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इसमें पेशेंट खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाता. ऐसे पेशेंट्स आमतौर पर किसी फोबिया, सेल्फ डिसिप्लिन की कमी या डिप्रेशन जैसी समस्याओं से परेशान होते हैं. हिस्टीरिया अधिकतर एडोलसेंस एज में होता है. वैसे तो इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन इस डिसऑर्डर को घरेलू इलाज द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है.
हिस्टीरिया के घरेलू इलाज जान लीजिए
हिस्टीरिया के पेशेंट्स को एक कंप्लीट न्यूट्रिशियस डाइट की आवश्यकता होती है. उन्हें सेब,अंगूर, संतरा, पपीता और अनानास जैसे फलों का अधिक सेवन कराना चाहिए. जिन्हें हिस्टीरिया का अटैक बार-बार आता हो उन्हें लगभग एक महीने के लिए दूध वाली डाइट का सेवन करना चाहिए. हिस्टीरिया के पेशेंट्स के लिए डेली एक चम्मच शहद का सेवन फायदेमंद होता है. हींग को अपनी डाइट में नियमित रूप से शामिल करें. डाइट में डेली 0.5 से 1.0 ग्राम हींग लेनी चाहिए. जिन लोगों को हींग से एलर्जी होती है वह इसे सूंघ भी सकते हैं. एक गिलास दूध में एक ग्राम राउवोल्फिया की जड़ मिलाएं. इस दूध का सेवन दिन में दो बार करें. यह बहुत ही इफेक्टिव तरीका है हिस्टीरिया को कंट्रोल करने का. हिस्टीरिया के पेशेंट्स के इलाज में प्रॉपर नींद और नियमित एक्सरसाइज फायदेमंद होती है. जिस वक्त हिस्टीरिया का अटैक आता है उस समय लौकी को कद्दूकस करके पेशेंट के माथे पर लगाएं. इससे काफी आराम मिलता है.
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