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हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है एंजाइना, जानिए इसके लक्षण और इलाज के बारे में
सीने में दर्द को एंजाइना कहते हैं जो कि ह्रदय में पर्याप्त खून न पहुंच पाने के कारण होता है। ये हार्ट अटैक के साथ सीने पर दबाव की तरह महसूस हो सकता है। एंजाइना को एंजाइना पेक्टोरिस या इस्केमिक चेस्ट पेन भी कहा जाता है।
ये हृदय रोग का लक्षण होता है। जब धमनियों में अवरोध उत्पन्न होता है या ऑक्सीजन युक्त खून को हृदय तक पहुंचाने वाली धमनियों में पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं होता है, तब यह समस्या उत्पन्न होती है।
आमतौर पर एंजाइना जल्दी ठीक हो जाता है लेकिन फिर भी यह जानलेवा हृदय समस्या का संकेत हो सकता है। दवा और जीवनशैली में बदलाव से एंजाइना को कंट्रोल किया जा सकता है। यदि स्थिति गंभीर हो तो सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है या धमनियों को खोलने के लिए उनमें स्टेंट भी डालना पड़ सकता है।
एंजाइना के लक्षण
एंजाइना के लक्षणों में सीने में दर्द और असहज महसूस होना शमिल है। इसमें सीने में दबाव, जलन या भारीपन जैसा महसूस होता है। व्यक्ति को बांह, गर्दन, कंधे या पीठ में भी दर्द हो सकता है।
एंजाइना के अन्य लक्षण इस प्रकार हैं :
चक्कर आना
थकान
जी मतली
सांस लेने में दिक्कत
पसीना आना
डॉक्टर को इन लक्षणों को तुंरत पहचान कर इलाज शुरू कर देना चाहिए ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके।
Health Benefits of Kale : हृदय रोगों से बचने के लिए करें केल का सेवन, साथ ही मिलेंगे ये 8 फायदे
आज भारत में करोड़ों ऐसे लोग हैं जो हृदय से जुड़ी हुई किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इतना ही नहीं, हर साल हजारों लोगों की जान केवल हृदय रोगों के कारण ही जाती है। इसलिए अपने दिल का खास ख्याल रखने के लिए आप केल को अपने भोजन में जरूर शामिल करें। इसमें कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाने के साथ-साथ हृदय को जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करने का भी गुण मौजूद हैं। । इसलिए हृदय रोगों से बचने के अलावा जो लोग हृदय रोग से पीड़ित हैं, उन्हें इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।
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जिन लोगों के शरीर में अक्सर थकान महसूस होती है, ऐसे लोगों के शरीर में खून की कमी भी हो सकती है, क्योंकि यह खून की कमी का सबसे आम लक्षण माना जाता है। इस समस्या से बचे रहने के लिए केल बहुत फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि इसमें कई सारे रेड मीट की तुलना में पर्याप्त मात्रा में आयरन पाया जाता है जो खून के निर्माण में बहुत उपयोगी होता है। इसलिए आयरन की भरपूर और आवश्यक पूर्ति के लिए इसका सेवन किया जा सकता है।
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कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसकी चपेट में आने वाला हर इंसान बहुत मुश्किल से ही अपनी जिंदगी बचा पाता है। यह इलाज की एक लंबी प्रक्रिया होती है जिसमें शरीर की सभी कोशिकाएं बुरी तरह से कमजोर हो जाती हैं और व्यक्ति को अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। केल में एंटी कैंसर गुण मौजूद होता है। इस कारण से इसका सेवन करने से कैंसर के जोखिम को उत्पन्न करने वाली कैंसर सेल्स को खत्म करने का सक्रिय प्रभाव पाया जाता है, जिसके कारण आप कैंसर की चपेट में आने से बचे रहेंगे।
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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से बचे रहने के लिए भी केल काफी लाभदायक साबित होगी, क्योंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा पाई जाती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के अनुसार, केल में मौजूद पोटेशियम की मात्रा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कम करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर में सामान्य रूप से संतुलन बनाए रखने का कार्य कर सकती है। इसलिए जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है वह लोग इसका सेवन इसका फायदा देख सकते हैं।
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हड्डियों से जुड़ी हुई किसी भी प्रकार की बीमारी से बचे रहने के लिए केल का सेवन बहुत जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोग और जिम एक्सर्साइज करने के बाद इसे पीने की सलाह भी दी जाती है। इसका कारण यह है कि इसमें कैल्शियम की भरपूर मात्रा मौजूद है जो हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसलिए हड्डियों के उत्तम स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आप भी इसका सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।
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वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए रिसर्च में इस बात की पुष्टि की गई है कि पालक की अपेक्षा केल में विटामिन सी की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। यह विटामिन आपके शरीर की त्वचा को निखारने के साथ-साथ आपके चेहरे को भी सुंदरता प्रदान करने के काम आती है। इतना ही नहीं, रात को सोने से पहले अगर सब्जी के रूप में आप इसका सेवन करते हैं तो यह आपको बढ़िया नींद दिलाने में भी काफी मदद प्रदान करेगी, क्योंकि इसमें स्लीपिंग हार्मोन को सक्रिय करने का गुण भी पाया जाता है।
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कई बार एथलीट या घर में किसी सदस्य को अक्सर नसों में खिंचाव हो जाता है और मांसपेशियों में या फिर नसों में आंतरिक रूप से सूजन आ जाती है। कभी-कभी यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि व्यक्ति बेड से उठ भी नहीं पाता है। ऐसे में केल का सेवन करने से इस समस्या से बचने में मदद मिलेगी, क्योंकि केल में एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण पाया जाता है जो नसों की सूजन कम करने के साथ-साथ मांसपेशियों में होने वाली सूजन को भी कम करने में काफी मदद करता है।
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आपको यह सुनकर हैरानी होगी, लेकिन विटामिन ए की पर्याप्त मौजूदगी के कारण यह आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी एक औषधि के रूप में यह सकारात्मक लाभ पहुंचा सकती है। यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के अनुसार केल में विटामिन ए की मात्रा पाई जाती है। यह विटामिन आंखों की रेटिना को स्वस्थ बनाए रखने के साथ-साथ देखने की क्षमता में भी सुधार करता है।
पुरुष और महिलाओं पर प्रभाव
पुरुषों को अक्सर सीने, गर्दन और कंधों में दर्द महसूस होता है जबकि महिलाओं को पेट, गर्दन, गले या पीठ में दर्द हो सकता है। आपको सांस लेने में दिक्कत, पसीना आने या चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है।
एंजाइना के कारण
आमतौर पर एंजाइना हार्ट डिजीज के कारण होता है। जब धमनियों में एक फैटी तत्व प्लाक जमने लगता है और हृदय की मांसपेशी तक रक्त के प्रवाह को अवरोध कर देता है, तब यह समस्या होती है। इससे ह्रदय पर कम ऑक्सीजन के साथ काम करने का दबाव पड़ता है।
इस वजह से दर्द होता है। हृदय की धमनियों में खून के थक्के भी बन सकते हैं जिसकी वजह से हार्ट अटैक आ सकता है।
इसके अलावा कभी-कभी निम्न कारणों से भी सीने में दर्द उठ सकता है :
फेफड़ों की प्रमुख धमनी में रुकावट (पल्मोनरी एम्बोलिज्म)
हृदयका बढ़ा हुआ आकार (हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी)
हृदयके प्रमुख हिस्से की वॉल्व में संकुचन
हृदयके आसपास की थैली में सूजन
एंजाइना के जोखिम कारक
ऐसे कुछ कारक हैं जो व्यक्ति को एंजाइना का शिकार बना सकते हैं, जैसे कि :
बढ़ती उम्र
परिवार में किसी व्यक्ति को ह्रदय रोग
हाई कोलेस्ट्रोल
डायबिटीज
मोटापा
तनाव
तंबाकू का सेवन
पर्याप्त व्यायाम की कमी
एंजाइना का इलाज
एंजाइना के इलाज में दर्द को कम करने, लक्षणों को रोकने और हार्ट अटैक के खतरे को कम करने या रोकने पर काम किया जाता है। इसके लिए दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और मेडिकल सहायता ली जा सकती है।
एंजाइना के इलाज में जीवनशैली में बदलाव लाने के लिए धूम्रपान छोड़ना, वजन कंट्रोल करना, नियमित कोलेस्ट्रोल लेवल चेक करवाना, एक बार में ज्यादा खाना न खाना, तनाव से दूर रहना और फल, सब्जियों, साबुत अनाज, लो फैट या नो फैट डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करना शामिल है।
एंजाइना के लिए अक्सर नाइट्रेट जैसे कि निट्रोग्लिसरीन की सलाह दी जाती है। नाइट्रेट रक्त वाहिकाओं को चौड़ा कर या उन्हें आराम देकर एजाइना अटैक की गंभीरता को कम करती हैं या उसे रोक देती हैं।
इसके लिए बीटा ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स आदि दवाएं भी दी जा सकती हैं। वहीं कुछ मामलों में एंजाइना के इलाज के लिए सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। इसमें एंजियोप्लास्टी की सलाह दी जा सकती है। कोरोनरी आर्टरी बाईपास भी अन्य सर्जिकल प्रक्रिया है।
बेहतर होगा कि आप एंजाइना जैसी गंभीर स्थिति से बचने के लिए पहले ही जीवनशैली में उचित और स्वस्थ बदलाव कर लें।
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