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डिलीवरी के बाद महिलाओं को कम से कम 12 महीने तक इंतजार करना चाहिए। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हैल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के अनुसार दूसरी प्रेगनेंसी में इतने समय का गैप तो होना ही चाहिए
डिलीवरी के बाद कंसीव करने की संभावना
आपकी नॉर्मल डिलीवरी हुई हो या सी-सेक्शन डिलीवरी, दोनों तरह की डिलीवरी के बाद जल्द ही आपका शरीर दोबारा प्रेगनेंट होने के लिए तैयार हो जाता है। अपने पहले पोस्टपार्टम पीरियड से पहले आप ओवुलेट कर सकती हैं और जितना जल्दी ओवुलेशन होगा, उतना ही जल्दी आप कंसीव कर पाएंगी।
अगर आप डिलीवरी के बाद सेक्स के दौरान गर्भ निरोधक का इस्तेमाल नहीं करती हैं तो आप प्रेगनेंट हो सकती हैं। वहीं, कुछ महिलाओं में ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ओवुलेशन देरी से हो सकता है। ये गर्भ निरोधक के रूप में ज्यादा प्रभावशाली नहीं होता है और इसका असर लैक्टेशनल एमेनोरिया मेथड यानी एलएएम की स्थिति में ही होता है। यह
दूसरी प्रेगनेंसी में कितना गैप होना चाहिए
डिलीवरी के बाद महिलाओं को कम से कम 12 महीने तक इंतजार करना चाहिए। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हैल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के अनुसार दूसरी प्रेगनेंसी में इतने समय का गैप तो होना ही चाहिए।
दो बच्चों में 18 से 23 महीनों का गैप रखने की बजाय 6 महीने से कम समय का गैप रखने से प्रीमैच्योर बर्थ या शिशु का जन्म के समय वजन कम होने का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों में 18 महीने से कम और ज्यादा लंबा गैप (लगभग 60 महीने) रखने से मां और शिशु दोनों को खतरा रहता है।
डिलीवरी के बाद कब आती है फर्टिलिटी
नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी दोनों में ही डिलीवरी के शुरुआती हफ्तों में ही फर्टिलिटी वापस आ सकती है। हर महिला में ओवुलेशन पीरियड अलग हो सकता है।
पहला पोस्टपार्टम मेंस्ट्रुअल साइकिल बिना ओवुलेशन के आ सकता है। इसका मतलब है कि ओवुलेशन के बीच में अंडे के रिलीज हुए बिना ब्लीडिंग हो सकती है या बिना किसी ब्लीडिंग के ओवुलेट हो सकता है। हालांकि, डिलीवरी के शुरुआती 6 हफ्ते बाद ही महिलाएं ओवुलेट कर सकती हैं। इस समय महिला का स्तनपान करवाना जरूरी है। ऐसा न हो तो महिला प्रेगनेंट हो सकती है।
6 महीने का गैप न रखने के नुकसान
अगर दो प्रेगनेंसी के बीच 6 महीने से कम समय का गैप रखा जाए तो दूसरी प्रेगनेंसी में मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पहली डिलीवरी से शरीर पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ होता है। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि शरीर डिलीवरी के बाद बिल्कुल ठीक हो चुका है तो ये जान लें कि शरीर के अंदर हार्मोन और पोषण के स्तर में अभी संतुलन आना बाकी है।
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