ लोगों में प्रचलित अंधविश्वास तथा अन्य व्यसनों के प्रति जागरूक किया जाता है। इस अवसर पर निशा श्रीवास्तव, मालती कुशवाह, प्रभा मिश्रा, गीता मिश्रा, बिंदू मिश्रा, मिथलेश, मुन्नासिंह भदौरिया, राजेंद्र मिश्रा, सुरेंद्र, राजेंद्र सिंह, तृप्ति राजावत, रिया राजावत, काजल दीक्षित, नीतू सिंह भदौरिया, प्रज्ञा चौहान, अन्नू शर्मा सुनील सोनी मौजूद रहे।

कुशवाह कॉलोनी में आयोजित पंच कुंडीय महायज्ञ में आहुति देते श्रद्धालु।

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