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पैरों में ऐंठन की वजह से महिलाओं को काफी तेज दर्द होता है, जिसे बर्दाश्त करना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। महिलाओं को पैरों के क्रैम्प्स दिन से ज्यादा रात में महसूस होते हैं, क्योंकि उस वक्त थकान और शरीर के फ्लूइड्स दोनों ज्यादा एक्टिव होते हैं।
कब शुरू होते हैं प्रेगनेंसी क्रैम्प्स?
पैरों के क्रैम्प्स महिलाओं को उनके सेकंड या थर्ड ट्राइमेस्टर में होना शुरू होते हैं, जब गर्भ में पल रहे शिशु का आकार भी बढ़ने लगता है।
गर्भावस्था के दौरान मांसपेशियों में आने वाली सूजन के कारण पैरों में ऐंठन की समस्या हो जाती है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल में परिवर्तन होते हैं, इस वजह से भी क्रैम्प्स की समस्या को आम माना जाता है।
यदि अपनी प्रेगनेंसी के वक्त महिलाएं संतुलित आहार का सेवन नहीं करती हैं, तो भी उन्हें क्रैम्प्स की समस्या होती है।
गर्भ में शिशु के वजन से महिलाओं को कमजोरी महसूस होती है, जिसकी वजह से भी कई बार उनके पैरों में ऐंठन होती है।
पैरों में आ रहें क्रैम्प्स का क्या है इलाज?
पैरों में क्रैम्प्स आने पर नीचे बताए गए कुछ उपायों को अपनाकर, आप अपने पैरों को आराम दे सकती हैं।
अपने पैरों को सीधा करें और धीरे-धीरे अपने अंगूठे और एड़ी को घुमाएं। इसे आप कई बार धीरे-धीरे करें। आप इसे अपने बेड पर लेटकर भी कर सकती हैं, लेकिन यदि आप इसे खड़ी होकर अपनी एड़ियों के सहारे करेंगी तो इसका अधिक फायदा होगा।
क्रैम्प्स आने पर ठंडी सतह पर खड़े होने की कोशिश करें। ऐसा करने से क्रैम्प्स से आराम मिलेगा। यदि आप ऐसा नहीं कर सकती, तो आइस पैक की सहायता से अपनी एड़ियों की सिकाई करें।
आप चाहें तो क्रैम्प के बढ़ने पर, राहत के लिए हीटिंग पैड का उपयोग करें। यदि आपको हीटिंग पैड से राहत नहीं मिल रही है तो सेंक लेना रोक दें।
क्रैम्प्स की पीड़ा को रोकने का अन्य विकल्प मालिश है। आप चाहें तो खुद या फिर अपने पार्टनर की सहायता लेकर, अपनी एड़ियों पर मसाज करें।
कब तक रहेंगे पैरों में क्रैम्प्स?
प्रेगनेंसी के वक्त पैरों में क्रैम्प्स की समस्या काफी आम है। इसलिए इस दौरान आपको घबराना नहीं चाहिए। यह समस्या प्रेगनेंसी के सेकंड हाफ यानी तब शुरू होती है, जब आपका वजन बढ़ना शुरू होता है। इसकी वजह से ही आपको घबराहट, बेचैनी और रात में नींद न आने की समस्या होती है।
अधिकतर महिलाओं में क्रैम्प्स की समस्या उनके आखिरी ट्राइमेस्टर तक रखती है, लेकिन सही आहार और खुद को हाइड्रेटेड रखकर आप इसे बढ़ने से रोक सकती हैं।
क्या मैं गर्भावस्था के दौरान पैर में ऐंठन को रोक सकती हूं?
प्रेगनेंसी के दौरान क्रैम्प्स को पूरी तरह रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ तरीके अपनाकर आप इसकी आवृत्ति को कम कर सकती हैं।
स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज: इसके लिए रात में सोने से पहले, एक दीवार से लगभग दो फीट दूर खड़ी हों जाएं और अपनी हथेलियों को दिवार पर फ्लैट रखें। अब फर्श पर अपनी एड़ी रखते हुए, आगे की तरफ झुकें। 10 सेकंड के लिए इसके खिंचाव को पकड़ें, तो पांच सेकंड इसे आराम दें। यह कम से कम तीन बार करने की कोशिश करें।
खुद को रखें हाइड्रेटेड: ध्यान रहे कि आप अपने शरीर को अच्छे से हाइड्रेट कर रही हैं। दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। यदि आपके शरीर को इससे अधिक पानी की आवश्यकता है, तो आप अपने डॉक्टर से सलाह लें। आपकी बॉडी हाइड्रेटेड है या नहीं, यह आपके यूरिन के रंग से पता चल सकता है। आपका यूरिन अगर हलके पीले रंग का है तो आप सही मात्रा में हाइड्रेटेड हैं।
संतुलित आहार का सेवन: प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा अच्छी होनी चाहिए। इसके लिए आप दही और केले का नियमित सेवन कर सकती हैं।
विटामिन का सेवन रोज करें: यह इसलिए जरुरी है, क्योंकि विटामिन की सही मात्रा से ही आपके गर्भ में मौजूद शिशु का अच्छे से विकास होगा। अपने डॉक्टर की सलाह लेकर रोजाना विटामिन का सेवन करें।
जुराबे पहनें : अपनी एड़ियों को गर्मी देने के लिए रोजाना मोजे पहनें। ऐसा करने से आपके पैरों में सूजन भी कम होगी और आपके पैर के निचले हिस्सों में ब्लड सर्कुलेशन पर्याप्त होगा। यदि आप चाहें तो बिना हील्स के हल्के जूते भी पहन सकती हैं।
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