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कान में परेशानी के कारण सिर घुमाने या करवट लेने पर आते हैं चक्कर
यदि सिर घुमाने या करवट लेने पर थोड़े-थोड़े समय के लिए बार-बार चक्कर आते हैं तो यह कान से संबंधित समस्या हो सकती है जिसे बिनाइन पेरोक्सीमल पोजिशनल वर्टिगो, बीपीपीवी कहते हैं। यह चक्कर आने का एक आम कारण हैं।
सिर घुमाने पर क्यों आते हैं चक्कर?
कान शरीर का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके आन्तरिक भाग में इसके लिए 3 अर्द्धघुमावदार कैनाल, यूट्रिकल, सेक्यूल व कई छोटी-छोटी संरचनाएं होती हैं जिनमें छोटे- छोटे विशेष कण व्यवस्थित होते हैं।
इस स्थिति में कैल्शियम कार्बोनेट युक्त विशेष कण, जिन्हें ओटोलिथ कहते हैं अपने नियत स्थान यूट्रिकल से भटककर दूसरी असामान्य जगह, पिछली घुमावदार कैनाल में पहुंच जाते हैं। जिससे सिर व गर्दन की पोज़िशन में बदलाव होते ही चक्कर महसूस होते हैं।
सिर को घुमाना, ऊपर या नीचे करना, बिस्तर पर करवट लेना, लेटी हुई अवस्था से एकदम बैठने या उठने आदि पर ये उत्तेजित हो जाते हैं।
वहीं कुछ लोगों में सिर पर चोट लगने के बाद और कान के कुछ रोगों के कारण ये होता है। यी परेशानी उम्रदराज लाेगों में ज्यादा मिलती है।
लक्षण
कुछ समय के लिए बार-बार चक्कर आना, विशेषकर सिर या गर्दन को घुमाने या करवट लेने पर। ये चक्कर कुछ सेकंड से कुछ मिनिट तक ही रहते हैं।
इस दौरान आपको उल्टी या मितली भी आ सकती है। हालांकि इस दौरान कान से सुनाई ठीक देता है।
इलाज
ज़्यादातर यह कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। इस दौरान चक्कर पर काबू के लिए एंटीवर्टिगो दवाएं दी जाती हैं।
यदि यह बीमारी अपने आप ठीक नहीं होती है तो भटके हुए इन सूक्ष्म कणों काे वापस सही जगह पर लाया जाता है। इसके लिए विशेष एपलेज मेन्यूअर में मरीज के सिर को कई विशेष कोणों से घुमाया जाता है।
इसके अलावा सिर व गर्दन के की कई एक्सरसाइज भी इसमें फायदेमंद साबित होती हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
एकदम से खड़े न हों, इससे गर्दन में झटका लग सकता है।
अगर आपको इसकी ज्यादा परेशानी है तो डाइविंग करने से बचना चाहिए।
ज़रूरी रोज़मर्रा का सामान बहुत ऊंचे स्थान पर रखने के बजाय अपनी आसान पहुंच में रखें।
ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
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