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Pemphigus: पेम्फिगस क्या है?
परिचयलक्षणकारणजोखिमइलाजघरेलू उपचार
पेम्फिगस एक दुर्लभ त्वचा संबंधी विकार है। जिसमें त्वचा पर या म्यूकस मेम्ब्रेन पर छाले या घाव हो जाते हैं। खास कर के ये छाले और घाव मुंह या जननांगों पर होते हैं। पेम्फिगस दो मुख्य प्रकार का होता है :
पेम्फिगस वुल्गैरिस (pemphigus vulgaris)
पेम्फिगस फोलिएशियस (pemphigus foliaceus)
पेम्फिगस वुल्गैरिस मुंह में होता है और यह पीड़ादायक भी होता है।
पेम्फिगस फोलिएशियस त्वचा पर दर्द और खुजली पैदा करता है। पेम्फिगस किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन, ज्यादातर लोगों को ये अधेड़ अवस्था में होती है।
कितना सामान्य है पेम्फिगस होना?
पेम्फिगस बहुत दुर्लभ समस्या है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
लक्षण
पेम्फिगस के क्या लक्षण हैं?
मुख्य रूप से पेम्फिगस दो प्रकार के होते हैं। जिसके सबसे मुख्य लक्षण छाले और घाव पर खुजली या दर्द होना।
पेम्फिगस वुल्गैरिस (pemphigus vulgaris)
पेम्फिगस वुल्गैरिस में मुंह में छाले हो जाते हैं। फिर धीरे-धीरे ये त्वचा व जननांगों पर फैलने लगता है। इसमें निकले छालों में दर्द तो होता है पर खुजली नहीं होती है। मुंह से कुछ खाने और निगलने पर दर्द होता है।
पेम्फिगस फोलिएशियस (pemphigus foliaceus)
पेम्फिगस फोलिएशियस में म्यूकस मेम्ब्रेन प्रभावित नहीं होता है। छालों में भी दर्ध नहीं होता है। लेकिन, सीने, कमर और कंधे पर छाले फैल जाते हैं। पेम्फिगस फोलिएशियस में छाले खुजली बहुत करते हैं।
इसके अलावा पेम्फिगस से जुड़े अन्य लक्षणों की जानकारी के लिए डॉक्टर से बात करें।
मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
निम्न लक्षणों के सामने आने पर आपको डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए :
छाले या घाव बनना
घाव का त्वचा पर तेजी से फैलना
बुखार, लालपन या सूजन, जो संक्रमण के लक्षण हैं
ठंड लगना
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस होना
कारण
पेम्फिगस होने के कारण क्या हैं?
पेम्फिगस एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। लेकिन, ये संक्रामक नहीं है। पेम्फिगस के होने का सटीक कारण नहीं पता है। इसका मुख्य अभी अज्ञात है। लेकिन, पेम्फिगस के लक्षणों के आधार पर ऑटोइम्यून डिजीज माना जाता है। ऑटोइम्यून डिजीज में बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडीज स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण शुरू कर देती हैं। जिसके चलते संबंधित व्यक्ति के त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन में घाव और छाले हो जाते हैं। पेम्फिगस शायद ही कभी दवाओं के साइड इफेक्ट से विकसित हो। लेकिन, फिर भी ये देखा गया है कि ब्लड प्रेशर जैसी दवा पेम्फिगस में विपरीत प्रभाव डालती है। इस तरह का पेम्फिगस दवा बंद करते ही खत्म हो जाता है।
जोखिम
पेम्फिगस के साथ मुझे क्या समस्याएं हो सकती हैं?
पेम्फिगस होने का सबसे ज्यादा जोखिम उम्र के मध्य पड़ाव पर होता है। जिसे सामान्य भाषा में अधेड़पन कहते हैं। यहूदी वंश के लोगों में पेम्फिगस वुल्गैरिस सबसे ज्यादा पाया जाता है।
इलाज
यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
पेम्फिगस का निदान कैसे किया जाता है?
पेम्फिगस द्वारा हुए छालों के आधार पर इस विकार के बारे में पता लगाना थोड़ा मुश्किल काम है। इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके मेडिकल हिस्ट्री की जांच करते हैं।
डॉक्टर पेम्फिगस का पता लगाने के लिए छाले के पास आपकी त्वचा को रगड़ कर देखते हैं। जिससे त्वचा पर हुए पेम्फिगस के प्रकार के बारे में पता चलता है।
त्वचा की बायोप्सी कर के भी पेम्फिगस का पता लगाया जाता है। बायोप्सी में त्वचा का छोटा सा सैंपल निकाल कर जांच के लिए लैब में भेजा जाता है।
डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने के लिए कहते हैं। ताकि एंटीबॉडीज का पता लगाया जा सके। पेम्फिगस के लिए जिम्मेदार एंटीबॉडी का नाम डेस्मॉग्लिंस (desmogleins) है। इसी के आधार पर पेम्फिगस का इलाज होता है।
एंडोस्कोपी के द्वारा भी पेम्फिगस वुल्गैरिस का पता लगाया जाता है।
पेम्फिगस का इलाज कैसे होता है?
पेम्फिगस के इलाज के लिए दवाओं का सहारा लिया जाता है। पेम्फिगस के लक्षणों के आधार पर ही डॉक्टर दवाएं आदि देते हैं। इसके अलावा मामला ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टर आपको हॉस्पिटल में भी रुकने के लिए कहते हैं।
दवाएं
पेम्फिगस के इलाज के लिए दवाओं में कॉर्टिकोइस्टेरॉइड दिया जाता है। जिसे त्वचा पर लगाया और मुंह से सेवन किया जाता है। पेम्फिगस के लिए जिम्मेदार एंटीबॉडीज को ठीक करता है। कॉर्टिकोइस्टेरॉइड का ज्यादा डोज ब्लड शुगर, संक्रमण, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, शरीर में फैट आदि की मात्रा को बढ़ा देता है।
एजैथियोप्राइन नामक दवाओं के सेवन से इम्यून सिस्टम ठीक होता है और पेम्फिगस होने का खतरा कम हो जाता है।
बायोलॉजिकल थेरिपीज और इंजेक्शन के द्वारा पेम्फिगस का इलाज किया जाता है। रिटूजिमैब नामक दवा को इंजेक्शन के रूप में देने से पेम्फिगस के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं का निर्माण ब्लॉक हो जाता है।
एंटीबॉडीज, एंटीवायरल और एंटीफंगल दवाओं की मदद से पेम्फिगस में होने वाले संक्रमण को रोका जाता है।
पेम्फिगस में ऐसी एंटीबॉडीज बन जाते हैं जो आपकी त्वचा को प्रभावित करते हैं। इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोब्यूलिन (IVIG) के द्वारा हेल्दी एंटीबॉडीज डाली जाती है जो पेम्फिगस की एंटीबॉडीज को ब्लॉक कर देता है।
हॉस्पिटल में इलाज
पेम्फिगस के गंभीर मामलों का इलाज मरीज को हॉस्पिटल में रोक कर होता है। जिसमें निम्न रूप से इलाज किया जाता है:
पेम्फिगस के द्वारा हुए घावों से आपके शरीर का फ्लूइड लॉस हो जाता है। इसलिए नसों के द्वारा फ्लूइड दिया जाता है।
कभी-कभी मुंह के छाले इतने दर्द देने वाले होते है कि मरीज खा नहीं पाता है तो ऐसे में उसके शरीर में पोषक तत्व नाक द्वारा पेट में भेजा जाता है।
मुंह को सुन्न करने की प्रक्रिया से भी छालों में होने वाले दर्द को कम किया जाता है।
थेराप्यूटिक प्लाज्माफेरेसिस विधि के द्वारा ब्लड सेल्स में से प्लाजमा निकाल दिया जाता है। जिससे पेम्फिगस के लिए जिम्मेदार सेल्स को पनपने का खतरा कम हो जाता है।
पेम्फिगस के द्वारा हुए घावों का ध्यान रखें। संक्रमण न हो इसलिए ड्रेसिंग कराएं।
घरेलू उपचार
जीवनशैली में क्या बदलाव लाएं जो मुझे पेम्फिगस को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?
पेम्फिगस को जीवनशैली में बदलाव और कुछ घरेलू उपाय अपना कर ठीक किया जा सकता है :
पेम्फिगस के लक्षणों के प्रति जागरूकता ही आपका पहला इलाज है। इसलिए अगर आप में पेम्फिगस के लक्षण सामने आ रहे हैं तो आप बिल्कुल भी घबराएं नहीं और डॉक्टर के साथ इलाज प्लान करें।
घाव की देखभाल करें। उसे बार-बार न छुएं। समय-समय पर पट्टियां कराते रहें।
टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे त्वचा पर घाव से राहत मिलती है।
डॉक्टर द्वारा दिए गए दवाओं को समय से लेते रहें।
छालों और घावों को साफ कपड़ों से साफ कर लें। ताकि, इंफेक्शन का जोखिम कम हो।
त्वचा पर चोट लगने से बचाएं। इसके लिए आप बाथ टब में न नहाएं या किसी भी खेलकूद में हिस्सा न लें।
लहसुन, प्याज आदि को न खाएं, इससे मुंह में हुए छाले में जलन हो सकता है।
धूप में कम ही जाएं, वरना और छाले त्वचा पर हो सकते हैं।
अपने ओरल हेल्थ का खास ध्यान रखें। क्योंकि मुंह में छालों से संक्रमण होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
अपने डॉक्टर से विटामिन डी और कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने के लिए पूछ ले।
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