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तुरंत मिले इलाज तो लकवा हो सकता है बिल्कुल ठीक
अगर किसी व्यक्ति को स्ट्रोक, ब्रेन अटैक या लकवा मार जाए तो उस व्यक्ति के लिए शुरुआती साढ़े 4 घंटे बेहद अहम होते हैं क्योंकि अगर इस 4 घंटे के अंदर उसे इलाज मिल जाए तो व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो सकता है। जितनी देर होगी समस्याएं उतनी ज्यादा बढ़ेंगी।
स्ट्रोक होने पर शुरुआती 4 घंटे हैं सबसे अहम
स्ट्रोक यानी लकवा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज का मुंह तिरछा हो जाता है, हाथ बेजान हो जाते हैं। जुबान लड़खड़ाने लगती है या आवाज पूरी तरह चली जाती है। ऐसा होने पर समय रहते इलाज न मिले तो परिणाम घातक हो सकते हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल में इसका इलाज ही नहीं है। यहां स्ट्रोक यूनिट तक नहीं है। जहां डॉक्टर हैं, वहां सिटी स्कैन नहीं और जहां सिटी स्कैन की लैब है, वहां डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। इस बारे में सिविल सर्जन जेएस पूनिया ने बताया कि स्ट्रोक, हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर और कैंसर के मरीजों को नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी) के तहत इलाज दिया जाता है। सेक्टर-10 सिविल हॉस्पिटल के मेडिसिन वॉर्ड में रेड कैटिगरी के मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए है। जहां उनका इलाज होता है, लेकिन हकीकत में मेडिसन वॉर्ड की हालत खस्ता है।
शुरुआती 4 घंटे हैं सबसे अहम
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सिविल हॉस्पिटल के वरिष्ठ फिजिशियन नवीन कुमार बताते हैं कि अगर लकवे को शुरुआत में ही पहचान कर इलाज दे दिया जाए, तो प्रभावित लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसका असरदार इलाज मौजूद है। लक्षण दिखने के शुरुआती साढ़े चार घंटे में इलाज शुरू हो जाए तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। जितनी जल्दी क्लॉट खत्म करने की दवा दे दी जाएगी, उतना ही बेहतर परिणाम मिलेगा। लकवा होने से कई बार ब्रेन अटैक भी हो सकता है। खून के थक्के दिमाग तक ब्लड पहुंचाने में रुकावट डालते हैं। दिमाग को ऑक्सिजन और पोषण नहीं मिल पाता। आर्टिमिस हॉस्पिटल के न्यूरो इंटरवेंशन निदेशक विपुल गुप्ता बताते हैं कि उच्च रक्तचाप, डायबीटीज और कलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर इसके प्रमुख कारण हैं।
लकवे का क्या है इलाज
सिविल हॉस्पिटल के योग विशेषज्ञ भूदेव बताते हैं कि नियमित व्यायाम करने से स्ट्रोक से बचा जा सकता है। प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, ताड़ासन, कोणासन, गोमुखासन आदि नियमित करने से काफी हद तक बचाव होता है। इसके अलावा, जो लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, उन्हें फिजियोथेरपी के साथ धीरे-धीरे अनुलोम विलोम और गर्दन और कंधे के हल्के व्यायाम करने चाहिए।
यह है नहाने का गलत तरीका, हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक या लकवा
अगर आप सोचते हैं कि नहाने का सही या गलत तरीका क्या हो सकता है... जिसे जैसे मन करे वैसे नहा सकता है। अगर आपकी सोच भी कुछ ऐसी ही है तो आप गलत हैं। खाने-पीने और सोने की ही तरह नहाने का भी एक सही तरीका है जिसे अगर फॉलो न किया जाए तो नहाते वक्त लकवा मारने या फिर ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। इस तरह की जानलेवा चीजों से बचने के लिए जानें, क्या है नहाने का सही तरीका...
बहुत से लोगों को आदत होती है कि वे बाथरूम में पहुंचते ही सीधे शावर के नीचे खड़े हो जाते हैं या फिर बाल्टी और मग से सीधे सिर पर पानी उड़ेलने लग जाते हैं। यह नहाने का पूरी तरह से गलत तरीका है और इससे ही स्ट्रोक समेत कई दूसरे खतरे सामने आ सकते हैं।
दरअसल, हमारे शरीर में खून का प्रवाह ऊपर से नीचे की तरफ होता है। ऐसे में अगर आप सीधे सिर पर ठंडा पानी डालकर नहाएंगे तो सिर में मौजूद खून की नलिकाएं सिकुड़ने लगेंगी या खून के थक्के जमने लगेंगे। इसलिए नहाते वक्त सिर से पानी डालने की शुरुआत न करे।
सिर पर सीधे पानी डालने से हमारा सिर ठंडा होने लगता है, जिससे हार्ट को सिर की तरफ ज्यादा तेजी से खून भेजना पड़ता है, जिससे या तो हार्ट अटैक या दिमाग की नस फटने की दिक्कत हो सकती है।
ऐसे में नहाने की शुरुआत पैरों से करें। पैर के पंजो पर पानी डालने से शुरुआत करें। इसके बाद जांघ, पेट, हाथ, कंधे से होते हुए सबसे आखिर में सिर पर पानी डालें।
इतना सब करने के बाद आप चाहें तो शावर के नीचे खड़े होकर या बाल्टी से पानी सिर पर उड़ेलकर नहा सकते हैं। इस प्रक्रिया में केवल 1 मिनट का वक्त लगता है।
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