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स्तनपान की शुरुआत कैसे करुं?
चूंकि स्तनपान करवाने में पांच से लेकर 40 मिनट तक लग सकते हैं, इसलिए शुरु करने से पहले एक आरामदायक स्थान चुनें। माहौल बहुत अहम है, खासतौर पर स्तनपान करवाने के शुरुआती दिनों में, जब आप इस पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही हों।
अगर, घर-बाहर के शोरगुल के कारण आपका ध्यान आसानी से विचलित हो जाता है, तो किसी शांत जगह को ढूढ़िए। अगर आप जल्दी ऊब जाती हैं, तो हो सकता है आप रेडियो, स्टीरियो या टेलीविजन के सामने स्तनपान करवाना चाहें। लेकिन, ऐसा केवल तभी करें, जब आपके और आपके शिशु के लिए स्तनपान बढ़िया चल रहा हो। अलग-अलग जगहों पर स्तनपान करा कर देखें कि आपके लिए कौन सा स्थान उचित रहेगा।
हमेशा यह सुनिश्चित करें कि स्तनपान के दौरान आप और शिशु दोनों ही आरामदायक स्थिति में रहें। अपने बच्चे को एक ऐसी अवस्था में थामें, जिससे आपकी बाँहों और पीठ में दर्द नहीं हो। शिशु को सहारा देने के लिए गद्दियां या तकिये पास रखें। अर्ध-लेटी अवस्था में स्तनपान करवाने के लिए आपको पीठ के बल लेटना होगा, ताकि शिशु आपके शरीर पर आराम से लेट सके और आपके हाथ उसे सहारा देने के लिए खाली हों। या आप शिशु को गोद में लेकर दूध पिला सकती हैं, इसमें शिशु को अपनी छाती के पार झुलाने की स्थिति में पकड़कर ऊंची गद्दी या तकिए पर रखकर स्तनपान कराना होता है। आप अपने आराम के लिए पैरों को स्टूल पर भी रख सकती हैं।
स्तनपान कराना शुरू करने से पहले खुद को और अपने शिशु को एक विश्रामदायक अवस्था में लाएं। इस बात पर ध्यान दें कि जब आपका बच्चा स्तनों को मुँह में लेता है (लैचिंग), तब आपके स्तनों पर कैसा महसूस होता है। उसे स्तनाग्र का एक बड़ा हिस्सा मुँह में भर लेना चाहिए।
यदि आपके स्तन बड़े हैं, तो आपको करवट लेकर लेटे हुए स्तनपान करवाना आरामदायक लग सकता है या फिर आप शिशु को रग्बी बॉल की तरह अपनी बाजू के नीचे से पकड़ सकती हैंं।
अगर शिशु द्वारा स्तन चूसने से आपको दर्द हो रहा हो, तो अपनी छोटी उंगली शिशु के मुंह में किनारे से उसके मसूड़ों और आपके निप्पल के बीच डाल कर चुसाव रोक दीजिए। दोबारा फिर प्रयास करें। जब एक बार आपका बच्चा स्तन को सही प्रकार से थाम लेगा, तो वह बाकी काम खुद करने में समर्थ हो जाएगा।
अपने बच्चे को बारी-बारी से दोनों स्तनों की बजाय एक स्तन से ही पूरी तरह स्तनपान करने दीजिए। स्तनपान के बीच स्तन बदलने से बच्चे को ढेर सारा पानीदार अग्रदूध मिल सकता है, लेकिन वसा समृद्ध पिछला दूध पर्याप्त नहीं मिल पाएगा। इसके कारण बच्चा चिड़चिड़ा होकर बार-बार स्तनपान की मांग कर सकता है।
एक स्तन का दूध पीने के बाद भी अगर आपका शिशु भूखा लग रहा है, तो उसे दूसरा स्तन पेश करें। मगर, दूसरे स्तन से दूध पिलाना शुरू करने से पहले उसे डकार दिलवाना जरूर याद रखें।
क्या स्तनपान कराना आसान है?
कुछ महिलाएं आसानी से स्तनपान के साथ अपना तालमेल बिठा लेती हैं। परंतु कई नई माँओं को शुरुआती दिनों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, अगर आप हताश महसूस कर रही हैं, तो याद रखिए कि आप अकेली नहीं हैं, जिसे परेशानी हो रही है।
अपनी माँ या सास से इस बारे में बात करने से कुछ मदद मिल सकती है। परिवार के ऐसे सदस्य और दोस्त भी आपको सलाह और सुझाव दे सकते हैं, जो हाल ही में माँ-बाप बने हों। स्तनपान करवाने वाली अन्य माँओं से सहायता के लिए आप बेबीसेंटर कम्युनिटी के ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट एंड हेल्प ग्रुप में शामिल हो सकती हैं।
यदि आपको समस्याएं हो रही हों, तो आप अपनी डॉक्टर से भी बात कर सकती हैं या फिर उनसे स्तनपान विशेषज्ञ के बारे में जानकारी ले सकती हैं। डॉक्टर आपका शिशु को स्तनपान कराने का तरीका देखकर, आप दोनों के लिए स्तनपान आसान बनाने के सुझाव दे सकती हैं।
स्तनपान कराने के लिए अभ्यास की जरूरत है। यह एक ऐसा हुनर है, जो आपको और आपके शिशु को बिल्कुल शुरुआत से सीखना है। इस कला में महारथ हासिल करने के लिए स्वयं को अधिक से अधिक समय दीजिए। हो सकता है इसमें एक दिन, एक सप्ताह लगे या या फिर एक बार में बस एक फीड में हो जाए।
अगर एक दिन स्तनपान का अनुभव अच्छा नहीं रहा हो, तो खुद को ढांढस दीजिए कि कल बेहतर होगा। इस बात को ध्यान में रखिए कि आप को जो दिक्कतें हो रही हैं, वे जल्द ही खत्म हो जाएंगी।
प्रसव के बाद वाले चेक-अप के समय तक आप शायद बेहिचक स्तनपान करवा रही होंगी। यदि ऐसा नहीं हो, तो डॉक्टर से मदद मांगने में संकोच नहीं कीजिए।
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