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1. स्वस्थ व पौष्टिक आहार का सेवन करें
पौष्टिक आहार आपके परिवार की सेहत के साथ-साथ आपकी प्रजनन क्षमता में सुधार लाने का आसान तरीका है।

स्वस्थ आहार वह होता है जिसमें ट्रांस या सैचुरेटेड फैट, प्रोसेस्ड भोजन, लाल रंगत वाला मांस, मिठाइयां और मीठे पेय की मात्रा कम हो।

कोशिश करें कि आप इंद्रधनुष के सभी रंगों वाले मौसमी फल और सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। इस तरह आपको अपने भोजन से अलग-अलग तरह के पोषक तत्व मिल सकेंगे।

अभी से सेहतमंद आहार के सेवन की आदत डाल लेने से गर्भावस्था के दौरान आपके शिशु को भी जरुरी पोषण मिल सकेगा। गर्भस्थ शिशु विकसित होने के लिए माँ के खून में मौजूद पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। ये पोषक तत्व आपको भोजन से ही मिलते हैं।
2. प्रसवपूर्व सप्लीमेंट लेना शुरु करें
हालांकि, आपको जरुरी अधिकांश पोषक तत्व स्वस्थ आहार से मिल जाएंगे, मगर कुछ ऐसे अनुपूरक (सप्लीमेंट) हैं जिन्हें गर्भाधान के प्रयासों के बीच लेने की सलाह दी जाती है:

फॉलिक एसिड
ओमेगा 3 फैट्टी एसिड (विशेषतौर पर शाकाहारियों के लिए क्योंकि ओमेगा 3 फैट्टी एसिड के मुख्य स्त्रोत मछली और समुद्री भोजन होता है)।

यदि आपके शरीर में निम्न पोषक तत्वों की कमी हो, तो डॉक्टर इनके अनुपूरक लेने की सलाह दे सकती हैं:

आयरन
विटामिन बी 12
कैल्शियम

अपनी डॉक्टर से इन सप्लीमेट की उचित मात्रा के बारे में पता करें, क्योंकि आपकी सेहत और खान-पान की आदतों के आधार पर डॉक्टर इनकी उचित खुराक बताएंगी।

फॉलिक एसिड सप्लीमेंट केवल गर्भधारण के प्रयासों के दौरान ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान भी लेने की सलाह दी जाती है। यह शिशु में स्पाइना बिफिडा (न्यूरल ट्यूब से जुड़ा दोष) के खतरे को कम करता है।
3. कैफीन का सेवन कम करें
हालांकि, इस बारे में एक राय नहीं है कि कैफीन के सेवन से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है या नहीं, मगर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत अधिक मात्रा में कैफीन के सेवन से गर्भधारण में देरी हो सकती है।

अधिकांश डॉक्टर सलाह देते हैं कि आपको प्रतिदिन 200 मि.ग्रा. से ज्यादा कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसका मतलब है कि एक दिन में करीब दो कप इंस्टेंट कॉफी या चार कप चाय से ज्यादा का सेवन नहीं करना चाहिए। याद ​रखिए कि कई सॉफ्ट ड्रिंक्स में भी कैफीन होती है।

एक दिन में 200 मि.ग्रा. कैफीन का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है। इससे अधिका मात्रा आपके गर्भस्थ शिशु को स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।
4. सही वजन बनाए रखने पर ध्यान दें
वजन चाहे सामान्य से कम हो या ज्यादा, दोनों ही स्थितियों में हॉर्मोनों के असंतुलन की समस्या हो सकती है। इससे आपको डिंबोत्सर्जन में दिक्कत आ सकती है, जिसका असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। इससे गर्भावस्था में जटिलताएं होने का खभी खतरा बढ़ सकता है।

पुरुषों में, यदि वजन सामान्य से कम या ज्यादा हो तो इसका असर शुक्राणु की मात्रा और गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिससे उनकी फर्टिलिटी कम हो जाती है।

आप और आपके पति दोनों का ही वजन यदि सही स्तर पर पहुंच जाए तो इससे प्रजनन क्षमता और हर महीने कंसीव करने की संभावना बढ़ सकती है। हमारे बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) कैलकुलेटर के इस्तेमाल से आप पता कर सकती हैं कि आपके लिए उचित वजन क्या होगा।

अगर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है और माहवारी भी अनियमित रहती है, तो 10 से 20 प्रतिशत वजन कम करने से आपको माहवारी चक्र नियमित करने में मदद मिल सकती है। इससे आपके गर्भधारण करने की संभावना बढ़ सकती है।

कोशिश करें कि आप एकदम से वजन कम न करें, क्योंकि इससे शरीर का पोषण संग्रह घट सकता है। कोशिश करें कि आप एक हफ्ते में 0.5 से 1 किलो वजन कम करें। य​ह वजन कम करने की सुरक्षित दर है।

यदि आपका वजन सामान्य से कम है, तो कोशिश करें कि अपना कुछ किलो वजन बढ़ाएं। वजन कम होने का असर ओव्यूलेशन पर पड़ सकता है और गर्भधारण कर लेने पर गर्भपात होने का भी उच्च जोखिम रहता है।

जिस तरह वजन ज्यादा होने पर इसे कम करने के लिए अचानक खाना-पीना बंद करना सही नहीं है, उसकी तरह वजन बढ़ाने के लिए अचानक से अधिक मात्रा में मीठे, वसायुक्त भोजन का सेवन करना भी सही नहीं है। इस तहर के भोजनों से आपको जरुरी विटामिन और खनिज (मिनरल्स) नहीं मिलते। कोशिश करें कि आप सेहतमंद भोजन विकल्पों के जरिये अतिरिक्त कैलोरी पाएं, जैसे कि खजूर, मेवा, केला और मक्खन फल (एवोकाडो)।
5. तनाव कम करने की कोशिश करें
तनाव की वजह से आपकी या आपके पति की संभोग की इच्छा (सेक्स ड्राइव) कम हो सकती है और शायद आप कम बार प्रेम संबंध बनाएं। हालांकि अभी यह बात पूरी तरह साबित नहीं हुई है कि तनाव का असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है, और इस बारे मे अध्ययन करना भी मुश्किल हो क्योंकि तनाव व्यक्तिनिष्ठ है। बहरहाल, यदि आप सकारात्मक रहेगी तो आप खुश भी रहेंगी।

गर्भधारण न कर पाना अपने आप में तनाव का एक बहुत बड़ा कारण है। ऐसे में अपनी स्थिति और मन की बात किसी विश्वसनीय व्यक्ति के साथ साझा करने से मदद मिल सकती है। गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं की वजह से अकेलापन भी महसूस हो सकता है, क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसपर लोग अपने परिवार या दोस्तों के साथ चर्चा करना चाहेंगे।

सहयोग के लिए ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़े जिसके साथ आप अपनी चिंताओं और डर को साझा कर सकें। आप प्रोफेशनल कांउसलर की मदद ले सकती हैं या फिर ऐसे व्यक्ति से बात करें जिनके साथ आप सहज महसूस करें। अपनी परेशानियों को साझा करने से आपको भी बेहतर महसूस होगा।

अपने तनाव के अन्य कारणों के बारे में भी सोचें और हल निकालने की कोशिश करें। एंडोर्फिन, जिन्हें हैप्पी हॉर्मोन भी कहा जाता है, आपके तनावमुक्त महसूस करने में मदद कर सकते हैं। यह हॉर्मोन आपके मस्तिष्क में विभिन्न क्रियाकलापों के दौरान जारी होता है, जैसे कि एक्सरसाइज, ध्यान (मेडिटेशन), हंसना आदि। वास्तव में आप ऐसा कुछ करें जिससे आपको ​खुशी मिले और आप उसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।
6. रोजाना एक्सरसाइज करें
आपको शायद यह जानकर हैरानी हो, मगर हल्के और नियमित व्यायाम करने से आपको जल्द गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है। सामान्यत: जो दं​पत्ति ज्यादा क्रियाशील रहते हों, वो कोई एक्सरसाइज न करने वाले दंपत्ति की तुलना में जल्दी गर्भधारण कर लेते हैं।

एक्सरसाइज से ही आप अपनी सही वजन पा सकेंगी और तनाव को कम कर सकेंगी। जिन महिलाओं की माहवारी अनियमित रहती है, उन्हें व्यायाम करने से डिंबोत्सर्जन नियमित होने में मदद मिलती है। इन सभी तरीकों से आपकी फर्टिलिटी और सेहत भी बेहतर होती है।

अभी से व्यायाम की दिनचर्या बना लेने से आपके शरीर को गर्भावस्था और डिलीवरी के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी। हो सकता है आपको लगे कि इसमें अभी काफी समय है, मगर याद रखें कि शरीर को ताकत और स्टेमिना बनान के लिए समय लगता है।

कठिन परिश्रम वाले व्यायाम न चुनें। बहुत ज्यादा व्यायाम करने से वास्तव में आपकी प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। व्यायाम के कुछ अच्छे विकल्पों में शामिल हैं वॉक करना, तैरना, साइकल चलाना, योग और पिलाटे करना।
7. कुछ समय के लिए शराब का सेवन बंद कर दें
शराब का सेवन कम करने या पूरी तरह से बंद करने से आपको शीघ्र गर्भवती होने में मदद मिल सकती है।

सीमित मात्रा में पीना (एक दिन में महिला के लिए एक ड्रिंक और पुरुष के लिए दो ड्रिंक) सुरक्षित माना जाता है। मगर, सीमित मात्रा में पीने से भी प्राकृतिक ढंग से कंसीव करने में समय लग सकता है। शसीमित मात्रा से ज्यादा शराब का सेवन करने से महिलाओं में ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्याएं और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित होती हैं।

यदि आप प्रजनन उपचार ले रही हैं, तो सीमित मात्रा में भी शराब का सेवन उपचार की सफलता को प्रभावित कर सकता है।

अधिकांश डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्भधारण का प्रयास करने वाले दंपत्ति को पूरी तरह से शराब का सेवन छोड़ देना चाहिए। यह केवल अस्थाई समय के लिए है और इससे आपको जल्द गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह जान पाना असंभव है कि गर्भाधान वास्वत में कब होगा और आपके खून में मौजूद शराब गर्भाशय में भ्रूण तक पहुंच सकती है। गर्भावस्था में भी शराब का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता।
8. धूम्रपान करना छोड़ दें
धूम्रपान करने से महिला और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी कम होती है।

पुरुषों में, धूम्रपान करने से शुक्राणु की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचता है, जिससे निषेचन और मुश्किल हो जाता है। इसकी वजह से इरेक्टाइल विकार भी हो सकता है।

महिलाओ में, धूम्रपान करने से डिंब तेजी से कम होते जाते हैं, जिससे रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) धूम्रपान कर करने वालों की तुलना में एक से चार साल पहले शुरु हो सकती है। यदि आप गर्भधारण के लिए प्रजनन उपचारों की मदद ले रही हैं, तो धूम्रपान की वजह से उपचार इतना प्रभावी नहीं रहेगा।

दोनों में से किसी के भी धूम्रपान करने से गर्भावस्था की पहली​ तिमाही में गर्भपात होने का खतरा बढ़ सकता है। यदि गर्भावस्था जारी रहती है तो भी धूम्रपान (प्रत्यक्ष या परोक्ष) का गर्भस्थ शिशु की सेहत पर हानिकारक असर हो सकता है।

इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि आप या आपके पति धूम्रपान करते हैं, तो इसे बंद करने की कोशिश करें। ऐसा करने के स्वास्थ्य संबंधी बहुत से फायदे हैं, मगर इससे आपकी प्रजनन क्षमता जल्द बेहतर होगी और आपके और आपके परिवार की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।

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