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गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ हैं
(a) यांत्रिक/भौतिक अवरोध,
(b) रासायनिक विधि,
(c) शल्य चिकित्सा विधि,
(d) अंतरा गर्भाशय (गर्भनिरोधक) यंत्र/उपकरण (IUD)

a..यांत्रिक/भौतिक अवरोध-(i) नर योनि में शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकने के लिए कंडोम (निरोध) का उपयोग करते हैं। ) मादाएँ डायाफ्राम या ग्रीवा टोपी का प्रयोग शुक्राणुओं के गर्भाशय तथा अंडवाहिनी में प्रवेश को रोकने के लिए करती हैं। मादा कंडोम बाजार में भी उपलब्ध हैं, लेकिन वे अभी इतने लोकप्रिय नहीं हैं। इसका कारण अज्ञानता तथा कमजोर आर्थिक स्थिति है।

(b) रासायनिक विधि-औरतें दो प्रकार की गोलियों का उपयोग करती हैं (i) मुख गोलियाँ ये गोलियाँ हॉर्मोन युक्त होती हैं जो अंडाशय से अंडोत्सर्ग (अंड/डिंब के मोचन) को रोकती हैं। उदाहरणमाला-डी, सहेली। (ii) योनि गोलियाँ इन गोलियों में रसायन होते हैं जो शुक्राणुओं को मार देते हैं।

(c) शल्य चिकित्सा विधि वैसेक्टॉमी (परुष नसबंदी) शक्रवाहिकाओं के एक छोटे से भाग को शल्य चिकित्सा द्वारा अलग कर देना वैसेक्टॉमी कहलाता है। शुक्रवाहिकाएँ वे नलिकाएँ होती हैं जो नरों में शुक्राणुओं को वृषण के माध्यम से मूत्रमार्ग तक लेकर जाती हैं। (ii) टयूबैक्टॉमी (महिला नसबंदी)-डिंबवाहिनी नलिकाओं के एक भाग को काटकर अलग कर देना टयूबैक्टॉमी कहलाता है। यह प्रक्रिया अंड/डिंब को आगे डिंबवाहिनी तथा गर्भाशय में जाने से रोकती है।


(d) अंतरा गर्भाशय (गर्भनिरोधक) यंत्र उपकरण-यंत्र जो कॉपर आयनों के स्रोत होते हैं, को मादा/महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है, जो निषेचित अंड या ब्लास्टुला को गर्भाशय में स्थापित होने से रोकते हैं

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