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क्रोध अहंकार के गर्भ से पैदा होता है जो मूढ़ता से बढ़ता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है । यह मन में बुरे विचारों और भावों को जन्म देता है जिसके फलस्वरुप द्वेष, घृणा, वैमनस्य, दुःख, अभिमान आदि उत्पन्न होते हैं ।

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