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गर्भपात के कितने दिन बाद गर्भधारण की कोशिश कर सकती हूं? | When to conceive after an Abortion in Hindi

भले ही गर्भपात के बाद शारीरिक संबंध एक हफ्ते बाद से ही बनाए जा सकते हैं, लेकिन आप गर्भधारण करने में बिल्कुल भी जल्दबाजी न करें। इससे शरीर को काफी नुकसान पहुंचता है और शरीर की कमजोरी के कारण दोबारा गर्भपात का खतरा हो सकता है।

वैज्ञानिकों द्वारा हुए अध्ययन में कहा गया है कि अगर कम समय वाली गर्भावस्था समाप्त हुई है, तो गर्भपात के दो से तीन महीने में गर्भधारण कर सकते हैं। अगर लंबी प्रेगनेंसी में गर्भपात हुआ है, तो गर्भधारण करने के लिए एक साल का इंतजार जरूर करना चाहिए।
गर्भपात के बाद कमजोरी महसूस हो तो क्या करें? | Weakness after a Miscarriage in Hindi

गर्भपात के बाद कमजोरी बहुत होती है। महिला के योनि से होने वाला रक्तस्राव और शरीर में अंदरुनी रूप से चल रहे बदलाव के चलते यह कमजोरी होती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए पंजरी का सेवन महिलाएं कर सकती हैं। पंजीरी से कमजोरी व थकान दोनों कम होती है।

इसके अलावा, महिला को पूरी नींद लेनी चाहिए और भरपूर पानी व संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। इस समय भारी काम करने से पूरी तरह बचें। संभव हो तो एक-दो हफ्ते तक बेड रेस्ट करें।
गर्भपात के बाद खुद की देखभाल कैसे करें? | Abortion Ke Baad Care

गर्भपात के बाद खुद की देखभाल करना सबसे ज्यादा जरूरी है। महिला गर्भपात के बाद कैसे खुद का ख्याल रख सकती है, यह हम आगे बिंदुओं के माध्यम से बता रहे हैं।

समय-समय पर चेकअप करवाएं
पैड को लंबे समय तक पहनकर न रखें
खुद पर घर के सारे कामों का भार न आने दें
योनि वाले हिस्से को रोज दो-तीन बार साफ करें
ताजा फल सब्जियों के साथ ही सूखे मेवे भी खाएं
तीनों समय भोजन में संतुलित आहार को शामिल करें
डॉक्टर की सलाह पर हल्के व्यायाम व काम करती रहें
डॉक्टर द्वारा बताई गयी दवाओं का समय पर सेवन करें

एबॉर्शन के बाद क्या खाएं? | Abortion Ke Baad Kya Khaye in Hindi

मिसकैरेज व एबॉर्शन के बाद क्या खाएं, यह सवाल बहुत अहम है। महिला अपने खानपान का ध्यान रखकर गर्भपात से होने वाली कमजोरी से उबर सकती है।

आयरन – गर्भपात के बाद महिला का बहुत खून बह जाता है, इसलिए नए ब्लड सेल्स के लिए शरीर को आयरन की जरूरत होती है। इससे एनीमिया यानी खून की कमी से बचाव हो सकता है। आयरन के लिए महिला मटर, बीन्स, ओटमील, किशमिश, खुबानी, पालक आदि का सेवन करें।

विटामिन सी – आयरन को अवशोषित करने के लिए विटामिन-सी की आवश्यकता होती है, इसलिए संतरे, कीवी, टमाटर, ब्रोकली, ग्रेपफ्रूट, आदि का सेवन करें।

मैग्नीशियम – गर्भपात के बाद शरीर में मैग्नीशियम की सही मात्रा हो, तो मानसिक स्वास्थ्य सही रहता है। साथ ही महिला अवसाद से बच सकती है। इसके लिए केला, बादाम, काजू, साबुत अनाज, दूध, आदि को डाइट में शामिल करें। इसके साथ ही डार्क चॉकलेट का सेवन भी कर सकते हैं। ये सब गर्भपात के बाद घरेलू उपचार की तरह काम करते हैं।
गर्भपात के बाद डॉक्टर से जांच कब कराएं? | When to see a doctor after an Abortion in Hindi?

गर्भपात होते ही महिला को जांच करवानी चाहिए। सबसे पहले गर्भपात के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उसके बाद अगर इंफेक्शन होने के लक्षण दिखने लगे तो, जैसे कि बुखार होना और योनि से बदबू आना या फिर बहुत ज्यादा कमजोरी व लगातार भारी स्राव होना, आदि।
सारांश – Conclusion

गर्भपात के बाद सेहत से लेकर मूड को सामान्य होने में कुछ वक्त लगता है। भले ही सर्जिकल गर्भपात करवाया गया हो या स्वत: गर्भपात हुआ हो, यह समय महिला के लिए मुश्किल होता है। इस समय पुरुष पार्टनर की जिम्मेदारी होती है कि वो महिला की सेहत का ख्याल रखते हुए खानपान पर ध्यान दे और उन्हें समय-समय पर क्लिनिक चेकअप के लिए लेकर जाए। गर्भपात के कितने दिन बाद पीरियड आता है, इसे भी ट्रैक करें।

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