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गर्भ में शिशु का विकास (बच्चा केसे बनता है)

निषेचन के बाद महिला गर्भावस्था करती है और दृष्टिकोण से गर्भावस्था की प्रक्रिया शुरू होती है। जैसे-जैसे गर्भावस्था की अवधि बढ़ती जाती है वैसे-वैसे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास होता है। गर्भावस्था के पहले महीने में फर्टिलाइजेशन, ट्रांसप्लांट और भ्रूण का विकास शामिल है।


गर्भावस्था के पहले महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के पहले महीने में शिशु के चेहरे का विकास शुरू होता है। साथ ही, शिशु का निचला जबड़ा और गला भी बनना शुरू हो जाता है। इस दौरान रक्त की गेट बनने जा रहे हैं। साथ ही, रक्त संचार यानी ब्लड सर्कुलेशन शुरू हो जाता है।

गर्भावस्था के पहले महीने में गर्भ में पल रहे शिशु का आकार चावल के दाने से भी छोटा होता है और उसका दिल एक मिनट में लगभग 65 बार फहराता है।
गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु का शारीरिक रूप से विकास शुरू हो जाता है और उन्हें काफी कुछ महसूस होने लगता है। इस दौरान शिशु में हो रहे बदलाव को आप खुद में अनुभव कर सकते हैं। गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु का आकार लगभग 1.5 योज्य होता है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु में कुछ बदलाव होते हैं:-

हड्डी बनना
वजन बढ़ना
छत का निर्माण होना
आहार नालिका का विकास होना
हाथ, हाथ और जाल का बनना
न्यूरल ट्यूब का विकास होना
सिर, आंख और नाक का विकास होना


गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के दोसूरे महीने की तुलना में इस गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में तेजी आ जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में कई तरह के बदलाव होते हैं जैसे:-

दिल का दौरा
आकार 2.5 इंच होना
वजन बढ़ाएँ 20-30 ग्राम होना
टैग के निशान बनना
जबान और जबड़े का विकास होना
आंखें, किडनी और एक्सपोजर का विकास होना
मांसपेशियों और हड्डियों की रूपरेखा बनना
प्रमाणपत्र के रूप से त्वचा विकसित होना जिसके आर-पर न हों


गर्भावस्था के चौथे महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के चौथे महीने में शिशु गर्भ में घूमना और गिरना शुरू कर देता है। इस महीने में बेबी बंप भी पहले की तुलना में बड़ा हो जाता है और स्पष्ट दिखाई देता है। गर्भावस्था के चौथे महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में कई बलदाव आते हैं:-

शिशु का आकार लगभग 5.1 इंच होना
वज़न लगभग 150 ग्राम होना
इस महीने में शिशु लगभग 10 इंच लंबा हो जाता है
हड्डियों का ढांचा रबर की तरह लचीला होना
शरीर पर त्वचा की परत तैयार होना
नाखून बनना
त्वचा पर एक मोटी परत (वर्निक्स केसिओसा) बनती है
दोनों निकट होने वाले हैं
शिशु मां की आवाज सुन सकता है
व्हाइट ब्लड सेक्स करने लगते हैं


गर्भावस्था के पांच महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के पांचवे महीने में शिशु काफी हद तक विकसित हो जाता है। इस महीने में शिशु की लंबाई 6-10 इंच और उसका वजन लगभग 200-400 ग्राम हो जाता है। गर्भावस्था के पांचवे महीने में शिशु का स्वास्थ्य आपका जीवन और खान-पान पर कायम रहता है।

यही कारण है कि डॉक्टर एक्टिविटीज और स्वस्थ जीवन और आहार योग की सलाह देते हैं। गर्भावस्था के पांच महीने में शिशु में कुछ बदलाव आते हैं:-

सिगरेट का प्रिंट बनना
मसूड़ों के अंदर दांत बनना
चेहरा साफ दिखने लगता है
शिशु की आंखों को खोला जा सकता है
अंगाई और जम्हाई ले सकते हैं
शिशु के निप्पल दिखने शुरू हो जाते हैं
शिशु गर्भ में लात मार सकता है और घूम सकता है
हड्डियों और मांसपेशियों का विकास शुरू हो जाता है
त्वचा पर रक्त वाहिकाएं दिखना शुरू हो जाती है
लड़का होने पर अंडकोष और लड़की होने पर गर्भ बनना
दिमाग मजबूत और तेज होना


गर्भावस्था के छठे महीने में शिशु का विकास

छठे महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में कई तरह के बदलाव आते हैं। इस महीने में बच्चा हरकत करना शुरू कर देता है। शिशु बाहर की आवाजें सुन सकता है और प्रतिक्रिया भी दे सकता है। इस दौरान शिशु के लगभग सभी अंग विकसित हो जाते हैं। गर्भावस्था के छठे महीने में शिशु में कुछ बदलाव आते हैं:-

अंगूठा चुसना
संस्कृत लेना
त्वचा की सतह पर दिखना
तेजी से दिमाग विकसित होना
वास्तविक बाल और नाखून उगाना
सोना और जगने का एक सिद्धांत बनता है
शिशु के पेट में उसका पहला मल बनना
वज़न 500-700 ग्राम और चौड़ाई 10-15 इंच होना

गर्भावस्था के छठे महीने में शिशु खुद से सांस नहीं लेता है। इसलिए इस दौरान उनका जन्म (प्रीमैच्योर जन्म) होने पर उन्हें इन्क्यूबेटर में रखा जाता है।


गर्भावस्था के सातवे महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के सातवे महीने में शिशु लगभग 70% विकास कर चूका होता है। साथ ही, वह ध्वनि, संगीत या गंध के प्रति संवेदनशील हो जाता है। इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु में कई तरह के बदलाव आते हैं:-

पेट में झटका
अंगड़ाई और जम्हाई लेना
पलकें और बर्न बनना
आंखें खोलना और बंद करना
आवाज सुनकर उसकी प्रतिक्रिया देना
लंबाई लगभग 12-15 इंच होती है
वज़न लगभग 800-1000 ग्राम होता है


गर्भावस्था के आठवें महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के आठवें महीने में शिशु के विकास की आखिरी अवस्था होती है। इस दौरान शिशु जन्म लेने के लिए तैयार होता है। गर्भावस्था के आठवें महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में कई बदलाव होते हैं:-

सिर के बाल उगना
आंखें खोलना और बंद करना
पासवर्ड विकसित होने की अवस्था में हैं
पलकें और आंखें पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं
शिशु की लंबाई लगभग 12-14 इंच होती है
इस दौरान परिचित का विकास शुरू होता है

गर्भावस्था के आठवें महीने में शिशु का वजन बढ़ने के कारण गर्भ में कम जगह बचती है, इसलिए शिशु हिल-डुल का पता नहीं चलता। साथ ही, इस महीने के अंत तक शिशु का वजन 1-1.5 किलोग्राम हो जाता है।


गर्भावस्था के नौवें महीने में शिशु का विकास

यह गर्भावस्था का अंतिम चरण है जब शिशु जन्म लेने के लिए पूर्ण रूप से तैयार होता है। इस दौरान शरीर में हलचल बढ़ जाती है, इसमें बच्चे की पलकें झपकना, आंखें बंद करना और सिर कुजना आदि शामिल हैं।


गर्भ में बच्चे का पोषण कैसे होता है?

गर्भ में बच्चा एक पानी की जांच करता है जिससे नौ महीने तक उसका विकास होता है। शिशु जिस पानी में होता है उसे एमनियोटिक फ्लूइड कहते हैं। शिशु के विकास के लिए सभी आवश्यक चीजें जैसे कि पोषक तत्व, रक्त और ऑक्सीजन आदि को बच्चों तक पहुंचाया जाता है।

गर्भनाल वह नाल है जिससे शिशु और मां दोनों एक दूसरे से जुड़े होते हैं। मां जो चौपट-पीती है, शरीर में रक्त संचार होता है तो वह सभी उस नाल से बच्चे तक पहुंचती है जिससे किसी बच्चे का विकास होता है।


स्वस्थ बच्चे के लिए किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान?

एक गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए अपनी जीवनशैली और डाइट का खास ध्यान रखना होता है। स्वस्थ बच्चे के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

अधिक मात्रा में पानी पीएं
शराब और सिगरेट का सेवन न करें
मछली का सेवन न करें
संगृहीत पदार्थों का सेवन न करें
कच्चा मांस मजबूत
लाइटलाइट-फुल्की स्ट्रेचिंग करें
कैफीन से दूर रहें
फाइबर से भरपूर चीजों का दावा करें
हरी पत्तेदार लड़कियों के आहार में शामिल करें
कार्यक्षेत्र उत्पादों और साज-सज्जा को मनाएं
सूखा मेवा, अंडा और सब्ज़ी अनाज तैयार करें
अपने मन के अनुसार दवाओं का सेवन न करें
सुबह-शाम कुछ समय के लिए पैदल टहलें
फिटनेस बॉल के साथ स्क्वाट करें
थायरॉइड और गर्भावस्था की जांच करें
सेक्स रूटीन के बारे में डॉक्टर से बात करें
गर्भावस्था के नौ महीने में अधिक सतर्क हो जाएं
जब तक शिशु का जन्म नहीं होता तब तक अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें

गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की परेशानी या समानता का अनुभव होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।


माता पिता बनने की तैयारी

अगर आप माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं तो सबसे पहले आपको और आपके विवरण को मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। एक दूसरी बात करें, क्योंकि ऐसा समय है जब पति-पत्नी को एक दूसरे की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। यदि विशेषज्ञ आपके मन में किसी तरह का कोई प्रश्न है तो स्त्री रोग से परामर्श करें।


जल्दी गर्भवती होने के लिए क्या करना चाहिए?

अपनी जीवनशैली, खान-पान और दूसरी ज़रूरतों पर ध्यान देकर एक महिला गर्भवती होने से गर्भवती होने की संभावना बढ़ सकती है। यदि आप जल्दी प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, तो झिलमिलाहट हो सकती है:

अपने शरीर को स्वस्थ रखें
कब्जे का सेवन बंद कर दें
मात्रा में
नियमित रूप से व्यायाम करें
प्रेगनेंसी और पितृत्व से संबंधित पुस्तकें पढ़ें
तनाव और अवसाद से दूर रहें
भरपुर मात्रा में पानी पीएं
नियमित रूप से ध्यान और योग करें
अपने सोने और घबराहट का समय निर्धारित करें
शराब, सिगरेट या दूसरी आँखों से दूरियाँ
नियमित रूप से सेक्स करें (उत्तेजना की भावुकता के साथ सेक्स करें)
नियमित रूप से आपके पति या भागीदार और अपना निकाय चेकअप करें ताकि समय पर आंतरिक रूप से पता लगाने पर उनकी उचित जांच हो सके और इलाज किया जा सके

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