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मॉर्निंग सिकनेस क्या होती है? जानें कारण, लक्षण और बचाव के लिए 5 घरेलू उपाय
मॉर्निंग सिकनेस का कारण: मॉर्निंग सिकनेस प्रेगनेंसी के अलावा हार्मोनल परिवर्तन के कारण भी होता है। तो, कई बार ये थायराइड और यहां तक कि लिवर से जुड़ी बीमारियों के कारण भी हो सकता है। आइए, जानते हैं मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness in hindi) के बारे में सबकुछ।
मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness in hindi) को हमेशा से ही प्रेगनेंसी सो जोड़ कर देखा गया है। हालांकि, आमतौर पर ये प्रेगनेंसी के दौरान ही होता है। इस दौरान सुबह उठते ही मतली और उल्टी महसूस होती है। यह लगभग 70% गर्भधारण में होता है और आमतौर पर गर्भावस्था के लगभग 6 सप्ताह से शुरू होता है और हफ्तों या महीनों तक रहता है। लेकिन सवाल ये है कि आखिरकार मार्निंग सिकनेस होता क्यों है? तो, आइए जानते हैं मार्निंग सिकनेस का कारण, लक्षण और उपाय विस्तार से।
मॉर्निंग सिकनेस का क्या कारण है- What causes morning sickness?
मॉर्निंग सिकनेस के कारण का पता तो हम पूरी तरह से नहीं लगा सकते लेकिन ये शरीर में कई सारी स्थितियों के कारण हो सकता है। जैसे कि
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-थायराइड और लिवर से जुड़ी बीमारियों में भी मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है।
-पेट से जुड़ी समस्याओं के कारण होता है
-प्रेगनेंसी के दौरान होता है।
प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस क्यों होता है?
गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness in pregnancy) हार्मोन में बदलाव या फिर बढ़ने के कारण हो सकता है। दरअसल, विशेष रूप से ये एस्ट्रोजन हार्मोन के बढ़ने के कारण होता है। मॉर्निंग सिकनेस तनाव, अधिक काम करने, कुछ खाद्य पदार्थों को खाने, मोशन सिकनेस के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने के कारण भी हो सकता है।
मॉर्निंग सिकनेस के लक्षण- Morning sickness symptoms
मॉर्निंग सिकनेस होने पर शरीर में कई लक्षण नजर आते हैं। तो, कई बार कुछ लोगों में और विशेष रूप से महिलाओं में ये गंभीर हो जाता है। इस दौरान शरीर में कई लक्षण महसूस होते हैं। जैसे कि
-दिन में 3 बार से ज्यादा उल्टी होना।
-गंभीर रूप से शरीर में पानी की कमी होना जिनके लक्षणों में पेशाब में कमी, गहरे रंग का मूत्र, खड़े होने के साथ चक्कर आना शामिल हैं।
-वजन कम होने लगना।
-किसी भी प्रकार की खुशबू, बदबू या फिर खाने-पीने की चीजों के स्वाद के प्रति अति संवेदनशील हो जाना। इसके कारण मतली और उल्टी की समस्या बढ़ जाती है।
-बुखार
-चक्कर आना
-तेजी से दिल धड़कना
-दूसरी तिमाही में गंभीर मतली
- उल्टी में खून
-बार-बार होने वाला सिरदर्द
-पेट में दर्द
-स्पॉटिंग या ब्लीडिंग
मॉर्निंग सिकनेस के उपाय-Morning sickness prevention tips
1. सुबह उठते ही लें पुदीना और नींबू की चाय
सुबह उठते ही आपको मॉर्निंग सिकनेस से बचना है तो आपको पुदीना और नींबू से बनी चाय का लेनी चाहिए। इसकी महक आपको बेहतर महसूस करने में मदद करेगा। साथ ही ये हार्मोन को भी शांत करने में मदद करेगी। इसके अलावा आप असली कद्दूकस की हुई अदरक की चाय बनाएं या अदरक कैंडीज ट्राई करें।
2. मसालेदार और फैटी फूड्स से बचें
मसालेदार और फैट से भरपूर भोजन से बचें। केला, चावल, सूखा टोस्ट, सादा बेक्ड आलू, अंडे, टोफू, या सेब जैसे नरम खाद्य पदार्थ खाएं। भोजन के बीच स्वस्थ स्नैक्स खाएं जैसे कि दही, सेब के स्लाइस पर पीनट बटर या अजवाइन डाल कर खाएं, पनीर, दूध और नट्स लें।
3. तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें
मॉर्निंग सिकनेस को कम करने का एक तरीका यह है कि दिन भर में खूब सारे तरल पदार्थ लें। इसके लिए पहले तो खूब पानी पिएं। उसके बाद जूस, स्मूदी और छाछ का सेवन करें।
4. प्रीनेटल विटामिन लें
नाश्ते के साथ अपने प्रसवपूर्व विटामिन लें। आपके प्रसव पूर्व विटामिन में आयरन होता है, तो इसे सोते समय लेने का प्रयास करें। अन्य विटामिन विकल्पों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।
5. गंध और टिमटिमाती रोशनी जैसी स्थितियों से बचें
मार्निंग सिकनेस गंध और टिमटिमाती रोशनी जैसी स्थितियों से तुरंत ट्रिगर कर जाता है। ऐसे में आपको सुबह उठते ही तेज रोशनी और किसी गंध से बचना चाहिए। साथ ही आप टिमटिमाती रोशनी से भी बचें क्योंकि इससे आपका सिर घुम सकता है और उल्टी हो सकती है।
साथ ही कमरों को अच्छी तरह हवादार रखें, पंखा चालू करें या समय-समय पर ताजी हवा लेने के लिए बाहर जाएं। नींबू, संतरा या पुदीना जैसी ताजा-महक वाली चीजों को सूंघें। इसके अलावा ध्यान रहे कि गंभीर मॉर्निंग सिकनेस वाली महिलाओं में डिहाइड्रेशन होने पर अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत हो सकती है और मतली को दूर करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं।
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