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गर्भावस्‍था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं और पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है जिसकी वजह से प्रेगनेंट महिलाओं को अक्‍सर एसिडिटी की परेशानी सताती है। प्रेगनेंसी में पाचन तंत्र कमजोर होने की वजह से महिलाओं को एसिडिटी और सीने में जलन की समस्‍या होने लगती है।

प्रेगनेंसी में पाचन तंत्र कमजोर होने की वजह से महिलाओं को एसिडिटी और सीने में जलन की समस्‍या होने लगती है। इसकी वजह से प्रेगनेंसी में बेचैनी और असहजता महसूस होने लगती है। हालांकि, जीवनशैली में कुछ उचित बदलाव कर के और एसिडिटी दूर करने के घरेलू उपायों की मदद से आप प्रेगनेंसी में होने वाली एसिडिटी को कंट्रोल कर सकती हैं।


प्रेगनेंसी एक खूबसूरत और अनोखा सफर तो होता ही है लेकिन इस दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियां भी झेलनी पड़ती हैं। उल्‍टी, मॉर्निंग सिकनेस और जी मतली के साथ-साथ गर्भावस्‍था में एसिडिटी होना भी एक आम समस्‍या है।
प्रेगनेंसी में एसिडिटी दूर करने के कई घरेलू तरीके हैं और गर्भावस्‍था में एसिडिटी की दवा लेने की बजाय एसिडिटी के घरेलू नुस्‍खे ही ज्‍यादा कारगर साबित होते हैं।

गर्भावस्‍था में एसिडिटी के कारण
कई महिलाओं में सीने में जलन और एसिडिटी प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों में शामिल होती है। गर्भावस्‍था के पहले दो महीनों में इस तरह ही दिक्‍कत महसूस हो सकती है।
प्रेगनेंसी की शुरुआत में शरीर में अधिक मात्रा में प्रोजेस्‍टेरोन और रिलैक्‍सिन हार्मोन बनता है। ये शरीर की नरम मांसपेशियों को आराम देते हैं जिसमें गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल मार्ग की मांसपेशियां भी शामिल हैं। इस वजह से पाचन धीमा पड़ जाता है और अपच, पेट फूलने एवं एसिडिटी की दिक्‍कत होने लगती है।

प्रेग्‍नेंसी की पहली तिमाही में शरीर में बहुत ज्‍यादा हार्मोनल बदलाव आते हैं। प्रोजेस्‍टेरोन और एस्‍ट्रोजन हार्मोन तेजी से बढ़ता है जिससे भ्रूण के विकास के लिए यूट्राइन लाइनिंग मोटी होती है। एस्‍ट्रोजन के बढ़ने के कारण शरीर में पानी और गैस ज्‍यादा बनती है जिससे असहज और पेट में दर्द महसूस होता है।
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प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही और गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस और थकान जैसे लक्षण कम होने लगते हैं और गर्भाशय विकसित हो रहे भ्रूण के लिए जगह बनाने लगता है। गर्भाशय के बढ़ने पर आसपास के अंगों पर दबाव पड़ता है जिससे कब्‍ज और ज्‍यादा गैस बनने जैसी पाचन से संबंधी दिक्‍कतें होने लगती हैं।
प्रेगनेंट महिलाओं के भी शरीर में गैस बनती है। शरीर में प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन का स्‍तर बढ़ने की वजह से गैस ज्‍यादा बनने लगती है। ये हार्मोन गैस्‍ट्राइंटेस्‍टाइनल मार्ग की नरम मांसपेशियों को आराम पहुंचाने का काम करता है। इन मांसपेशियों के रिलैक्‍स होने पर खाना धीमी गति से पाचन तंत्र की ओर आ सकता है।

पाचन के धीमा पड़ने पर आंतों में गैस अधिक बनने लगती है। इसकी वजह से डकार आने, गैस पास होने और पेट फूलने की दिक्‍कत भी हो सकती है।


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गर्भावस्‍था में गैस से बचना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि, कुछ आसान तरीकों से आप प्रेग्‍नेंसी में गैस ज्‍यादा बनने से जरूर रोक सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ गर्भावस्‍था में गैस बनने को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में आप नोट करें कि क्‍या खाने के बाद आपको ज्‍यादा गैस बनती है।

बींस, मटर और साबुत अनाज से गैस बन सकती है। इसके अलावा ब्रोकली, एस्‍पैरेगस, पत्तागोभी भी गैस बनाते हैं।
अमेरिकन प्रेग्‍नेंसी एसोसिएशन के अनुसार गर्भावस्‍था के दौरान गैस बनने से रोकने, कम करने और कंट्रोल करने के लिए नीचे बताए गए टिप्‍स असरकारी साबित हो सकते हैं :
कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक कम या बिल्‍कुल न पिएं।तली हुई और भारी चीजें खाने से बचें।हमेशा गिलास से पानी या अन्‍य कोई पेय पदार्थ पिएं।दिनभर में थोड़ा-थोड़ा कर के खाएं।कपड़े पेट पर से ज्‍यादा टाइट नहीं होने चाहिए।आर्टिफिशियल स्‍वीटनर का कम सेवन करें और खूब पानी पिएं।धीरे और चबा-चबाकर खाएं।

एप्‍पल साइडर विनेगर
लगभग एक गिलास पानी में एक चम्‍मच विनेगर मिलाकर पी लें। खाना खाने से एक घंटे पहले भी इस उपाय को करने से गर्भवती महिलाओं को एसिडिटी से छुटकारा मिलेगा। इसमें मौजूद एसिड पेट में अधिक एसिड बनने से रोकता है जिससे एसिडिटी में कमी आती है।

नींबू पानी
एक गिलास पानी में एक-दो नींबू निचोड़कर डालें। अब इसमें कच्‍चा शहद डालकर पानी को उबालकर चाय बना लें। जब पानी उबल जाए तो उसे ठंडा होने के लिए रख दें। ठंडा होने पर घूंट-घूंट कर इसे पिएं। नींबू पानी पेट में पाचक रसों और पित्त के उत्‍पादन को बढ़ाता है जिससे पेट में एसिड कम बनने में मदद मिलती है और पाचन में सुधार आता है।
Gas problem in Pregnancy : गर्भावस्था में गैस क्यों बनती है?

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प्रेग्‍नेंसी की पहली तिमाही में शरीर में बहुत ज्‍यादा हार्मोनल बदलाव आते हैं। प्रोजेस्‍टेरोन और एस्‍ट्रोजन हार्मोन तेजी से बढ़ता है जिससे भ्रूण के विकास के लिए यूट्राइन लाइनिंग मोटी होती है। एस्‍ट्रोजन के बढ़ने के कारण शरीर में पानी और गैस ज्‍यादा बनती है जिससे असहज और पेट में दर्द महसूस होता है।
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प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही और गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस और थकान जैसे लक्षण कम होने लगते हैं और गर्भाशय विकसित हो रहे भ्रूण के लिए जगह बनाने लगता है। गर्भाशय के बढ़ने पर आसपास के अंगों पर दबाव पड़ता है जिससे कब्‍ज और ज्‍यादा गैस बनने जैसी पाचन से संबंधी दिक्‍कतें होने लगती हैं।
प्रेगनेंट महिलाओं के भी शरीर में गैस बनती है। शरीर में प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन का स्‍तर बढ़ने की वजह से गैस ज्‍यादा बनने लगती है। ये हार्मोन गैस्‍ट्राइंटेस्‍टाइनल मार्ग की नरम मांसपेशियों को आराम पहुंचाने का काम करता है। इन मांसपेशियों के रिलैक्‍स होने पर खाना धीमी गति से पाचन तंत्र की ओर आ सकता है।

पाचन के धीमा पड़ने पर आंतों में गैस अधिक बनने लगती है। इसकी वजह से डकार आने, गैस पास होने और पेट फूलने की दिक्‍कत भी हो सकती है।
गर्भावस्‍था में गैस से बचना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि, कुछ आसान तरीकों से आप प्रेग्‍नेंसी में गैस ज्‍यादा बनने से जरूर रोक सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ गर्भावस्‍था में गैस बनने को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में आप नोट करें कि क्‍या खाने के बाद आपको ज्‍यादा गैस बनती है।

बींस, मटर और साबुत अनाज से गैस बन सकती है। इसके अलावा ब्रोकली, एस्‍पैरेगस, पत्तागोभी भी गैस बनाते हैं।
अमेरिकन प्रेग्‍नेंसी एसोसिएशन के अनुसार गर्भावस्‍था के दौरान गैस बनने से रोकने, कम करने और कंट्रोल करने के लिए नीचे बताए गए टिप्‍स असरकारी साबित हो सकते हैं :
कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक कम या बिल्‍कुल न पिएं।तली हुई और भारी चीजें खाने से बचें।हमेशा गिलास से पानी या अन्‍य कोई पेय पदार्थ पिएं।दिनभर में थोड़ा-थोड़ा कर के खाएं।कपड़े पेट पर से ज्‍यादा टाइट नहीं होने चाहिए।आर्टिफिशियल स्‍वीटनर का कम सेवन करें और खूब पानी पिएं।धीरे और चबा-चबाकर खाएं।
नारियल पानी
नारियल पानी में इलेक्‍ट्रोलाइट और एलकेलाइन खनिज पदार्थ जैसे कि पोटैशियम अधिक मात्रा में होते हैं। इस वजह से नारियल पानी पीएच के स्‍तर को संतुलित करता है और पेट में एसिड को नष्‍ट करने का काम करता है। ताजा नारियल पानी पीने से एसिडिटी से राहत दिलाता है और ये महिलाओं की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।

दही या दूध
दही या एक गिलास दूध से भी एसि‍डिटी दूर हो सकती है। गाय का दूध तुरंत एसिडिटी दूर कर सकता है। आप चाहें तो नट मिल्‍क, राइस मिल्‍क या बकरी का दूध भी पी सकती हैं। दूध को गर्म करके उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पी लें। इससे काफी हद तक सीने में जलन और एसिडिटी से राहत मिलती है।
Gas problem in Pregnancy : गर्भावस्था में गैस क्यों बनती है?

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प्रेग्‍नेंसी की पहली तिमाही में शरीर में बहुत ज्‍यादा हार्मोनल बदलाव आते हैं। प्रोजेस्‍टेरोन और एस्‍ट्रोजन हार्मोन तेजी से बढ़ता है जिससे भ्रूण के विकास के लिए यूट्राइन लाइनिंग मोटी होती है। एस्‍ट्रोजन के बढ़ने के कारण शरीर में पानी और गैस ज्‍यादा बनती है जिससे असहज और पेट में दर्द महसूस होता है।
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प्रेग्‍नेंसी की दूसरी तिमाही और गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में मॉर्निंग सिकनेस और थकान जैसे लक्षण कम होने लगते हैं और गर्भाशय विकसित हो रहे भ्रूण के लिए जगह बनाने लगता है। गर्भाशय के बढ़ने पर आसपास के अंगों पर दबाव पड़ता है जिससे कब्‍ज और ज्‍यादा गैस बनने जैसी पाचन से संबंधी दिक्‍कतें होने लगती हैं।
प्रेगनेंट महिलाओं के भी शरीर में गैस बनती है। शरीर में प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन का स्‍तर बढ़ने की वजह से गैस ज्‍यादा बनने लगती है। ये हार्मोन गैस्‍ट्राइंटेस्‍टाइनल मार्ग की नरम मांसपेशियों को आराम पहुंचाने का काम करता है। इन मांसपेशियों के रिलैक्‍स होने पर खाना धीमी गति से पाचन तंत्र की ओर आ सकता है।

पाचन के धीमा पड़ने पर आंतों में गैस अधिक बनने लगती है। इसकी वजह से डकार आने, गैस पास होने और पेट फूलने की दिक्‍कत भी हो सकती है।
गर्भावस्‍था में गैस से बचना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि, कुछ आसान तरीकों से आप प्रेग्‍नेंसी में गैस ज्‍यादा बनने से जरूर रोक सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ गर्भावस्‍था में गैस बनने को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में आप नोट करें कि क्‍या खाने के बाद आपको ज्‍यादा गैस बनती है।

बींस, मटर और साबुत अनाज से गैस बन सकती है। इसके अलावा ब्रोकली, एस्‍पैरेगस, पत्तागोभी भी गैस बनाते हैं।


अमेरिकन प्रेग्‍नेंसी एसोसिएशन के अनुसार गर्भावस्‍था के दौरान गैस बनने से रोकने, कम करने और कंट्रोल करने के लिए नीचे बताए गए टिप्‍स असरकारी साबित हो सकते हैं :
कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक कम या बिल्‍कुल न पिएं।तली हुई और भारी चीजें खाने से बचें।हमेशा गिलास से पानी या अन्‍य कोई पेय पदार्थ पिएं।दिनभर में थोड़ा-थोड़ा कर के खाएं।कपड़े पेट पर से ज्‍यादा टाइट नहीं होने चाहिए।आर्टिफिशियल स्‍वीटनर का कम सेवन करें और खूब पानी पिएं।धीरे और चबा-चबाकर खाएं।




एलोवेरा जूस
एलोवेरा का जूस प्रेग्‍नेंसी में एसिडिटी और एसिड रिफलक्‍स के लक्षणों का इलाज करता है। आप घर पर भी एलोवेरा जूस बना सकती हैं या बाजार से भी जूस लाकर पी सकती हैं।


च्‍युंइगम खाएं
खाना खाने के दस मिनट बाद च्‍युंइगम खाने से भी एसिडिटी से राहत पाने में मदद मिलती है। च्‍युंइगम सलाइवा के उत्‍पादन को उत्तेजित करती है जिससे पेट में एसिड नष्‍ट होता है प्रेगनेंसी में एसिडिटी से राहत मिलती है। च्‍युंइगम को ज्‍यादा देर तक न चबाएं वरना एसिड रिफलक्‍स की परेशानी हो सकती है। एसिडिटी कम करने के लिए च्‍युंइगम सबसे आसान उपाय है।

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