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गर्भावस्था में कितनी बार भोजन खाना चाहिए?
आप शायद पाएंगी कि गर्भावस्था के दौरान आपकी भूख घटती-बढ़ती रहती है।

प्रेगनेंसी के शुरुआती कुछ हफ्तों में शायद आपकी भूख काफी कम हो जाए। आपका शायद सही ढंग से भोजन करने का मन न करें, विशेषकर यदि आपको मिचली या उल्टी रहती है तो।

गर्भावस्था के मध्य में आपकी भूख शायद उतनी ही रहेगी जितनी की गर्भावस्था के पहले रहती थी या फिर इसमें थोड़ी बढ़त हो सकती है। गर्भावस्था के अंत में आपको शायद ज्यादा भूख लगने लगे।

यदि आपको भूख न लग रही हो, तो भी हो सकता है शिशु भूखा हो इसलिए कोशिश करें कि आप नियमित अंतराल पर कुछ न कुछ खाती रहें। कोशिश करें कि आप दिन में तीन बार भोजन और इनके बीच में यदि भूख लगे तो स्नैक्स ले सकती हैं।

यदि मिचली, भोजन विमुखता, एसिडिटी, सीने में जलन या अपचता की वजह से भोजन करना आपको मुश्किल लग रहा हो तो, कम मात्रा में लेकिन समय-समय पर खाती रहें। यह शायद आपके ​शरीर के लिए सही रहेगा।

उच्च फाइबर और साबुत अनाज वाले भोजन खाने से आपको पेट भरा-भरा लगेगा और ये पौष्टिक भी रहता है।



स्वस्थ आहार में क्या-क्या शामिल होता है?
आपके रोजमर्रा के आहार में प्रतिदिन निम्नांकित भोजन समूहो में से अलग-अलग भोजन शामिल होने चाहिए:

अनाज, साबुत व पूर्ण अनाज, दाल और मेवे: हर भोजन में इनका एक हिस्सा रखें। जटिल कार्बोहाइड्रेट्स जैसे कि ब्राउन राइस, साबुत अनाज, किनोआ, जई (ओट्स), ज्वार, बाजरा, सूजी और होलग्रेन ब्रेड और पास्ता आदि का सेवन करें। इनसे आपको और शिशु को न केवल ज्यादा पोषक तत्व मिलेंगे, बल्कि इनसे आपका पेट ज्यादा समय तक भरा-भरा रहेगा। साथ ही स्टार्चयुक्त जड़ वाली सब्जियां जैसे कि आलू, जिमिकंद, शकरकंदी, अरबी या कच्चा केला आदि भी खाएं।

​फल और सब्जियां। कोशिश करें कि आप हर दिन कम से कम पांच हिस्से ताजा फल और सब्जियां खाएं। ​फल से ज्यादा सब्जियां खाने पर जोर दें। अलग-अलग रंगों वाले विभिन्न फल और सब्जियां शामिल करें, जिससे आपका पोषण बढ़ेगा। जूस और स्मूदी भी फायदा करती हैं। मगर, प्राकृतिक शर्करा आपके ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकती है और आपके दांत भी खराब हो सकते हैं। इसलिए बेहतर है कि इन पेयों की मात्रा सीमित रखें।

प्रोटीन से भरपूर भोजन। इनमें कम वसा का मांस और चिकन, मछली, अंडे और दाल-दलहन शामिल हैं। कोशिश करें कि एक हफ्ते में दो या इससे ज्यादा हिस्से मछली खाएं। इसमें कम से कम एक और ज्यादा से ज्यादा दो हिस्सा तैलीय मछली जैसे कि बांगड़ा या सार्डिन मछली होनी चाहिए।

डेयरी उत्पाद। इनमें शामिल है दही, छाछ और पनीर। ये भोजन कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी12 से भरपूर होते हैं। इनके ऐसे विकल्प जिनमे वसा और मीठा कम हो, वे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। यदि आपको लैक्टॉस असहिष्णुता है, तो अपनी डॉक्टर से बात करें कि आपको क्या खाना चाहिए।

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