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गर्भावस्था के दौरान फल सब्जी खाने की बजाय मुल्तानी मिट्टी, मिट्टी, कोयला राख का सेवन है। डॉक्टरों के अनुसार इन महिलाओं में आयरन कैल्शियम की कमी होती है। जिस कारण उनका यह अजीबो गरीब चीजें खाने का मन करता है। इसी के कारण गर्भवती के पेट में कीड़े होना आम बात हो जाती है।

1. गर्भवती को होने वाले नुकसान

दांतों में चोट- ऐसा माना जाता है कि मिट्टी में धातु के कुछ अंश और पत्थर के छोटे टुकड़े पाए जाते हैं। मिट्टी को चबाने के दौरान उसमें पाए जाने वाले यह धातु या पत्थर के अंश दांतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कब्ज की शिकायत- मिट्टी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर की पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर देते हैं। इस कारण मिट्टी का निरंतर सेवन पाचन प्रक्रिया को अत्यधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

आंतों में रुकावट- मनुष्य का पाचन तंत्र मिट्टी को पचाने के लिए नहीं बना है, इसलिए इसका लगातार सेवन आंतों की कार्य क्षमता को प्रभावित करता है। इससे पेट दर्द हो सकता है। साथ ही आंतों में रुकावट भी पैदा होती है, जो भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

कुपोषण- मिट्टी खाने से गर्भवती को कुपोषण की समस्या भी हो सकती है। कारण यह है कि मिट्टी खाने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इस वजह से गर्भवती को भूख का एहसास नहीं होता। वहीं, मिट्टी भोजन में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स जैसे जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण को भी बाधित कर सकती है, जो गर्भावस्था के समय एक महिला को मिलने चाहिए। फलस्वरूप, मिट्टी खाने के कारण महिला को उचित पोषक तत्व नहीं मिल पाते और वह कुपोषण का शिकार हो जाती है।

परजीवी संक्रमण- मिट्टी खाने से परजीवी संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। दरअसल मिट्टी में कुछ ऐसे परजीवी भी पाए जाते हैं, जो अपना आधा जीवन अन्य किसी जीव की आंत में जाकर पूरा करते हैं जैसे- फीताकृमि और गोलकृमि। मिट्टी का निरंतर सेवन करने से उसमें मौजूद परजीवी मनुष्य की आंत तक पहुंच जाते हैं। यह पेट संबंधी एक बड़ी समस्या बनकर भविष्य में उभर सकती है।

टोक्सीमिया इफेक्ट- मिट्टी में सीसा और कीटनाशक जैसे कई विषैले पदार्थ पाए जाते हैं। मिट्टी का सेवन करने से यह विषैले पदार्थ गर्भवती के पेट में पहुंच कर शरीर पर बुरे प्रभाव छोड़ते हैं। साथ ही खून में इन्फेक्शन का भी कारण बनते हैं, जो ब्लड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्या को जन्म दे सकते हैं।

हाइपरक्लेमिया इफेक्ट- मिट्टी खाने के कारण हाइपरक्लेमिया (खून में पोटेशियम की मात्रा का अधिक होना) होने का भी खतरा रहता है। दरअसल शरीर में पोटेशियम तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों की कोशिकाओं के कार्य को संतुलित करने का काम करता है। इसकी अधिकता हो जाने की स्थिति में संतुलन की यह अवस्था प्रभावित होती है।

2. गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ने वाले प्रभाव

समय पूर्व प्रसव- मिट्टी खाने से समय पूर्व प्रसव की आशंका बढ़ जाती है, जिससे बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है।

प्रसव के दौरान मृत्यु- मिट्टी खाने से उसमें पाए जाने वाले सीसा जैसे विषैले पदार्थों के साथ कुपोषण का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है। इस कारण प्रसव के दौरान बच्चे की जान जाने का खतरा हो सकता है।

कुपोषण- जैसा की आपको लेख में पहले बताया जा चुका है कि मिट्टी खाने से गर्भवती कुपोषण का शिकार हो सकती है। इस कारण बच्चे में भी कुपोषण की समस्या देखी जा सकती है। फलस्वरूप जन्म के दौरान बच्चे का वजन सामान्य से कम हो सकता है।

चिड़चिड़ापन- गर्भावस्था के दौरान उचित पोषक तत्व न मिल पाने के कारण बच्चे में चिड़चिड़ापन जैसे विकार भी देखने को मिल सकते हैं।

सिर सामन्य से छोटा- विशेषज्ञों के मुताबिक मिट्टी खाने के कारण बच्चे का आकार अविकसित रह सकता है। इस कारण बच्चे के सिर की परिधि समान्य के मुकाबले काफी कम हो सकती है।

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