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इसमें आर्थोस्कोप के जरिए जो भी लिगामेंट टूट गया है, उसे रिपेयर कर दिया जाता है या फिर उसका दोबारा रिकंस्ट्रक्शन कर दिया जाता है. आर्थोस्कोपिक विधि ने टूटे-फूटे घुटनों की सर्जरी को आसान बना दिया है. आमतौर पर 45 साल से कम उम्र के लोगों में इस सर्जरी के सफल होने की ज्यादा संभावना होती है.

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