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इसी तरह जब प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है तो इससे ब्लीडिंग और खून के थक्के बनने लगते हैं। प्लेसेंटा से ही बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं इसलिए अगर इसे कोई नुकसान हुआ तो यह गंभीर समस्या होती है और इसका तुरंत इलाज करवाना चाहिए।
प्रेग्नेंसी एक ऐसा फेज है जिसमें महिलाओं को कई तरह के बदलावों से गुजरना पड़ता है। भावनात्मक और शारीरिक रूप से यह समय काफी मुश्किल होतिा है। इसलिए इस दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखना होता है।
गर्भावस्था के समय आपको अपने शरीर में दिख रहे हर तरह के बदलाव को नोटिस करना है। अगर आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है तो इसे इग्नोर न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं ताकि किसी भी तरह के जोखिम या जटिलता से बचा जा सके।
प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं को गर्भाशय में खून के थक्के जमने (blood clot in uterus pregnancy symptoms) की शिकायत भी हो सकती है। जब शरीर के किसी हिस्से को चोट जैसे कि कट या घाव होता है, तो उसमें ब्लीडिंग होने लगती है जिसके बाद खून के थक्के जम जाते हैं। इसी तरह जब प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है तो इससे ब्लीडिंग और खून के थक्के बनने लगते हैं।
लेसेंटा से ही बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं इसलिए अगर इसे कोई नुकसान हुआ तो यह गंभीर समस्या होती है और इसका तुरंत इलाज करवाना चाहिए। प्रेग्नेंसी में किसी भी समय यह खून के थक्के बन सकते हैं और डिलीवरी के दौरान भी ऐसा हो सकता है।
प्रेग्नेंसी में क्यों बनते हैं खून के थक्के
जब गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय की दीवार से प्लेसेंटा अलग हो जाता है तो गर्भाशय के अंदर खून के थक्के बनने लगते हैं। यदि किसी कार या सड़क दुर्घटना में पेट को चोट लगी हाे तो इस स्थिति में गर्भाशय में खून के थक्के बन सकते हैं।
हाई बीपी भी है वजह
हाई ब्लड प्रेशर वाली मांओं में भी इसका खतरा रहता है क्योंकि इससे गंभीर ब्लीडिंग हो सकती है।
आ सकती हैं जटिलताएं
ज्यादातर समय यूट्रॉइन क्लॉट्स गर्भाशय में अवशोषित हो जाते हैं या डिलीवरी तक शरीर में ही रहते हैं। अगर अल्ट्रासाउंड में प्रेग्नेंसी ठीक लग रही है, तो डरने की कोई बात नहीं है।
अगर प्रेग्नेंसी में गर्भाशय के अंदर खून के थक्के बन जाएं, तो इससे कुछ जटिलताएं भी आ सकती हैं जैसे कि हार्ट अटैक या मिसकैरेज। इसलिए अगर आपको गर्भावस्था में बहुत ज्यादा वैजाइनल ब्लीडिंग हो रही है, तो आपको इसके बारे में डॉक्टर को बताना चाहिए।
ट्रीटमेंट क्या है
ज्यादातर मामलों में डॉक्टर मां को आराम करने की सलाह देते हैं और कुछ हफ्तों तक मॉनिटर करते हैं कि थक्के का साइज बढ़ रहा है या नहीं और आगे इससे कोई जटिलता तो नहीं हो सकती है। कभी-कभी डिलीवरी के दौरान ही थक्के का पता चलता है। ऐसे मामलों में मां को अल्ट्रासाउंड करवाते रहना चाहिए ताकि पता चल सके कि खून का थक्का ठीक हो रहा है या नहीं।
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