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सर्दियों की कई बीमारियों का इलाज है लौंग का तेल, जानें उपयोग की सही विधि
Benefits of Clove Oil: सर्दी के मौसम में एक छोटी-सी शीशी क्लोव ऑइल यानी लौंग के तेल की अपने घर में जरूर रखें. कई मौसमी बीमारियों से यह आपको राहत दिलाएगा. इसका उपयोग कैसे करना है,
How to use Clove Oil: भारतीय रसोई में लौंग का उपयोग प्रमुखता से किया जाता है. पुलाव, भरवा सब्जी, काढ़ा इत्यादि के साथ ही पूजा और हवन के दौरान लौंग का उपयोग जरूर किया जाता है. क्योंकि लौंग एक औषधि भी है, मसाला भी और हवन सामग्री भी. इससे आप समझ सकते हैं कि आखिर इतनी जगह उपयोग का अर्थ साफ है कि लौंग में बहुत सारे गुण होते हैं. लौंग के उपयोग के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं. लेकिन लौंग के तेल के उपयोग के बारे में बहुत कम लोगों को पता है. इसलिए यहां आपको लौंग के तेल के उपयोग के बारे में बताया जा रहा है. खासतौर पर सर्दियों में आप इसका उपयोग करके कैसे निरोग रह सकते हैं, यहां जानें...
लौंग के तेल में कौन-से गुण होते हैं?
ऐंटिफंगल गुणों से भरपूर होता है
ऐंटिवायरल गुण होते हैं
ऐंटिसेप्टिक होता है
आयरन
फॉस्फोरस
सोडियम
पोटैशियम
विटामिन-ए और सी से युक्त होता है.
किन बीमारियों में काम आता है लौंग का तेल?
दांत दर्द में सबसे अधिक उपयोग होता है.
खांसी से राहत दिलाता है
सिरदर्द में तुरंत आराम देता है
स्ट्रैस दूर करने में सहायक है
अस्थमा के रोगियों के लिए फायदेमंद है
अपच की समस्या को दूर करता है
स्किन एलर्जी में राहत देता है
पिंपल्स जल्द ठीक करता है
सांस संबंधी समस्या में लाभ देता है
जोड़ों के दर्द में आराम देता है
लौंग का तेल उपयोग करने की विधि
दांत दर्द और भोजन में उपयोग के अतिरिक्त जब भी आप लौंग के तेल का यूज करें तो इसे अकेले उपयोग ना करें. क्योंकि यह बहुत अधिक क्रियाशील होता है और तुरंत रिऐक्शन भी करता है. इसलिए उपयोग करते समय सावधानी बरतने की जरूरत होती है और सही जानकारी जुटाने की भी.
दांत दर्द में लौंग का तेल उपयोग करने के लिए रुई के फोहे पर लौंग तेल लगाएं और इसे दांत में लगा लें.
खाने में इस तेल का उपयोग करते हुए भोजन पकने के बाद ऊपर से कुछ ड्रॉप डालें और फिर 5 से 7 मिनट के लिए ढंक दें.
गले में दर्द होने पर एक बूंद लौंग का तेल दो बूंद बादाम तेल या ऑलिव ऑइल के साथ मिलाकर गले पर मसाज करें.
सीने में जकड़न होने पर भी लौंग तेल को बादाम, ऑलिव ऑइल या नारियल तेल के साथ मिलाकर मसाज करें. ध्यान रखें कि जितनी ड्रॉप लौंग का तेल लें, उससे दोगुनी ड्रॉप दूसरे तेल की लें.
लौंग तेल को सरसों तेल के साथ मिलाकर त्वचा पर उपयोग ना करें. क्योंकि ये दोनों ही तेल बहुत अधिक गर्म होते हैं इसलिए इन्हें मिलाकर स्किन पर लगाने से रिऐक्शन का खतरा रहता है.
सांस लेने में दिक्कत हो या फिर जुकाम के कारण आपको समस्या हो रही हो तो आप इस तेल की भाप भी ले सकते हैं. हालांकि यह गले और सीने पर लगाने से ज्यादा लाभ देता है.
यदि आपके कहीं खुजली या रैशेज की समस्या हो गई है तो आप बादाम तेल के साथ इसे मिक्स करके उस जगह पर लगा सकते हैं.
पिंपल निकलने पर भी आप इस तेल का उपयोग करके पिंपल को बढ़ने से रोक सकते हैं. इसके लिए इयर बड की मदद से बहुत थोड़ा-सा लौंग का तेल सीधे पिंपल पर लगा लें. दिन में सिर्फ दो बार ही उपयोग करें. पिंपल 2 से 3 दिन में पूरी तरह ठीक हो जाएगा.
किन्हें नहीं करना चाहिए लौंग तेल का उपयोग?
अगर आपको एनाफिलेक्सिस से समस्या है तो इसका उपयोग ना करें.
यदि आपकी स्किन बहुत अधिक सेसेंटिव है तो लौंग तेल का उपयोग ना करें.
यदि आपको ब्लीडिंग संबंधी डिसऑर्डर है तो लौंग तेल का उपयोग करने से बचें.
यदि आपको लो ब्लड प्रेशर या लो ब्लड शुगर की समस्या है तो आपको भोजन में लौंग के तेल का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए.
बिना डायल्यूट किए यानी बिना पानी में मिलाए या भोजन में अधिक मात्रा में लौंग के तेल का उपयोग करने से घबराहट, मितली आना, उल्टी होना, गले में जलन या सांस संबंधी समस्या हो सकती है.
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