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क्या हर रोज स्प्राउट्स खाना सही है? जानिए इस बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट

अगर आप रोजाना अंकुरित अनाज खाना पसंद करती हैं, तो आपको अपने स्वास्थ्य और सेहत के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
स्प्राउट्स को हमारे आहार में शामिल होने वाला एक हेल्दी सप्लीमेंट माना गया है। आमतौर पर गर्म और आर्द्र परिस्थितियों में बीज और फलियों से बने स्प्राउट्स की खपत अक्सर कच्चे बनाम पके हुए की बहस में फंस जाती है। कई डाइट कॉन्शियस लोग, प्रोटीन से भरपूर प्लांट बेस्ड फूड के लिए स्प्राउट्स खाते हैं। लेकिन क्या रोजाना अंकुरित अनाज खाना सेहत के लिए अच्छा है? चलिए देखें क्या कहती है हमारी पड़ताल।

स्प्राउट्स हमारे खाने की योजना में एक बेहतरीन सप्लीमेंट है। स्प्राउट्स सिर्फ मूंग और मोठ जैसी दाल से ही नहीं, बल्कि चना, ब्रोकली, अल्फाल्फा, मेथी आदि से भी बनाए जा सकते हैं।
समझिए स्प्राउट्स क्या है?

स्प्राउट्स अंकुरित बीज होते हैं जिन्हें कैलोरी, सोडियम और वसा में कम माना जाता है। वे पोषक तत्वों से भरे होते हैं। “अंकुरित भोजन में कई पोषक तत्वों को बढ़ाने की क्षमता है। बीज या पौधों को 3-4 घंटे तक भिगोने के बाद अंकुरण करना चाहिए।”

ये सेहत के लिए कैसे फायदेमंद हैं?
यह प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे पाचनशक्ति बढ़ती है।
यह ब्रोकली स्प्राउट्स के तौर पर कैल्शियम, विटामिन सी जैसे विटामिन और सल्फोराफेन जैसे कई फाइटोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा और उपलब्धता को बढ़ाता है।
यह फाइटेट, कार्बोहाइड्रेट और फैट कॉन्टेंट के प्रतिशत को कम करता है।

क्या रोजाना अंकुरित अनाज खाना सही है?

हमें यह नहीं बताया गया है कि अति हर चीज की बुरी होती है, तो यही बात स्प्राउट्स पर भी लागू होती है।
“हर दिन एक जैसे स्प्राउट्स न खाएं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व प्राप्त कर रहे हैं, आप जो अंकुरित अनाज ले रहे हैं, उसमें बदलाव करें। स्प्राउट्स में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इससे कुछ लोगों के लिए इसे पचाना मुश्किल हो सकता है और पेट फूल सकता है।”

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड फार्मास्युटिकल कैमिस्ट्री इंगित करता है कि कच्चे अंकुरित खाने से वात, पित्त और कफ में गड़बड़ी हो सकती है। आयुर्वेद के अनुसार स्प्राउट्स पचने में भारी होते हैं, जिससे जलन, पेट दर्द और बहुत कुछ होता है।
आयुर्वेद कोच डिंपल जांगड़ा का कहना है कि प्राचीन विज्ञान कच्चे खाद्य पदार्थों या ठंडे खाद्य पदार्थों के ज़्यादा सेवन की सलाह नहीं देता है। उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, “स्प्राउट्स उन खाद्य पदार्थों में से एक हैं, जिन्हें हेल्दी माना जाता है लेकिन आयुर्वेद का इसके बारे में एक अलग दृष्टिकोण है।”
स्प्राउट्स खाने के प्रभाव :

वे वात दोष वाले लोगों के लिए पचाने में बेहद कठिन हैं। अंकुरित होने से प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों के गुण बढ़ जाते हैं। आमतौर पर हाई प्रोटीन और फाइबर को पचाना मुश्किल माना जाता है।
अंकुरित अनाज के नियमित सेवन से दस्त हो सकते हैं ।
स्प्राउट्स कच्चे या पके न होने पर ठंडे होते हैं, जो इसे बैक्टीरिया और ई-कोलाई जैसे संक्रमणों से ग्रस्त करते हैं।
अंकुरित अनाज और दालों के अधिक सेवन से अपान वात में वृद्धि हो सकती है, जिससे आगे जाकर बवासीर हो सकती है।

इसलिए बेहतर है कि अंकुरित अनाज को कुछ मसालों जैसे काली मिर्च, दालचीनी, गरम मसाला के साथ उबाल कर पकाएं। यह पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण को आसान बनाता है।
अंकुरित अनाज खाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्प्राउट्स खराब न हो गए हों।

इसके अलावा, स्प्राउट्स को हमेशा अन्य खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर खाना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं, “इसमें सब्जियां और यहां तक ​​​​कि कुछ फल मिलाएं और शानदार सलाद बना लें ।

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