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बिना नाभि वाली बच्ची को मिली नई जिंदगी

जन्म से बाहर लटक रही पेशाब की थैली, गुप्तांग भी नहीं थे केजीएमयू के डॉक्टरों ने कुरील टेक्निक से की सर्जरी एनबीटी, लखनऊकेजीएमयू के पीडियेट्रिक ...

जन्म से बाहर लटक रही पेशाब की थैली, गुप्तांग भी नहीं थे


केजीएमयू के पीडियेट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट में कुरील टेक्निक के जरिए फिर एक असामान्य बच्ची को नई जिंदगी मिली है। डेढ़ साल की इस बच्ची की पेशाब की थैली जन्म से शरीर से बाहर लटक रही थी। उसकी नाभि और गुप्तांग भी नहीं थे। विभाग के डॉक्टरों ने एक अप्रैल को कुरील टेक्निक के जरिए उसका जटिल ऑपरेशन कर उसके सभी विकृत अंग सामान्य कर दिए। इसके लिए उसके पैरंट्स से कोई फीस भी नहीं ली गई। फिलहाल बच्ची स्वस्थ है।

बच्ची के माता-पिता कानपुर के प्रधानपुर गांव के रहने वाले हैं और मजदूरी से गुजारा करते हैं। पीडियेट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. एसएन कुरील ने बताया कि बच्ची 17 अक्टूबर 2013 को पैदा हुई थी। उसके गुप्तांग नहीं थे। पेशाब की थैली शरीर से बाहर लटक रही थी, जिसमें से लगातार पेशाब रिसता था। उसकी नाभि और गुप्तांग भी नहीं थे। बच्ची के पिता इलाज के लिए कई निजी संस्थान और मेडिकल कॉलेज गए, लेकिन सभी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे।


प्रो. एसएन कुरील ने बताया कि मेडिकल में इस समस्या को ब्लैडर एक्सट्रॉफी कहते हैं। 35000 बच्चों में एक बच्चे को इस तरह की विकृति होती है। दूसरे संस्थानों में इसके लिए सात से आठ चरणों में ऑपरेशन होता है, लेकिन यहां 'सिंगल स्टेज टोटल रीकंस्ट्रक्टिव' प्रोसिजर से सर्जरी की गई। आठ घंटे चली ओपन सर्जरी में सभी विकृतियां दूर कर दी गईं। इस दरम्यान बच्ची के शरीर में 100 से अधिक टांके लगाने पड़े।

सर्जरी में स्टेप-बाई-स्टेप

- पेट पर चार हिस्सों में निशान बनाकर नाभि वाले हिस्से से गुप्तांग वाले हिस्से को चीरा गया।

- पेशाब कंट्रोल करने वाली ग्रंथियां बनाई गईं। इसे मेडिकल की भाषा में 'इनरवेशन प्रीसर्जविंग इल्योसिस्टोप्लास्टी' कहते हैं।

- पेशाब में इस्तेमाल होने वाली पेल्विक बोन को काटकर ठीक किया गया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब पेल्विक बोन को बाहर से न काटकर अंदर से काटा गया।

- पेशाब का रिसाव रोकने के लिए नली में गांठें बनाने के लिए खास डीफ्लाक्स इंजेक्शन लगाया गया।

- गुप्तांग को शेप दिया गया। फिर नाभि बनाई गई।

इस टीम ने की सर्जरी

सर्जन प्रो. एसएन कुरील, डॉ. अर्चिका व डॉ. दिगंबर, एनेस्थेटिस्ट प्रो. अनिता मलिक व प्रो. विनीता सिंह, सिस्टर वंदना और सिस्टर राजदाई।

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कुरील टेक्निक के लिए मिला था पद्म श्री

- कुरील टेक्निक पीडियेट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रो. एसएन कुरील की देन है। इसके लिए उन्हें इसी साल पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है। सिर्फ केजीएमयू में ही इस टेक्निक के जरिए सर्जरी होती है। यहां अब तक 40 बच्चों की सर्जरी हो चुकी है।

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