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सी-सेक्शन (सिजेरियन) डिलिवरी से जुड़ी ये 7 बातें हैं झूठ, जानें उनका सच
इन दिनों सिजेरियन यानी सी-सेक्शन डिलिवरी की तादाद भले ही बढ़ गई हो लेकिन अब भी लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। बहुत से लोग ऑपरेशन से बच्चा पैदा करने को सही मानते। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं सी-सेक्शन से जुड़े उन मिथकों के बारे में जिनमें कोई सच्चाई नहीं है।
सिजेरियन डिलिवरी जिसे आम बोलचाल की भाषा में सी-सेक्शन या ऑपरेशन से बच्चा पैदा करना भी कहा जाता है, इन दिनों काफी पॉप्युलर हो गया है। WHO के आंकड़ों की मानें तो भारत में हर साल करीब 17 से 18 प्रतिशत डिलिवरी सी-सेक्शन डिलिवरी होती है। पहले जहां सिर्फ किसी तरह का कॉम्प्लिकेशन या हेल्थ से जुड़ी समस्या होने पर ही डॉक्टर सी-सेक्शन किया करते थे, वहीं अब तो हेल्दी महिलाएं भी नॉर्मल और नैचरल डिलिवरी के दौरान होने वाले दर्द से बचने के लिए सी-सेक्शन को ही चुन रही हैं। बावजूद इसके बहुत से लोग अब भी सिजेरियन डिलिवरी को सही नहीं मानते और इसे लेकर उनके मन में कई तरह का भ्रम होता है। आज हम आपको बता रहे हैं सी-सेक्शन से जुड़ी उन 7 बातों के बारे में जिनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।
1. मिथक: सी-सेक्शन डिलिवरी में बिलकुल दर्द नहीं होता
हकीकत: सिजेरियन या सी-सेक्शन डिलिवरी से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक यही है कि इस दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता। आप नॉर्मल डिलिवरी करवाएं या फिर सी-सेक्शन, बच्चे को जन्म देने में दर्द होता ही है। डॉक्टरों की मानें तो चूंकि ऑपरेशन के दौरान आपको ऐनेस्थिसिया दिया जाता है इसलिए उस दौरान आपको भले ही दर्द महसूस ना हो लेकिन एक बार ऐनेस्थिसिया का असर खत्म हो जाता है उसके बाद आपको दर्द, तकलीफ और असहजता महसूस होती है जो करीब 10-15 दिनों तक रहता है।
2. मिथक: सी-सेक्शन डिलिवरी, डिलिवरी नहीं है
हकीकत: गाइनैकॉलजिस्ट डॉ जयंती कामत कहती हैं कि बहुत से लोगों के मन में ये भ्रम होता है कि चूंकि सी-सेक्शन में ऑपरेशन से बच्चे का जन्म हुआ है इसलिए महिला की डिलिवरी तो हुई ही नहीं। लेकिन ये बात पूरी तरह से गलत है क्योंकि जब बच्चा महिला के शरीर से बाहर आया तो महिला की डिलिवरी हुई। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि डिलिवरी वजाइना के जरिए नॉर्मल तरीके से हुई या फिर यूट्रस में चीड़ा लगाकर ऑपरेशन के जरिए।
3. मिथक: सी-सेक्शन डिलिवरी सेफ नहीं होती
हकीकत: इसमें कोई शक नहीं कि सी-सेक्शन या सिजेरियन डिलिवरी एक बड़ी सर्जरी होती है जिसमें पेट का ऑपरेशन करके यूट्रस से बच्चे को बाहर निकाला जाता है। इन दिनों सी-सेक्शन के इतने ज्यादा केसेज हो रहे हैं कि डॉक्टर्स भी इस दौरान पूरी सावधानी बरतते हैं और यह पूरी तरह से सेफ भी है। डिलिवरी के बहुत से केसेज में तो सी-सेक्शन बेहद जरूरी हो जाता है और यह मां और बच्चे दोनों की लाइफ बचाने का काम करता है। अगर डॉक्टर आपको इससे जुड़े सभी तरह के रिस्क के बारे में पहले ही बता देते हैं तो सी-सेक्शन डिलिवरी सेफ मानी जाती है।
4. मिथक: सी-सेक्शन के बाद ब्रेस्टफीडिंग में होती है दिक्कत
हकीकत: आपकी डिलिवरी कैसे हुई है, नॉर्मल या ऑपरेशन से इस बात का आपकी ब्रेस्टफीडिंग करवाने की क्षमता पर किसी तरह का कोई असर नहीं होता। इन दिनों ज्यादातर हॉस्पिटल्स में सी-सेक्शन डिलिवरी के लिए जनरल ऐनेस्थिसिया की जगह एपिड्यूरल ऐनेस्थिसिया दिया जाता है। इसलिए सी-सेक्शन के बाद आप भी नॉर्मल डिलिवरी वाली महिलाओं की ही तरह बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा सकती हैं।
5. मिथक: एक बार सी-सेक्शन हो जाए फिर कभी नॉर्मल डिलिवरी नहीं हो सकती
हकीकत: आमतौर पर महिलाओं के मन में यही डर रहता है कि अगर एक बार उनकी सिजेरियन डिलिवरी हो गई तो उसके बाद दूसरी डिलिवरी भी उनकी सी-सेक्शन ही होगी। लेकिन यह बात भी पूरी तरह से सच नहीं है। सिजेरियन के बाद वजाइनल बर्थ करना है या नहीं इसका फैसला कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। जैसे- सी-सेक्शन के दौरान कितने टांके लगे थे, कितनी बार सी-सेक्शन हो चुका है, किसी तरह की कोई मेडिकल कंडिशन है या नहीं आदि। लेकिन ये नामुमकिन नहीं है। सी-सेक्शन के बाद भी नॉर्मल डिलिवरी हो सकती है।
6. मिथक: सी-सेक्शन का मां और बच्चे की सेहत पर असर
हकीकत: नॉर्मल डिलिवरी के बाद मां की रिकवरी जल्दी हो जाती है लेकिन सी-सेक्शन में चूंकि मेजर सर्जरी होती है और टांके लगे होते हैं इसलिए रिकवरी में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। लेकिन सिजेरियन डिलिवरी करवाने की वजह से मां या बच्चे की सेहत पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि सी-सेक्शन के बाद अगर नई मां अपनी रिकवरी का पूरा ध्यान न रखे तो उन्हें आगे चलकर सेहत से जुड़ी कुछ दिक्कतें हो सकती हैं।
7. मिथक: सी-सेक्शन में मां और बच्चे की बॉन्डिंग नहीं हो पाती
हकीकत: ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि चूंकि महिला ने नैचरल तरीके से बच्चे को जन्म नहीं दिया है और ऑपरेशन से डिलिवरी हुई है इसलिए मां और बच्चे के बीच बॉन्डिंग डिवेलप नहीं हो पाती। लेकिन यह बात सच नहीं है। सी-सेक्शन के बाद भी मां की बच्चे के साथ बॉन्डिंग उतनी ही स्ट्रॉन्ग होती है जितनी नॉर्मल डिलिवरी में।
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