Login
$zprofile = 'profile'; $zcat = 'category'; $zwebs = 'w'; $ztag = 'tag'; $zlanguage = 'language'; $zcountry = 'country'; ?>
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
हर रोज कितना विटामिन डी लेना चाहिए, कहीं आप ज्यादा लेकर जोखिम तो मोल नहीं ले रहे, जानें
विटामिन डी वसा में घुलनशील है जो शरीर के फंक्शन के लिए जरूरी है.
Vitamin d right amount: शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी की जरूरत होती है और इम्यूनिटी के फंक्शन के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है. विटामिन डी शरीर के कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भाग लेता है. विटामिन डी दांत और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है. इसके अलावा विटामिन डी हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, डायबिटीज, डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए भी जरूरी है. विटामिन डी के बारे में अक्सर लोगों को गलतफहमी रहती है. अधिकांश लोगों को लगता है कि उन्हें विटामिन डी की कमी है. इसलिए वे दवा दुकान से विटामिन डी सप्लीमेंट ले लेते हैं. जबकि जांच में उन्हें विटामिन डी की कमी नहीं रहती है. ऐसे में उन्हें हाइपरविटामिनोसिस (hypervitaminosis) हो जाता है. यानी इससे विटामिन डी का ओवरडोज शरीर में जमा होने लगता है. इसका परिणाम यह होता है कि खून में कैल्शियम जमा होने लगता है. इसे हाइपरकैल्शिमिया (hypercalcemia) कहते हैं. इससे किडनी पर दबाव बढ़ता है जिसके कारण किडनी फेल्योर भी हो सकता है.
विटामिन डी की सप्लीमेंट लेने से होती है ये परेशानियां
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में मैक्स सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल, साकेत में इंटरनल मेडिसीन के डाइरेक्टर डॉ रोमेल टिक्कू कहते हैं, “जो मरीज जरूरत से ज्यादा विटामिन डी सप्लीमेंट का सेवन करते हैं उनमें एक्यूट किडनी फेल्योर, डिसऑरिएंटेशन, कंफ्यूजन और हार्ट स्ट्रेस का सामना करना पड़ सकता है. ” डॉ रोमेल टिक्कू ने बताया कि बहुत से लोगों को यह नहीं पता कि विटामिन डी की कमी धूप में जाने और फोर्टिफाइड फूड खाने से अपने आप दूर हो जाती है. विटामिन डी की सप्लीमेंट तब दी जाती है जब धूप या इन फूड से मरीजों को विटामिन डी की पूर्ति नहीं हो पाती है. विटामिन डी के लिए सूरज की रोशनी ही सबसे महत्वपूर्ण चीज है. सूरज की रोशनी से कितना विटामिन डी लेना है यह हमारा शरीर जानता है. इसके अलावा अन्य चीजों से उतना लाभ नहीं होता.
आपको रोजाना कितने विटामिन डी की जरूरत है
12 महीने तक के बच्चे को रोजना 400 इंटरनेशनल यूनिट (IU) विटामिन डी की जरूरत होती है जबकि एक साल से लेकर 70 साल की उम्र तक के लोगों के लिए 600 आईयू विटामिन डी की जरूरत होती है. जब इंसान की उम्र 70 साल से ज्यादा हो जाए तो उसे 800 आईयू विटामिन डी की जरूरत होती है. विटामिन डी वसा में घुलनशील है जो शरीर के फंक्शन के लिए जरूरी है. लेकिन वसा में घुलनशील होने के कारण शरीर में इसकी अतिरिक्त मात्रा हो जाने पर यह पानी के साथ शरीर से बाहर नहीं निकलता और शरीर में जमा होने लगता है. विटामिन डी मसल्स, इम्यून सिस्टम और सेल्स के ग्रोथ के लिए जरूरी चीज है. हालांकि एक्सपर्ट के मुताबिक भारत जैसे धूप से सराबोर देशों में विटामिन डी की कमी आश्चर्यजनक है. यानी यहां बहुत कम ही लोगों को विटामिन डी की कमी हो सकती है. लेकिन बिना जांच यदि आप विटामिन डी की गोली लेते हैं तो इसका घातक परिणाम भी हो सकता है.
| --------------------------- | --------------------------- |