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गर्भावस्था में Chinese Food खाने का मन कर रहा है, तो पहले एमएसजी के बारे में जरूर जान लें
प्रेग्नेंसी में क्रेविंग होना आम बात है और इस दौरान महिलाओं का चाइनजी फूड खाने का भी मन करता है लेकिन इसमें एमएसजी होता है जिसका असर भ्रूण पर पड़ सकता है।
प्रेग्नेंसी में महिलाओं का बहुत कुछ खाने का मन करता है और हो सकता है कि इस दौरान चाइनीज फूड को लेकर आपको बहुत क्रेविंग हो। हालांकि, गर्भावस्था ही नहीं बल्कि वैसे भी महिलाओं के लिए चाइनीज फूड में मौजूद अजीनोमोटा हानिकारक होता है। इसे मेडिकल भाषा में एमएसजी कहा जाता है। अब अगर आप गर्भावस्था में अजीनोमोटो लेती हैं तो इसका सीधा असर आपके शिशु पर पड़ेगा।
आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में अजीनोमोटा का क्या असर पड़ता है और इसके नुकसान क्या हैं?
अजीनोमोटो क्या है
एमएसजी मोनोसोडियम ग्लूटामेट है जो कि अजीनोमोटो की प्रमुख सामग्री है। चाइनीज व्यंजनों में इसका खूब इस्तेमाल किया जाता है। ये नमक के रूप में आता है।
जानिए प्रेगनेंसी में तरबूज खा सकते है या नहीं
1-
गर्भवती महिलाओं में यह एक आम परेशानी होती है जो कि काफी असहनीय हो सकती है। सुबह उठने के कुछ समय बाद तरबूज का एक गिलास रस लेना फायदेमंद होता है। इसे सुबह पीने से शरीर में एनर्जी भी बनी रहती है।
2-
तरबूज को नियमित मात्रा में खाने से भोजन की नली के साथ-साथ पेट को भी ठंडक पहुंचती है। तरबूज तासीर में ठंडा होता है इसलिए यह एसिडिटी के कारण गले में होने वाली जलन से तुरंत राहत देता है।
3-
इस फल में 90% से अधिक पानी की मात्रा होती है इसलिए यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। विशेष रूप से गर्मी के महीनों में नाश्ते के रूप में तरबूज खाना एक गर्भवती महिला के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
4-
गर्भ में बढ़ते बच्चे के दबाव के कारण, गर्भावस्था के दौरान पैरों में रक्त का प्रवाह काफी हद तक रूक जाता है। इस कारण पैरों के साथ-साथ हाथों में भी सूजन आ जाती है। तरबूज प्रभावी रूप से मांसपेशियों और नसों में रुकावटों को कम करता है, जिससे सूजन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
5-
तरबूज, विटामिन और खनिजों का एक समृद्ध स्रोत है जो कि इम्युनिटी को काफी तेज करता है। गर्भावस्था के दौरान बीमार पड़ना किसी भी गर्भवती मां के लिए एक निराशाजनक बात हो सकती है। इसलिए अपनी डायट में नियमित तरबूज को शामिल करें।
6-
हार्मोनल चेंज के साथ ही गर्भावस्था में वजन बढ़ने से हड्डियों में दर्द के साथ-साथ मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है। मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिजों में समृद्ध, तरबूज गर्भावस्था के दौरान इसे रोकने में मदद करता है।
अजीनोमोटो के प्रेग्नेंसी में नुकसान
यदि आपको गर्भावस्था में माइग्रेन का दर्द हो रहा है तो एमएसजी का सेवन न करें। नाइट्रेट और एस्पैरटेम की तरह एमएसजी से प्रेगनेंट महिलाओं में माइग्रेन के मामले बढ़ जाते हैं। गर्भावस्था में शरीर में शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल कई रूप से बदलाव आते हैं।
मोटापा
अधिकतर प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में एमएसजी होता है जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है और इसके दुष्प्रभावों में से एक वजन बढ़ना भी है। इसकी वजह से प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ने के कारण कमर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप गर्भावस्था में एमएसजी लेने से बचें।
जानिए प्रेगनेंसी में तरबूज खा सकते है या नहीं
1-
गर्भवती महिलाओं में यह एक आम परेशानी होती है जो कि काफी असहनीय हो सकती है। सुबह उठने के कुछ समय बाद तरबूज का एक गिलास रस लेना फायदेमंद होता है। इसे सुबह पीने से शरीर में एनर्जी भी बनी रहती है।
2-
तरबूज को नियमित मात्रा में खाने से भोजन की नली के साथ-साथ पेट को भी ठंडक पहुंचती है। तरबूज तासीर में ठंडा होता है इसलिए यह एसिडिटी के कारण गले में होने वाली जलन से तुरंत राहत देता है।
3-
इस फल में 90% से अधिक पानी की मात्रा होती है इसलिए यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। विशेष रूप से गर्मी के महीनों में नाश्ते के रूप में तरबूज खाना एक गर्भवती महिला के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
4-
गर्भ में बढ़ते बच्चे के दबाव के कारण, गर्भावस्था के दौरान पैरों में रक्त का प्रवाह काफी हद तक रूक जाता है। इस कारण पैरों के साथ-साथ हाथों में भी सूजन आ जाती है। तरबूज प्रभावी रूप से मांसपेशियों और नसों में रुकावटों को कम करता है, जिससे सूजन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
5-
तरबूज, विटामिन और खनिजों का एक समृद्ध स्रोत है जो कि इम्युनिटी को काफी तेज करता है। गर्भावस्था के दौरान बीमार पड़ना किसी भी गर्भवती मां के लिए एक निराशाजनक बात हो सकती है। इसलिए अपनी डायट में नियमित तरबूज को शामिल करें।
6-
हार्मोनल चेंज के साथ ही गर्भावस्था में वजन बढ़ने से हड्डियों में दर्द के साथ-साथ मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है। मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिजों में समृद्ध, तरबूज गर्भावस्था के दौरान इसे रोकने में मदद करता है।
वॉटर रिटेंशन
गर्भावस्था में होने वाली सबसे आम समस्याओं में वॉटर रिटेंशन भी शामिल है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर सामान्य से 50 फीसदी ज्यादा खून और अन्य तरल बनाता है जिससे शिशु के विकास में मदद की जा सके। हालांकि, प्रेग्नेंसी में वॉटर रिटेंशन की वजह से कुछ गंभीर मामलों में प्रीक्लैंप्सिया यानी हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। इसमें नमक अहम भूमिका निभाता है और एमएसजी भी एक सोडियम नमक ही है। इससे वॉटर रिटेंशन की स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।
सीने में जलन
गर्भवती महिलाओं को सीने में जलन और एसिडिटी की शिकायत बहुत रहती है। वहीं गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सीने में जलन की समस्या ज्यादा होती है। चूंकि, एमएसीजी एक आर्टिफिशियल एडिटिव है इसलिए इससे सीने में जलन की दिक्कत और गंभीर रूप ले सकती है। हो सकता है कि पाचनतंत्र को इसे पचाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़े जिससे सीने में जलन पैदा हो।
प्लेसेंटा बैरियर ब्रेकडाउन
अधिक मात्रा में फ्री ग्लूटामेट लेने से प्लेसेंटा बैरियर (शिशु तक भोजन पहुंचाने वाली नली) टूट सकता है। यह स्थिति शिशु के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए बेहतर होगा आप गर्भावस्था में एमएसजी का अधिक सेवन न करें।
गर्भवती महिलाओं के लिए एमएसजी बहुत खतरनाक हो सकता है। इसकी वजह से उनका गर्भावस्था का सफर और मुश्किल बन सकता है और शिशु को भी जानलेवा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप प्रेग्नेंसी में अपनी क्रेविंग को कंट्रोल करते हुए चाइनीज फूड का सेवन न करें।
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