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क्या शिशु को शहद देना सुरक्षित है?
नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक शिशु एक साल का न हो जाए, उसे शहद या मधु नहीं दिया जाना चाहिए।
पारंपरिक तौर पर यह माना जाता है कि शहद खांसी और दांत निकलते समय होने वाला दर्द में आराम देता है। मगर, शहद में क्लोस्ट्रिडियम बोटुलिनम नामक जीवाणु के बीजाणु हो सकते हैं।
इससे बोटुलिज्म नामक एक दुर्लभ, मगर काफी गंभीर प्रकार की भोजन विषाक्तता हो सकती है।
बोटुलिज्म के लक्षण संदूषित शहद का सेवन करने के आठ से 36 घंटों के बाद सामने आते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:
कब्ज
सुस्ती या उदासी
भूख में कमी
अगर, आपको लगे कि शिशु को बोटुलिज्म है, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
अगर, आपके शिशु को खांसी है, तो इसके उपचार के बारे में डॉक्टर से बात करें।
कई माएं शिशु के भोजन में अतिरिक्त स्वाद डालने के लिए शहद का इस्तेमाल करती हैं। यदि, आपका शिशु एक साल से कम उम्र का है, तो उसके भोजन में स्वाद के लिए आप शहद की बजाय ताजे फलों का रस, फलों का गाढ़ा गूदा, मसला हुआ केला, शकरकंदी या मेवों का इस्तेमाल कर सकती हैं। ये खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं और इनमें भरपूर पोषक तत्व भी होते हैं।
ये खाद्य पदार्थ शिशु को तभी दें, जब वह छह माह से ऊपर का हो गया हो। अगर, वह अभी छह माह का नहीं हुआ है, तो उसके लिए केवल आपका स्तनदूध ही काफी है।
शहद आपके शिशु के दांतों को भी नुकसान पहुंचा सकता है या फिर दांत निकलते समय परेशानी पैदा कर सकता है। शिशु के दांत निकलते समय परेशानी न हो, इसके लिए उचित तरीके से ब्रश करना और दांतों के डॉक्टर से नियमित जांच कराना जरुरी है। आपके शिशु का पहला दांत निकलने के साथ ही उसके दांतों की सही तरह से सफाई महत्वपूर्ण हो जाती है।
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